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Pitru Paksh 2018: पितरों के लिए क्यों किया जाता है श्राद्ध, जानिए इसका महत्व!

Pitru Paksh 2018, Shradh, Importance: हिंदू धर्म में मृत पूर्वजों का श्राद्ध करना बहुत ही जरूरी माना गया है। ऐसा कहा जाता है कि जिन पूर्वजों का श्राद्ध नहीं किया जाता है, उनकी आत्मा को मुक्ति नहीं मिलती है।

Author नई दिल्ली | September 25, 2018 12:33 PM
हिंदू धर्म में मृत पूर्वजों का श्राद्ध करना बहुत ही जरूरी माना गया है।

Pitru Paksh 2018, Shradh 2018 Importance: पितृ पक्ष आज से शुरू हो चुका है। पितृ पक्ष में दिवंगत पितरों की आत्मा की शांति के लिए श्राद्ध किया जाता है। ऐसा कहा जाता है कि जिनके पूर्वज नाराज रहते हैं, उनके घर में कभी भी सुख-शांति नहीं आती। कहते हैं कि ऐसे लोगों को हमेशा अपने जीवन में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। ऐसी भी मान्यता है कि दिवंगत पितरों के नाराज होने से घर वालों को व्यापार में धनहानि से जूझना पड़ता है। ऐसे लोग अपने जीवन में मेहनत तो खूब करते हैं लेकिन उन्हें सफलता हासिल नहीं होती। कहते हैं कि ऐसे नाराज पूर्वजों को पितृ पक्ष में श्राद्ध करके प्रसन्न किया जा सकता है। श्राद्ध में पितरों को तृप्त कराने के लिए भोजन कराया जाता है। इसके साथ ही उनकी आत्मा की शांति के लिए पिंडदान और तर्पण करने का भी विधान है।

हिंदू धर्म में मृत पूर्वजों का श्राद्ध करना बहुत ही जरूरी माना गया है। ऐसा कहा जाता है कि जिन पूर्वजों का श्राद्ध नहीं किया जाता है, उनकी आत्मा को मुक्ति नहीं मिलती है। इस प्रकार से हिंदू धर्म में पितृ पक्ष का विशेष महत्व है। ऐसी मान्यता है कि पितृ पक्ष में यमराज पितरों को उनके परिजनों से मिलने के लिए मुक्ति देते हैं। ऐसे में अगर पितरों का श्राद्ध नहीं किया जाए तो उनकी आत्मा को दुख पहुंचता है। पितरों के दुखी होने से घर की खुशियों पर ग्रहण लग जाने की मान्यता है।

बता दें कि हिंदू कैलेंडर के मुताबिक पितृ पक्ष अश्विन मास के कृष्ण पक्ष में पड़ता है। पितृ पक्ष पूर्णिमा तिथी से आरंभ होकर अमावस्या पर समाप्त होता है। सामान्य तौर पर पितृ पक्ष कुल 16 दिनों तक चलता है। हालांकि इस साल तिथि के घटने की वजह से ये एक दिन कम हो गया है। इस साल श्राद्ध की तिथियां इस प्रकार से हैं- 24 सितंबर- पूर्णिमा श्राद्ध, 25 सितंबर- प्रतिपदा, 26 सितंबर- द्वितीया, 27 सितंबर- तृतीया, 28 सितंबर- चतुर्थी, 29 सितंबर- पंचमी, महा भरणी, 30 सितंबर- षष्ठी, 1 अक्टूबर- सप्तमी, 2 अक्टूबर- अष्टमी, 3 अक्टूबर- नवमी, 4 अक्टूबर- दशमी, 5 अक्टूबर- एकादशी, 6 अक्टूबर- द्वादशी, 7 अक्टूबर- त्रयोदशी, चतुर्दशी, मघा श्राद्ध और 8 अक्टूबर- सर्वपित्र अमावस्या।

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