Phalgun Sankashti Chaturthi 2026: हिंदू पंचांग में संकष्टी चतुर्थी का विशेष महत्व माना गया है। यह व्रत हर महीने कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को रखा जाता है, लेकिन फाल्गुन मास की संकष्टी चतुर्थी को खास फलदायी माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन विधि-विधान से भगवान गणेश की पूजा करने और व्रत रखने से जीवन के बड़े से बड़े संकट दूर हो सकते हैं। विघ्नहर्ता गणेश अपने भक्तों की हर परेशानी हर लेते हैं और सुख-समृद्धि का आशीर्वाद देते हैं। ऐसे में आइए जानते हैं कि फाल्गुन संकष्टी चतुर्थी 2026 कब है, पूजा कैसे करनी चाहिए और इसका धार्मिक महत्व क्या है।
फाल्गुन संकष्टी चतुर्थी 2026 तिथि और शुभ मुहूर्त
पंचांग के अनुसार, फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि की शुरुआत 4 फरवरी 2026 को रात 12 बजकर 10 मिनट पर होगी। वहीं, चतुर्थी तिथि का समापन 5 फरवरी 2026 को रात 12 बजकर 23 मिनट पर होगा। उदया तिथि को मानते हुए फाल्गुन संकष्टी चतुर्थी का व्रत 5 फरवरी 2026, गुरुवार को रखा जाएगा। इस दिन चंद्रोदय का समय रात 9 बजकर 45 मिनट बताया गया है। संकष्टी चतुर्थी का व्रत चंद्र दर्शन के बाद ही खोला जाता है, इसलिए चांद निकलने का समय विशेष रूप से महत्वपूर्ण होता है।
संकष्टी चतुर्थी क्यों कहलाती है?
‘संकष्टी’ शब्द का अर्थ होता है – संकट को दूर करने वाली। मान्यता है कि इस दिन भगवान गणेश की पूजा करने से जीवन में चल रहे मानसिक, शारीरिक और आर्थिक संकटों से राहत मिलती है। जो लोग नियमित रूप से संकष्टी चतुर्थी का व्रत रखते हैं, उनके जीवन में बाधाएं कम होती जाती हैं और काम बनने लगते हैं।
फाल्गुन संकष्टी चतुर्थी की पूजा विधि
फाल्गुन संकष्टी चतुर्थी के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि से निवृत्त हो जाएं और साफ वस्त्र धारण करें। व्रत रखने वाले व्यक्ति को मन में भगवान गणेश का ध्यान करते हुए व्रत का संकल्प लेना चाहिए। इसके बाद पूजा स्थान को साफ करें और एक लकड़ी की चौकी पर लाल या पीले रंग का कपड़ा बिछाएं। उस पर भगवान गणेश की मूर्ति या तस्वीर स्थापित करें। अब पूरे पूजा स्थल पर गंगाजल का छिड़काव करें। गणेशजी को जल, फूल, रोली और अक्षत अर्पित करें। संकष्टी चतुर्थी के दिन गणेशजी को मोदक बहुत प्रिय होते हैं, इसलिए मोदक या तिल के लड्डू का भोग जरूर लगाएं।
इसके बाद धूप-दीप जलाकर विधि-विधान से भगवान गणेश की पूजा करें और गणेश आरती पढ़ें। पूजा के समय मन में सुख, शांति और समृद्धि की कामना करें। शाम के समय संकष्टी चतुर्थी की व्रत कथा का पाठ करना भी शुभ माना जाता है। रात में चंद्रमा के उदय होने पर चांद के दर्शन करें और जल से अर्घ्य दें। इसके बाद भगवान गणेश को याद करते हुए व्रत खोलें और प्रसाद ग्रहण करें।
संकष्टी चतुर्थी का धार्मिक महत्व
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, संकष्टी चतुर्थी के दिन भगवान गणेश की पूजा करने से घर में सुख-शांति बनी रहती है। नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और सकारात्मकता का संचार होता है। यह व्रत विशेष रूप से उन लोगों के लिए लाभकारी माना जाता है, जो किसी न किसी समस्या या बाधा से परेशान हैं। कहा जाता है कि संकष्टी चतुर्थी का व्रत करने से मनोकामनाएं पूरी होती हैं और जीवन में स्थिरता आती है। नौकरी, व्यापार, विवाह और स्वास्थ्य से जुड़ी परेशानियों में भी यह व्रत लाभकारी माना गया है। इस दिन चंद्र दर्शन का विशेष महत्व होता है, क्योंकि बिना चांद देखे व्रत अधूरा माना जाता है।
डिसक्लेमर- यह लेख पूरी तरह से ज्योतिषीय गणनाओं और मान्यताओं पर आधारित है। जनसत्ता इसकी सत्यता या इससे होने वाले किसी भी लाभ-हानि की पुष्टि नहीं करता है। अधिक जानकारी के लिए पंचांग, शास्त्र या फिर किसी पंडित से अवश्य जानकारी लें।
