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भक्त शिरोमणि

हनुमान जी की ख्याति भक्त शिरोमणि के रूप में है। राम दरबार की शोभा भक्त हनुमान के बिना पूरी नहीं होती है।

हनुमान जी की ख्याति भक्त शिरोमणि के रूप में है। फाइल फोटो।

हनुमान जी की ख्याति भक्त शिरोमणि के रूप में है। राम दरबार की शोभा भक्त हनुमान के बिना पूरी नहीं होती है। माना जाता है कि भगवान राम का सर्वाधिक स्नेह अगर किसी के प्रति है तो वे हनुमान जी ही हैं। वे माता सीता के भी प्रिय हैं। हनुमान जयंती चैत्र माह की पूर्णिमा को मनाया जाता है। शास्त्रों के मुताबिक चैत्र पूर्णिमा को ही बजरंगबली का जन्म हुआ था। इस साल हनुमान जयंती का पर्व 27 अप्रैल को मनाया जाएगा। मान्यता है कि हनुमान जयंती के दिन बजरंगबली की विधिवत पूजा करने से शत्रु पर विजय मिलने के साथ ही सभी मनोकामनाओं की पूर्ति होती है।

पवनपुत्र हनुमान को भगवान शिव का 11वां अवतार माना गया है। उनका अवतार रामभक्तिऔर भगवान श्री राम के कार्यों को सिद्ध करने के लिए हुआ था। वे बाल ब्रह्मचारी थे और बचपन से लेकर अपना पूरा जीवन उन्होंने राम की भक्तिऔर सेवा में समर्पित कर दिया था।

पौराणिक कथा के मुताबिक एक बार अमरत्व की प्राप्ति के लिए जब देवताओं और असुरों ने समुद्र मंथन किया, तो उससे निकले अमृत को असुरों ने छीन लिया। इसके बाद देव और दानवों में युद्ध छिड़ गया। इसे देख भगवान विष्णु ने मोहिनी रूप धारण किया, जिसे देख देवताओं और असुरों के साथ ही भगवान शिव भी कामातुर हो गए। इस दौरान भगवान शिव ने वीर्य त्याग किया, जिसे पवनदेव ने वानरराज केसरी की पत्नी अंजना के गर्भ में प्रविष्ट कर दिया। इसके फलस्वरूप माता अंजना के गर्भ से श्री हनुमान का जन्म हुआ।

हनुमान जयंती का व्रत रखने वालों को ब्रह्मचर्य का पालन करने के साथ ही कुछ नियमों का पालन करना पड़ता है। इस दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठकर भगवान श्रीराम, माता सीता व श्री हनुमान का स्मरण करने के बाद स्वच्छ होकर हनुमान जी की प्रतिमा स्थापित कर विधिपूर्वक पूजा करनी चाहिए। हनुमान जी को जनेऊ भी चढ़ाई जाती है।

सिंदूर और चांदी का वर्क चढ़ाने की भी परंपरा है। कहा जाता है कि एक बार माता सीता को मांग में सिंदूर लगाते देख हनुमान जी ने इसका महत्व पूछा। माता सीता ने उन्हें बताया कि पति की लंबी आयु के लिए मांग में सिंदूर लगाया जाता है। इसके बाद भगवान श्रीराम की लंबी आयु के लिए हनुमान जी ने अपने पूरे शरीर पर सिंदूर लगा लिया था, इसीलिए हनुमान जयंती के दिन उन्हें सिंदूर चढ़ाया जाता है।

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