हिंदू धर्म में परशुराम जंयती का विशेष महत्व है। यह दिन भगवान परशुराम को समर्पित होता है। भगवान भगवान परशुराम को भगवान विष्णु का छठा अवतार माना जाता है। इनका जन्म ब्राह्मण कुल में हुआ था, लेकिन इन्होंने अन्याय और अधर्म के खिलाफ शस्त्र उठाए। परशु (फरसा) धारण करने के कारण इनका नाम “परशुराम” पड़ा। धार्मिक शास्त्रों के अनुसार परशुराम जी का जन्म अक्षय तृतीया पर हुआ था। इसी दिन भक्त व्रत रखते हैं, पूजा करते हैं और भगवान परशुराम से सुख‑समृद्धि का आशीर्वाद मांगते हैं। आइए जानते हैं इस साल कब है परशुराम जंयती…
परशुराम जंयती तिथि 2026
फ्यूचर पंचांग के अनुसार वैशाख महीने के शुक्ल पक्ष की तृतीया का आरंभ 19 अप्रैल को सुबह 10 बजकर 49 मिनट पर होगा। वहीं, इसका समापन 20 अप्रैल को सुबह 7 बजकर 26 मिनट पर होगा। ऐसे में भगवान परशुराम जयंती का पर्व 19 अप्रैल को मनाया जाएगा।
परशुराम जंयती पूजा का शुभ मुहूर्त
परशुराम जयंती पर पूजा के दो शुभ मुहूर्त पर रहे हैं। वहं पहला पूजा का शुभ मुहूर्त 19 अप्रैल को सुबह 7 बजकर 29 मिनट से लेकर दोपहर 12 बजकर 20 मिनट तक है। वहीं, दूसरा मुहूर्त शाम को 6 बजकर 49 मिनट से लेकर रात 10 बजकर 57 मिनट तक है। आप इन दो मुहूर्त में भगवान परशुराम की विधि-विधान से पूजा कर सकते हैं।
परशुराम जंयती की पूजा-विधि
इस दिन प्रातःकाल स्नान कर व्रत का संकल्प लिया जाता है और घर या मंदिर में भगवान परशुराम की प्रतिमा या चित्र स्थापित किया जाता है। इसके बाद उन्हें चंदन, अक्षत, फूल और तुलसी अर्पित कर विधिवत पूजा की जाती है। श्रद्धालु विष्णु मंत्र या परशुराम स्तुति का पाठ करते हैं और धूप-दीप जलाकर आरती करते हैं। वहीं अंत में भगवान को भोग लगाकर प्रसाद वितरित किया जाता है और जरूरतमंदों को दान देना अत्यंत शुभ माना जाता है, जिससे अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है।
परशुराम जंयती का धार्मिक महत्व
परशुराम जयंती का दिन धर्म, साहस और न्याय के प्रतीक माने जाने वाले भगवान परशुराम को समर्पित होता है। मान्यता है कि इस दिन उनकी पूजा करने से व्यक्ति के जीवन में अन्याय और बाधाओं का नाश होता है, आत्मबल और पराक्रम की वृद्धि होती है। वहीं भगवान परशुराम का जन्म अक्षय तृतीया के दिन हुआ था। इसलिए यह तिथि अक्षय पुण्य देने वाली मानी जाती है, इसलिए इस दिन किए गए दान, जप और तप का फल कभी समाप्त नहीं होता। विशेष रूप से ब्राह्मण समाज के लिए यह पर्व अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है, लेकिन सभी श्रद्धालु इस दिन भगवान विष्णु के इस अवतार की आराधना कर सुख-समृद्धि की कामना करते हैं।
डिसक्लेमर- यह लेख पूरी तरह से धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है। जनसत्ता इसकी सत्यता या इससे होने वाले किसी भी लाभ-हानि की पुष्टि नहीं करता है। अधिक जानकारी के लिए पंचांग, शास्त्र या फिर किसी पंडित से अवश्य जानकारी लें।
