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Parivartini Ekadashi 2018: जानिए क्या होती है परिवर्तनी एकादशी और क्या है इसका महत्व

Parivartini Ekadashi 2018: परिवर्तनी एकादशी पर मां लक्ष्‍मी की पूजा करते समय कुछ खास बातों का ध्यान रखने के लिए कहा जाता है। मां लक्ष्मी की पूजा में उन्हें स‍िंदूर व कमल का फूल जरूर अर्पित करें।

Author नई दिल्ली | September 20, 2018 7:17 AM
परिवर्तनी एकादशी को पद्मा एकादशी भी कहा जाता है।

Parivartini Ekadashi 2018: आज परिवर्तनी एकादशी है। यह एकादशी भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष को पड़ती है। शास्त्रों में परिवर्तनी एकादशी का विशेष महत्व बताया गया है। पुराणों में वर्णित कथाओं के अनुसार इस दिन चतुर्मास की अवधि में योगनिद्रा में सो रहे भगवान विष्णु करवट बदलते हैं। यह वजह है कि परिवर्तनी एकादशी को पद्मा एकादशी भी कहा जाता है। पद्म पुराण में परिवर्तनी एकादशी के बारे में उल्लेख किया गया है। इसमें श्री कृष्ण ने कहा है कि इस एकादशी के दिन विष्णु के वामन रूप की पूजा करनी चाहिए। क्योंकि भगवान इन चार महीनों में वामन रूप में पाताल में निवास करते हैं। ऐसे में वामन रूप की आराधना करने से विशेष लाभ की प्राप्ति होती है।

ऐसा कहा जाता है कि परिवर्तनी एकादशी के दिन इन्द्र सहित सभी देवताओं ने व्रत रखकर देवलोक पर पुनः अधिकार पाने के लिए देवी लक्ष्मी की पूजा की थी। इसलिए परिवर्तनी एकादशी के दिन माता लक्ष्मी की पूजा-अर्चना करने का भी विधान है। माना जाता है कि लक्ष्मी मां के प्रसन्न होने से धन की प्राप्ति होती है और व्यक्ति के जीवन के सारे कष्ट दूर हो जाता है। मालूम हो कि परिवर्तनी एकादशी पर व्रत रखने के भी विशेष लाभ बताए गए हैं। कहते हैं कि इस व्रत से वाजपेयी यज्ञ के समान पुण्य प्राप्त होता है। इससे व्रती को मृत्यु के बाद मोक्ष की प्राप्ति होती है।

परिवर्तनी एकादशी पर मां लक्ष्‍मी की पूजा करते समय कुछ खास बातों का ध्यान रखने के लिए कहा जाता है। मां लक्ष्मी की पूजा में उन्हें स‍िंदूर व कमल का फूल जरूर अर्पित करें। शाम के समय माता लक्ष्मी की आरती करना भी जरूरी बताया गया है। इस आरती में आप अपने परिवार के सभी सदस्यों और पड़ोसियों को भी शामिल करें। वहीं, परिवर्तनी एकादशी पर भगवान विष्णु की पूजा करते समय उन्हें पीले रेशमी वस्त्र अर्पित करने चाहिए। इसके साथ ही उन्‍हें केले का भोग भी लगाएं। इससे विष्णु जी के प्रसन्न होने की मान्यता है।

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