हिंदू धर्म में अधिकमास की परमा एकादशी का विशेष महत्व माना गया है। यह एकादशी भगवान विष्णु को समर्पित होती है और अधिकमास के कृष्ण पक्ष में पड़ती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन विधि-विधान से भगवान विष्णु की पूजा, व्रत और दान-पुण्य करने से अनेक जन्मों के पापों का नाश होता है। साथ ही व्यक्ति को सुख, समृद्धि और मोक्ष की प्राप्ति होती है। आपको बता दें कि अधिकमास में आने वाली यह एकादशी सभी एकादशियों में अत्यंत फलदायी मानी जाती है। वहीं इस साल परमा एकादशी का व्रत 11 जून को रखा जाएगा। आइए जानते हैं तिथि और पूजा का शुभ मुहूर्त…

अधिक मास में कब है मासिक शिवरात्रि? जान लें सही तिथि, पूजा का शुभ मुहूर्त और धार्मिक महत्व

मलमास की परमा एकादशी कब है (Kab Hai Parma Ekadashi)

फ्यूचर पंचांग के मुताबिक एकादशी तिथि 10 जून, बुधवार को रात 12 बजकर 58 मिनट से आरंभ होगी और 11 जून, गुरुवार को रात 10 बजकर 37 मिनट पर समाप्त होगी। ऐसे में परमा एकादशी का व्रत 11 जून 2026 को रखा जाएगा।

परमा एकादशी शुभ मुहूर्त 

परम एकादशी पर पूजा का सबसे शुभ मुहूर्त 11 जून को 10 बजकर 37 मिनट से लेकर दोपहर 2 बजकर 6 मिनट तक रहेगा।  इस दौरान सभी भक्त श्री हरि की विधि-विधान से पूजा कर सकते हैं। 

परमा एकादशी का धार्मिक महत्व

परमा एकादशी का जिक्र कई पौराणिक ग्रंथों में मिलता है। मान्यता है कि इस दिन श्रद्धापूर्वक व्रत रखने और भगवान विष्णु के मंत्रों का जप करने से व्यक्ति को विशेष पुण्यफल प्राप्त होता है। वहीं अधिकमास स्वयं भगवान विष्णु को समर्पित माना गया है, इसलिए इस माह में पड़ने वाली परमा एकादशी का महत्व और भी बढ़ जाता है। कहा जाता है कि जो भक्त इस दिन उपवास रखकर विष्णु सहस्रनाम, गीता पाठ और भगवान विष्णु की आराधना करता है, उसके जीवन के कष्ट दूर होते हैं। साथ ही परिवार में सुख-शांति और समृद्धि का वास होता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार परमा एकादशी का व्रत करने से अश्वमेध यज्ञ के समान पुण्य प्राप्त होता है और मोक्ष का मार्ग प्रशस्त होता है।

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डिसक्लेमर- यह लेख पूरी तरह से ज्योतिषीय गणनाओं और मान्यताओं पर आधारित है। जनसत्ता इसकी सत्यता या इससे होने वाले किसी भी लाभ-हानि की पुष्टि नहीं करता है। अधिक जानकारी के लिए पंचांग, शास्त्र या फिर किसी पंडित से अवश्य जानकारी लें।