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Papmochani Ekadashi: पापमोचिनी एकादशी व्रत की पूजा विधि, व्रत कथा, मुहूर्त, नियम सभी यहां

Papmochani Ekadashi 2020: पापमोचिनी एकादशी के दिन भगवान विष्णु के चतुर्भुज स्वरूप की पूजा की जाती है। कहा जाता है कि इस व्रत को करने से जाने अनजाने में हुए पापों का नाश हो जाता है और मोक्ष की प्राप्ति होती है।

एकादशी व्रत के नियमों का पालन दशमी तिथि से करना होता है। एकादशी से एक दिन पहले सात्विक भोजन करें और भगवान विष्णु की अराधना करते हुए सोएं।

Papmochani Ekadashi Vrat Katha, Muhurat, Puja Vidhi: हिंदू वर्ष की आखिरी एकादशी 19 मार्च को पड़ रही है। जो हर साल चैत्र मास के कृष्ण पक्ष में आती है। पापमोचिनी एकादशी के दिन भगवान विष्णु के चतुर्भुज स्वरूप की पूजा की जाती है। कहा जाता है कि इस व्रत को करने से जाने अनजाने में हुए पापों का नाश हो जाता है और मोक्ष की प्राप्ति होती है। जानिए पापमोचिनी एकादशी की व्रत विधि, मुहूर्त और नियम…

कैसे रखें पापमोचिनी एकादशी व्रत: एकादशी व्रत के नियमों का पालन दशमी तिथि से करना होता है। एकादशी से एक दिन पहले सात्विक भोजन करें और भगवान विष्णु की अराधना करते हुए सोएं। फिर एकादशी के दिन प्रात: काल स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करके पापमोचिनी एकादशी व्रत का संकल्प लें। पूरा दिन व्रत रखने के बाद शाम को भगवान विष्णु की पूजा करें और अपनी इच्छानुसार उन्हें भोग लगाएं। पूजा में विष्णु जी को अक्षत, फूल, चंदन, गंध आदि चीजें अर्पित करें। फिर एकादशी व्रत की कथा पढ़ें।

Papmochani Ekadashi Vrat Katha: पापमोचिनी एकादशी की संपूर्ण व्रत कथा यहां पढ़ें

पूरे दिन श्रीहरि विष्णु के नाम का जागरण करें इससे पुण्य की प्राप्ति होती है। फिर द्वादशी के दिन स्नान कर फिर से भगवान विष्णु की पूजा करें। ब्राह्मणों को भोजन कराएं और उन्हें दक्षिणा देकर विदा करें। फिर शुभ मुहूर्त में व्रत का पारण करें।

पापमोचिनी एकादशी का मुहूर्त: एकादशी तिथि का प्रारंभ 19 मार्च को 04:26 ए एम बजे से होगा और इसका समापन 20 मार्च को 05:59 ए एम पर। व्रत के पारण का समय 20 मार्च को 01:17 पी एम से 03:41 पी एम तक रहेगा। पारण से मतलब व्रत को खोलने से है। पारण तिथि पर हरि वासर 12:28 पी एम पर समाप्त होगा।

एकादशी व्रत में क्या खाएं: एकादशी व्रत में घर में निकाला हुआ फल का रस, फल अथवा दूध का सेवन कर सकते है। व्रतधारी में यदि सामर्थ्य न हो तो एक बार भोजन भी किया जा सकता है। यदि फलाहारी है तो शलजम, गोभी, गाजर, पालक, कुलफा का साग इत्यादि चीजों का सेवन नहीं करना चाहिए।

भगवान विष्णु के मंत्र (Lord Vishnu Mantra):

1. ॐ नमो भगवते वासुदेवाय

2. श्रीकृष्ण गोविन्द हरे मुरारे।
हे नाथ नारायण वासुदेवाय।।

3. ॐ नारायणाय विद्महे। वासुदेवाय धीमहि। तन्नो विष्णु प्रचोदयात्।।

4. ॐ विष्णवे नम:

5. ॐ हूं विष्णवे नम:

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