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Papankusha Ekadashi Katha, Muhurat, Puja Vidhi: पापांकुशा एकादशी आज, जानिए शुभ मुहूर्त, व्रत कथा, विधि और पारण का समय

Papankusha Ekadashi Muhurat, Katha, Parana Time in Hindi: पापांकुशा एकादशी व्रत में इस जगत के पालनहार भगवान विष्णु की पूजा की जाती है।

Author नई दिल्ली | Published on: October 9, 2019 7:26 AM
Papankusha Ekadashi 2019: मान्यता यह भी है कि पापांकुशा एकादशी का लाभ आने वाली दस पीढ़ी तक को मिलता है।

Papankusha Ekadashi Katha, Muhurat, Puja Vidhi, Parana Time: पापांकुशा एकादशी आश्विन शुक्ल पक्ष की एकादशी को मनाई जाती है। इस महीने यह एकादशी 09 अक्टूबर यानि आज है। पापांकुशा एकादशी के बारे में पुराणों में वर्णन आया है उसके मुताबिक इस व्रत को विधि पूर्वक करने से जीवन में सुख, समृद्धि और ऐश्वर्य की प्राप्ति के साथ-साथ पापों से मुक्ति मिलती है। इसलिए इस एकादशी का नाम ‘पापांकुशा एकादशी’ पड़ा है। कहा जाता है कि जो मनुष्य इस एकादशी का विधिवत पालन करते हुए व्रत रखता है उसे स्वर्ग की प्राप्ति होती है। मान्यता यह भी है कि पापांकुशा एकादशी का लाभ आने वाली दस पीढ़ी तक को मिलता है।

शुभ मुहूर्त: दृक पंचांग के मुताबिक पापांकुशा एकादशी का मुहूर्त का आरंभ 08 अक्टूबर दिन मंगलवार दोपहर 02 बजकर 50 मिनट से शुरू होकर 09 अक्टूबर दिन बुधवार शाम 05 बजकर 19 मिनट तक रहेगा। इसके बाद पारण के 10 अक्टूबर को सुबह 06 बजकर 19 मिनट से लेकर 08 बजकर 38 मिनट तक का समय शुभ है। व्रती इस दौरान पारण पर सकते हैं।

विधि: पापांकुशा एकादशी व्रत में इस जगत के पालनहार भगवान विष्णु की पूजा की जाती है। पूजन के लिए पुष्प, नारियल, धूप और दीप को प्रयोग में लाना चाहिए। एकादशी तिथि को सवेरे उठकर नहा-धोकर व्रती को व्रत का संकल्प लेना चाहिए। इसके बाद विधि पूर्वक भगवान विष्णु की पूजा करें।

भगवान विष्णु का विधिवत पूजन के बाद एकादशी की कथा सुनी, सुनाई जाती है। इस व्रत में विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ भी किया जाता है। व्रत का समापन एकादशी तिथि के बाद द्वादशी में किया जाता है। द्वादशी तिथि में ब्राह्मण-भोजन के बाद व्रत का पारण किया जाता है।

कथा: व्रत कथा के मुताबिक अनुसार विन्ध्यपर्वत पर क्रोधन नाम का एक बहेलिया रहता था। जब वह इहलोक पधारने को हुआ तब यमराज ने अपने दूत को उसे दरबार में लाने के लिए भेजा। कहते हैं कि दूतों ने यमराज की बात उस बहेलिया को पहले ही बता दी था। बहेलिया अपनी मृत्यु के डर से अंगिरा ऋषि के आश्रम में गया और उनसे इस बारे में विस्तार से बताया। साथ ही वह ऋषि से विनती करने लगा। जिसके बाद अंगिरा ऋषि ने उस बहेलिया को अश्विन मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी का व्रत विधिपूर्वक करने के लिए कहा। मान्यता है कि इस व्रत को करने से बहेलिया समस्त पापों से मुक्ति पाकर स्वर्ग लोक को प्राप्त किया।

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