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कार्तिक पूर्णिमा 2017 पूजा विधि: जानिए इस शुभ पूर्णिमा के दिन किस विधि से की जाती है पूजा

Kartik Purnima 2017 Puja Vidhi, Ganga Snan 2017: पौराणिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन भगवान शिव ने त्रिपुरासुर का वध किया था और तीनों लोकों को असुरों के प्रकोप से बचाया था।

Kartik Purnima 2017 Puja Vidhi: जानिए कार्तिक पूर्णिमा के दिन किस विधि से पूजा करना होगा शुभ।

हिंदू पंचाग के अनुसार एक वर्ष में 16 अमवस्याएं आती हैं लेकिन सबसे लंबी और काली अमावस्या कार्तिक माह की होती है। इस दिन दिवाली की पूजा की जाती है। दिवाली के 15 दिन बाद कार्तिक माह की पूर्णिमा होती है जो विश्व में फैले सारे अंधेरे को खत्म करने की रौशनी लेकर आती है। इस दिन गंगा स्नान किया जाता है और महिलाएं व्रत करती हैं। इस दिन माता गंगा की पूजा भी की जाती है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन भगवान शिव ने त्रिपुरासुर का वध किया था और तीनों लोकों को असुरों के प्रकोप से बचाया था। इस दिन के लिए ये भी मान्यता है कि सभी देव काशी आकर गंगा माता का पूजन करके दिवाली मनाते हैं।

कार्तिक पूर्णिमा की पूजन विधि-
इस दिन सुबह स्नान आदि करके पूरा दिन व्रत रखते हैं और भगवान विष्णु की आराधना करते हैं। श्रद्धालुगण इस दिन गंगा स्नान के लिए भी जाते हैं, जो गंगा स्नान के लिए नहीं जा पाते वह अपने नगर की ही नदी में स्नान करते हैं। भगवान का भजन करते हैं। संध्या समय में मंदिरों, चौराहों, गलियों, पीपल के वृक्षों तथा तुलसी के पौधे के पास दीपक जलाते हैं। लम्बे बाँस में लालटेन बाँधकर किसी ऊंची जगह पर “आकाशी” प्रकाशित करते हैं। इस व्रत को ज्यादातर स्त्रियां करती हैं।

इस दिन कार्तिक पूर्णिमा का व्रत करने वाले व्यक्ति को ब्राह्मण को भोजन अवश्य कराना चाहिए। भोजन से पहले हवन कराएं। संध्या समय में दीपक जलाना चाहिए। अपनी क्षमतानुसार ब्राह्मण को दान-दक्षिणा देनी चाहिए। कार्तिक पूर्णिमा के दिन रात्रि में चन्द्रमा के दर्शन करने पर शिवा, प्रीति, संभूति, अनुसूया, क्षमा तथा सन्तति इन छहों कृत्तिकाओं का पूजन करना चाहिए| पूजन तथा व्रत के उपरान्त बैल दान से व्यक्ति को शिवलोक प्राप्त होता है, जो लोग इस दिन गंगा तथा अन्य पवित्र स्थानों पर श्रद्धा-भक्ति से स्नान करते हैं, वह भाग्यशाली होते हैं।

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