Panch Mahapurush Raj Yoga: वैदिक ज्योतिष शास्त्र में पंच महापुरुष योग को अत्यंत शुभ माना जाता है। ये काफी विशिष्ट और दुर्लभ योग माने जाते हैं। कुंडली में इन 5 राजयोगों में से किसी एक के भी बनने से व्यक्ति को मान-सम्मान, पद-प्रतिष्ठा, बुद्धि आदि में बढ़ोतरी आदि देखने को मिलती है। फलदीपिका ग्रंथ के अनुसार, जब मंगल, बुध, बृहस्पति, शुक्र, शनि में से कोई ग्रह स्वगृही या उच्च राशि का होकर केंद्र में हो तो क्रमशः यह पांचों योग का निर्माण होता है। इन राजयोग के बनने से जातक राजा के समान सुख भोगता है। फलदीपिका के छठे अध्याय ‘योग‘ में इस बारे में विस्तार से दिया गया है। आइए आज ‘कुंडली रहस्य‘ में जानते हैं कुंडली में ये पंच महापुरुष योग कैसे बनते हैं और इससे जन्म लेने वाले व्यक्ति पर क्या प्रभाव देखने को मिलता है।

पंच महापुरुष योग है क्यों खास?

फलदीपिका के रचियता मन्त्रेस्वर महाराज का कथन है कि यदि चंद्र लग्न से केंद्र में भी उपयुक्त इन पांचों ग्रहों में कोई स्वगृही या उच्च राशि का होकर चंद्र केंद्र में हो तो मालव्य आदि सिद्ध योग बनते हैं। किंतु इसका ये मतलब नहीं है कि जन्म लग्न से केंद्र का विचार करने के जैसे ही चंद्र लग्न से भी विचार करना चाहिए। यदि कोई एक ग्रह उपयुक्त इस प्रकार से योग कारक हो तो मनुष्य भाग्यवान होता है।

अगर दो ग्रह योग बनाते हैं, तो व्यक्ति राजा के समान होता है। तीन ग्रह योग बनाते हैं, तो राजा गोता है और चार ग्रह योग बनाते हैं तो महाराजा की तरह व्यक्ति होती है। इसके अलावा अगर कुंडली में रुचक, भद्र, हंस, मालव्य और शश ये पांचों योग हों वह इससे भी उच्च पदवी प्राप्त करता है।
इस उदाहरण कुंडली में रुचक, मालव्य तथा शश योग विद्यमान हैं। जन्मलग्न से केंद्र में स्वराशि का मंगल होने से रुचक योग बनता है। जन्मलग्न से चतुर्थ भाव (केंद्र) में स्वराशि का शुक्र होने से मालव्य योग बनता है। तथा जन्मलग्न से सप्तम भाव (केंग्र) में स्वराशि का शनि होने से शश योग बनता है। यदि कन्या राशि में बुध हो, तो भद्र योग बन सकता है। इसी प्रकार यदि मीन राशि में बृहस्पति हो, तो चन्द्र लग्न से दशम भाव में स्वराशि का बृहस्पति होने के कारण हंस योग भी बन सकता है।

पंच महापुरुष कैसे बनता है?

यदि मंगल मेष, वृश्चिक या मकर राशि का होकर जन्म-कुण्डली में केन्द्र में हो तो ‘रूचक’ योग होता है। यदि मिथुन या कन्या राशि में स्थित बुध केन्द्र में हो तो ‘भद्र’ योग होता है। यदि कर्क, धनु या मीन राशि में स्थित होकर बृहस्पति केन्द्र में हो तो ‘हंस’ योग होता है। यदि वृष, तुला या मीन राशि में स्थित शुक्र हो और केन्द्र में हो तो मालव्य योग होता है। यदि तुला, मकर या कुंभ राशि में शनि बैठा हो और जन्म लग्न चतुर्थ, सप्तम, या दशम इन चारों स्थानों में से किसी एक में हो, तो शश योग होता है। अब अन्य पाँचों में से किसी एक के जन्म व्यक्ति का स्वरूप या प्रभावशाली कैसा होगा यह बताते हैं।

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रुचक योग में जन्मे लोग

जो व्यक्ति रुचक योग में पैदा होता है, उसका चेहरा दीर्घ (लंबा) होता है। वह अपने साहस के बल पर धन प्राप्त करता है। वह शूरवीर, बलवान, शत्रुओं को परास्त करने वाला तथा स्वाभिमानी होता है। ऐसा व्यक्ति अपने गुणों के कारण प्रसिद्ध और कीर्तिमान होता है तथा प्रत्येक कार्य में विजय प्राप्त करता है। वह उच्च पदाधिकारी अथवा नेतृत्वकारी पद पर आसीन हो सकता है।

भद्र योग में जन्मे लोग

जो व्यक्ति भद्रयोग में पैदा होता है, तो वह कुशल, बुद्धि से बलवान होने के साथ साफ-सुथरा रहता है। वह अपने शरीर, वस्त्र, रहन-सहन स्वच्छ रखता है। इसके अलावा वरिष्ठ, विद्वान लोग उसकी प्रशंसा, सराहना करते हैं। ये काफी चतुर प्रवृत्ति के होते हैं। ऐसा व्यक्ति अत्यन्त वैभवशाली होता है और राजा यानी उच्च पदाधिकारी होता है।

हंस योग में जन्मे लोग

जो हंस योग में उत्पन्न हों उसके हाथ और पैरों में शंख, कमल, मत्स्य और अंकुश के चिन्ह हों। उसका शरीर देखने में बहुत शुभ होता है। लेकिन इनके लिए शत्रु को पछाड़ना या हराना भी मारने के बराबर है। ये काफी बुद्धिमान होते हैं। इसके साथ ही ऐसा व्यक्ति अच्छा भोजन करता है और सज्जन लोग की प्रशंसा का पात्र भी बनता है।

मालव्य योग में जन्मे लोग

जो व्यक्ति मालव्य योग में पैदा होता है वह धनवान और पुष्ट अंग वाला होता है। उत्तम भोजन करने वाला, विद्वान, प्रसन्नमुख, शान्तिचित्त, पुत्र और स्त्रियों के सुख से युक्त, सदैव वृद्धि को प्राप्त, यशस्वी और अच्छी सवारियों (मोटर आदि) का मालिक होता है।

शश योग में जन्मे लोग

जो व्यक्ति शश योग में उत्पन्न होते हैं वे अत्यन्त प्रभावशाली होते हैं। किंतु शश में मालिक हो या नवम या दशम के स्वामी अर्थात उच्च पदाधिकारी हो। ऐसा व्यक्ति दयावान होता है और उसकी मातहती में अच्छे-अच्छे लोग काम करते हैं। ऐसे लोगों की अन्य योग तारीफ जरूर करेंगे। किंतु वास्तव में शश योग में उत्पन्न लोगों का आचरण उत्तम नहीं होता। ऐसे व्यक्ति वृद्ध पुरुषों को स्त्रियों के अवसर रखते हैं। ऐसे लोग कभी-कभी होते हैं।

ज्योतिष के अधिकांश प्रसिद्ध ग्रंथों में इन पंच महापुरुष योगों का वर्णन मिलता है। लेकिन मानसागरी ग्रंथ में इनके भंग (निष्प्रभावी होने) की स्थितियां भी बताई गई हैं। वहां कहा गया है कि यदि महापुरुष योग बनाने वाला मंगल, बुध, बृहस्पति, शुक्र या शनि सूर्य अथवा चंद्रमा के साथ स्थित हो, तो योग का पूर्ण प्रभाव नहीं मिलता। ऐसी स्थिति में जातक राजा अथवा राजतुल्य नहीं बनता, किंतु उस ग्रह की दशा या अन्तर्दशा में शुभ एवं सफल फल अवश्य प्राप्त होते हैं।

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डिस्क्लेमर: इस लेख में दी गई ज्योतिषीय जानकारी पारंपरिक मान्यताओं और शास्त्रीय संदर्भों पर आधारित है। ज्योतिष एक विश्वास और अध्ययन की परंपरा है, इसे वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित भविष्यवाणी की विधि नहीं माना जाता। राशिफल और ज्योतिषीय विश्लेषण को मार्गदर्शन या मनोरंजन के रूप में लें। किसी भी महत्वपूर्ण निर्णय (जैसे स्वास्थ्य, करियर, वित्त या अन्य जीवन संबंधी मामलों) के लिए अपने विवेक और विशेषज्ञ सलाह को प्राथमिकता दें।