ताज़ा खबर
 

नजरिया बदलने से बदल जाते हैं नजारे

नजरिया यानी कि आपकी नजर में आपने क्या देखा सोचा। नजरिया हमारे व्यक्तित्व का एक अहम हिस्सा है। हमारा नजरिया ही हमारे जीवन यात्रा की दशा और दिशा तय करता है।

सांकेतिक फोटो।

नरपत दान चारण

नजरिया यानी कि आपकी नजर में आपने क्या देखा सोचा। नजरिया हमारे व्यक्तित्व का एक अहम हिस्सा है। हमारा नजरिया ही हमारे जीवन यात्रा की दशा और दिशा तय करता है। सहज रूप में देखें तो आप किसी चीज को किस नजर और इरादे से देखते है वही आपके जीवन का नजरिया होता है। यह सकारात्मक और नकारात्मक दोनों तरह का होता है। जब आपकी नजर नकारात्मक हो जाती है, तो नजरिया निराशा और दुख का सबब बन जाता है और जब यह सकारात्मक रूप ले लेता है, तो जीवन सहज और सरल दिखने लगता है। लेकिन बड़ा सवाल यह है कि आप नकारात्मक नजरिए को सकारात्मक में रूपांतरित कैसे कर सकते हैं।

इसका जवाब है… रूपांतरण आपकी सोचने समझने की क्षमता पर निर्भर करता है। आप जो दुख महसूस करते हुए जो सोच रहे हैं,उसके विपरीत सोचना शुरू कर दीजिए। आपने सुना होगा कि अक्सर कहा जाता है कि ‘नजरिया बदलने से नजारे बदल जाते है।’ तो बस इतना भर ध्यान रखना है कि कोई भी घटना हो ,उसे दुखदायी ना मानकर, उसे स्वीकार कर, उसे एक नई सीख देने वाली बात मानकर और आगे का रास्ता सहज मानकर अग्रसर होना ही सकारात्मक नजरिया का मार्ग है।

इसे एक उदाहरण से समझा जा सकता है। जैसे कि कोई एक आदमी कई मुसीबतों का सामना करता है और सोचता है कि गत माह मेरो पांव को चोट पहुंची, गंभीर होने के कारण आॅपरेशन किया गया। इस के कारण मुझे बहुत लंबे समय तक बिस्तर पर रहना पड़ा। इस दौरान मेरे अन्य साथी मुझसे बहुत आगे निकल गए। यही नहीं, बीते दिनों ही बेटा कार दुर्घटना में घायल हो जाने के कारण आइसीएस की परीक्षा में अनुत्तीर्ण हो गया क्योंकि उसे बहुत दिनों तक अस्पताल में रहना पड़ा। कार की टूट-फूट का नुकसान हुआ, वह अलग। यह मेरे लिए बहुत दुखदायी समय है। मैंने आखिर ईश्वर का क्या बिगाड़ा था। इतना कुछ नुकसान हो गया। अब क्या होगा पता नहीं।…इस तरह सोचना ही नकारात्मक नजरिया है।

अब इसकी जगह अगर वह आदमी यह सोचता कि आखिरकार मुझे उस पांव की चोट से छुटकारा मिल ही गया, जिसके कारण मैं कई दिनों से असहाय दर्द से परेशान था। और यह भी अच्छा ही हुआ कि भगवान ने दुघर्टना में मेरे इकलौते बेटे की रक्षा की। कार टूट-फूट गई, उसको ठीक करा दूंगा, लेकिन मेरे बच्चे की जिंदगी बच गई। उसे नई जिंदगी तो मिली ही और हाथ-पाव भी सलामत हैं। शुक्र है कि मेरा यह समय अच्छा रहा। इस समय में मुझ पर भगवान की बहुत कृपा रही। ईश्वर से यही प्रार्थना है कि ऐसे ही सदैव मुझ पर अपनी कृपादृष्टि बनाए रखना। बस इस तरह सोचना सकारात्मक नजरिया है,जो जीवन को सुख का आभास दे सकता है।

हमारा नजरिया हमारी सफलता और जीवन पर बहुत बड़ा असर डालता है। इसलिए हमें स्वयं को, अपने परिवार और मित्रों को हमेशा सकारात्मक नजरिया रखना और देना चाहिए। किसी भी बात पर पूर्ण राय बनाने के पूर्व, अलग कोण से सोचिए और फिर जाकर निर्णय लीजिए। हर चीज में सुख ढूंढने की आदत बनाइए। मुसीबतों में अवसर ढूंढने का प्रयास करिए क्योंकि सिर पकड़कर बैठे रहने से कुछ हासिल भी नहीं होने वाला। याद रखिए दुनिया में सबको बदलने का विफल प्रयास करने से कई गुना ज्यादा सरल है, अपने नजरिए को बदल लेना।

ज्यादातर लोग अपने क्षेत्र में इसलिए सफल नहीं हो पाते क्योंकि वे हमेशा नकारात्मक नजरिए पर ही अपने नजरें गड़ाते है। यदि आपको अपने जीवन में सफल होना है तो आपको अपने अंदर सकारात्मक नजरिया विकसित करना होगा। सफलता का प्रतिशत तब तक नहीं बढेगा जब तक आप अपने अंदर सही नजरिया वाला बीज नहीं बो देते।

इन तरीकों को अपनाकर नजरिया बदल सकते आप..
ये हैं नजरिया बदलने के सोपान –
-उस समस्या / क्षेत्र की पहचान करें जिसके लिए नजरिया बदलने की जरूरत है।
-अपनी वर्तमान मौलिक सकारात्मक धारणाओं की एक सूची तैयार करें।
-वर्तमान स्थिति को विभिन्न आयामों से देखने की कोशिश करें।
-रचनात्मक और अभिनव सोच का इस्तेमाल करें।
-कई बार विचार मंथन के जरिये स्थिति की विभिन्न आयामों से कल्पना कर पाना संभव होता है। इसलिए विचार मंथन करें ।
ृमुसीबतों में सकारात्मक सोच रखने वाले मित्रों से भी मदद लें ।

Next Stories
1 शनि जयंती, ज्येष्ठ अमावस एक साथ
2 इन 4 राशि वालों पर मां लक्ष्मी की रहती है विशेष कृपा, देखें आपकी राशि इसमें है या नहीं?
3 सुख-समृद्धि के लिए सोमवार के दिन क्या करें और क्या न करें? जानिए क्या है मान्यता
ये पढ़ा क्या?
X