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Osho Quotes: ओशो के जन्मदिन के मौके पर जानिए उनके प्रेम को लेकर क्या थे विचार

ये कोई मायने नहीं रखता है कि आप किसे प्यार करते हैं, कहां प्यार करते हैं, क्यों प्यार करते हैं, कब प्यार करते हैं, कैसे प्यार करते हैं और किस लिए प्यार करते हैं, मायने सिर्फ यही रखता है कि आप केवल प्यार करते हैं।

प्यार की सर्वश्रेष्ठ सीमा आजादी है, पूरी आजादी। किसी भी रिश्ते के खत्म होने का मुख्य कारण आजादी का न होना ही है।

11 दिसंबर को आध्यात्मिक गुरु आचार्य रजनीश ‘ओशो’ का जन्मदिन है। इनका जन्म इसी दिन 1931 को मध्य प्रदेश के रायसेन जिले में हुआ था और मृत्यु 19 जनवरी 1990 के दिन। इन्होंने व्यक्तिगत जीवन से जुड़े लगभग हर विषयों पर खुलकर और तर्कसंगत तरीके से अपने विचार रखें। उनके कई विचार विवादित भी रहे। लेकिन समय के साथ-साथ उनके स्वीकार्यता मिलती गई। ओशो के अनुसार ‘आशा के कारण ही निराशा हाथ लगती है, न कि संसार की वजह से। संसार को क्या पड़ी है। संसार पूरी तरह से तटस्थ है।’

ओशो के विचार (Osho Quotes, Message, Vichar): 

– प्यार की सर्वश्रेष्ठ सीमा आजादी है, पूरी आजादी। किसी भी रिश्ते के खत्म होने का मुख्य कारण आजादी का न होना ही है।

– आधे-अधूरे ज्ञान के साथ कभी आगे न बढ़ें। ऐसा करने पर आपको लगेगा कि आप अज्ञानी हो और अंत तक अज्ञानी ही बने रहोगे।

– दर्द आपको दुख देने के लिए नहीं है। लोग यही भूल करते हैं। यह दर्द आपको और अधिक सतर्क करता है। क्योंकि लोग केवल तब सतर्क होते हैं, जब तीर उनके दिल में गहरा चला जाता है और उन्हें आघात पहुंचता है।

– बहुत ही सुन्दर शब्द जो एक मंदिर के दरवाजे पर लिखे थे ‘ठोकरे खा कर भी ना संभले तो मुसाफिर का नसीब, वरना पत्थरों ने अपना फर्ज निभा ही दिया।’

– मैं तो दो ही शब्दों पर जोर देता हूं- प्रेम और ध्यान। क्योंकि मेरे लिए अस्तित्व के मंदिर के दो ही दरवाजे हैं। एक का नाम है प्रेम और एक का नाम ध्यान।

– जब आप हंस रहे होते हैं तो ईश्वर की इबादत कर रहे होते हैं। और जब आप किसी को हंसा रहे होते हैं तो ईश्वर आप की इबादत कर रहा होता है।

– ये कोई मायने नहीं रखता है कि आप किसे प्यार करते हैं, कहां प्यार करते हैं, क्यों प्यार करते हैं, कब प्यार करते हैं, कैसे प्यार करते हैं और किस लिए प्यार करते हैं, मायने सिर्फ यही रखता है कि आप केवल प्यार करते हैं।

– इस दुनिया में दोस्ती ही सच्चा प्यार है। दोस्ती का भाव प्यार का सर्वोच्च रूप है, जहां कुछ भी मांगा नहीं जाता, कोई शर्त नहीं होती, जहां बस दिया जाता है।

– प्रेम एक आध्यात्मिक घटना है, वासना भौतिक, अहंकार मनोवैज्ञानिक है, प्रेम आध्यात्मिक।

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