Navratri Navami 2021: नवरात्रि के नौवें दिन हवन के बाद किया जाता है कन्या पूजन, जानिए पूरी विधि

Ram Navami Puja Vidhi, Havan And Kanya Pujan Method: धार्मिक मान्यताओं अनुसार चैत्र शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को ही भगवान राम का जन्म हुआ था। जिससे इस दिन का महत्व और भी अधिक बढ़ जाता है।

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Navratri Kanya Pujan And Havan Vidhi: नवरात्रि की नवमी तिथि 21 अप्रैल को है। इस दिन कई लोग कन्या पूजन कर अपना व्रत खोल लेते हैं। इस दिन को राम नवमी के नाम से भी जाना जाता है। धार्मिक मान्यताओं अनुसार चैत्र शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को ही भगवान राम का जन्म हुआ था। जिससे इस दिन का महत्व और भी अधिक बढ़ जाता है। नवमी तिथि पर हवन भी करने की परंपरा है। यहां जानिए नवरात्र के नौवें दिन कैसे करें हवन और कन्याओं का पूजन…

कन्या पूजन विधि: नवरात्रि कन्या पूजन के लिए नौ कन्याओं और एक लड़के को आमंत्रित कर लें। सभी के आने पर उनके पैर धोएं और उन्हें आसन पर बिठाएं। इसके बाद कन्याओं और एक बालक को रोली, कुमकुम, अक्षत से तिलक लगाएं। फिर गाय के उपले को जलाकर उसमें लौंग, कपूर और घी डालें। कन्याओं के लिए बनाए गए भोजन को पहले माता रानी को अर्पित करें। इसके बाद सभी कन्याओं और लांगुरिया को भोजन परोसना शुरू करें। जब सभी कन्याएं और बालक भोजन कर लें तो उन्हें अपनी इच्छा के अनुसार दान-दक्षिणा दें। सभी कन्याओं के पैर छूकर उनका आशीर्वाद प्राप्त करें। अंत में सभी कन्याओं को विदा करें और उनके पर जल के छींटें डालें।

नवरात्रि हवन विधि: नवरात्रि के नौवें दिन सुबह जल्दी उठकर स्नानादि कर लें। इसके बाद स्वच्छ वस्त्र पहनकर पूजा के लिए बैठें। हवन कुंड का निर्माण ईंट से या  फिर स्टील के बर्तन में करें। इसके बाद आम की सूखी टहनियां, कपूर, घी आदि के माध्यम से अग्नि को प्रज्वलित करें। अब बारी-बारी से सभी देवी देवताओं के नाम से आहुति दें। ध्यान रखें कि हवन कुंड में 108 बार आहुति देना ही शुभ माना जाता है। नवरात्रि के समापन पर किया जाता है हवन, जानिए हवन सामग्री और इसकी पूरी विधि विस्तार से यहां

हवन के बाद एक गोला लें उसे चाकू से काटकर उसके ऊपर के भाग में सिन्दूर लगाकर घी भरकर चढ़ा दें इसे वोलि कहते हैं और गोले पर कलावा भी बांध लें। फिर पूर्ण आहूति देने के लिए नारियल में छेद करें और उसमें घी भरकर, धागा बांधकर पान, सुपारी, लौंग, जायफल, बताशे और अन्य प्रसाद रखकर पूर्ण आहुति दें। इस उपरान्त मंत्र बोले- ‘ॐ पूर्णमद: पूर्णमिदम् पुर्णात पूण्य मुदच्यते, पुणस्य पूर्णमादाय पूर्णमेल विसिस्यते स्वाहा।’ इसके बाद कुछ दक्षिणा माता के पास रख दें। फिर माता की आरती उतारें। अंत में भोग लगाकर प्रसाद सभी को बांट दें।

अंत में हवन का भभूत सभी लोग लगा लें। हवन के बाद कन्या भोजन करें। विस्तार से दुर्गा पूजन हवन विधि देवी भागवत पुराण में भी बताई गई है। अगर आप विस्तार से हवन करना चाहते हैं तो कवच, कीलक, अर्गला का पाठ करते हुए दुर्गा सप्तशती के 13 अध्याय के सभी मंत्रों को बोलकर स्वाहा कहते हुए हवन कुंड में आहुति दें। नवरात्रि कन्या पूजन में किन बातों का रखना चाहिए ध्यान, क्या है विधि जानिए

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