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Navratri Kalash Sthapana 2018: जानिए क्या है इस नवरात्र में कलश स्थापना का शुभ मुहुर्त?

Navratri Kalash Sthapana Date 2018, Puja Vidhi, Shubh Muhurat: ज्योतिष शास्त्र में अमावस्‍यायुक्‍त शुक्‍ल प्रति‍पदा मुहूर्त में कलश स्‍थापित करना वर्जित है। इसलिए 9 अक्टूबर को भूलकर भी कलश स्थापना का कार्य ना करें।

Author नई दिल्ली | October 10, 2018 6:26 PM
Navratri Kalash Sthapana 2018: हिंदू कैलेंडर के मुताबिक कलश स्थापना मुहूर्त प्रतिपदा तिथि को किया जाता है।

Navratri Kalash Sthapana Date 2018, Puja Vidhi, Shubh Muhurat: शारदीय नवरात्र की शुरुआत बुधवार, 10 अक्टूबर से हो रही है। आश्विन महीने के शुक्ल पक्ष की प्रथमा तिथि से शुरू होने वाले इस त्योहार में मां दुर्गा की 9 दिनों तक पूजा की जाती है। हर दिन मां के अलग-अलग रूपों की पूजा का विधान है। नवरात्र साल में चार बार आता है। इसमें दो गुप्त नवरात्र होते हैं। सिर्फ चैत्र नवरात्र और शारदीय नवरात्र ही लोकप्रिय हैं। चैत्र नवरात्र में भी नौ दिन मां दुर्गा की पूजा की जाती है और व्रत रखा जाता है। यह हिंदू कैलेंडर के पहले महीने में आता है। चैत्र शुक्ल प्रतिपदा को नवरात्र के दिन ही हिंदू अपना नववर्ष भी मनाते हैं। शारदीय नवरात्र के बाद दशहरा का महापर्व आता है। इसलिए इसे महानवरात्र भी कहा जाता है। ऐसा माना जाता है कि शारदीय नवरात्र भगवान राम ने समुंदर किनारे शक्ति की पूजा करके शुरू की थी। लंका पर चढ़ाई करने से पहले उन्होंने देवी दुर्गा की स्तुति की थी।

जिसके बाद उन्होंने रावण का वध करके लंका पर विजय प्राप्त किया था। तभी से नवरात्र पर्व मनाने की परंपरा है। देश भर में नवरात्र बड़े हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है। कई जगहों पर लोग दुर्गा प्रतिमाओं की स्थापना करते हैं। नवरात्र के ठीक बाद दशहरा पर्व मनाया जाता है। मान्यता है कि इसी दिन भगवान राम ने रावण का वध किया था। इसे असत्य पर सत्य की जीत के पर्व के रूप में मनाया जाता है। नवरात्र के 9 दिनों के व्रत का पारण भी इसी दिन किया जाता है। नवरात्र के दौरान स्थापित दुर्गा प्रतिमाओं का  विसर्जन भी दशहरा के दिन ही किया जाता है।

शारदीय नवरात्र में कलश स्थापना का विशेष महत्व बताया गया है। नवरात्र के पहले दिन ही कलश स्थापना का विधान है। यानी कि इस साल 10 अक्टूबर, दिन बुधवार को कलश स्थापना की जाएगी। हिंदू कैलेंडर के मुताबिक कलश स्थापना मुहूर्त प्रतिपदा तिथि को किया जाता है। यह चित्रा नक्षत्र और वैधृति योग में संपन्न होता है। मालूम हो कि कलश स्थापना के लिए एक खास विधि बताई गई है। इसके साथ ही कलश स्थापना करते समय शुभ मुहूर्त का भी ख्याल रखा जाता है। शुभ मुहूर्त में कलश स्थापना को अनिवार्य माना गया है।

कलश स्थापना तिथि व शुभ मुहूर्त: इस साल(2018) 10 अक्टूबर, दिन बुधवार को नवरात्र का पहला दिन है। कलश स्थापना का कार्य इसी दिन किया जाएगा। इसका शुभ मुहूर्त सुबह 11:36 बजे से लेकर दोपहर 12:24 बजे तक है। हालांकि दोपहर 12 बजे के बाद राहू काल लग रहा है। इसलिए 12 बजे तक ही कलश स्थापना करने का अभिजित मुहूर्त माना जा रहा है। ज्योतिषियों का कहना कि दोपहर 12 बजे तक कलश स्थापना का कार्य पूरा हो जाना चाहिए। ज्योतिष शास्त्र में अमावस्‍यायुक्‍त शुक्‍ल प्रति‍पदा मुहूर्त में कलश स्‍थापित करना वर्जित है। इसलिए 9 अक्टूबर को भूलकर भी कलश स्थापना का कार्य ना करें।

वास्तु शास्त्र के मुताबिक घर के ईशान कोण(उत्तर-पूर्व) में देवी-देवताओं का वास होता है। इसलिए नवरात्र में इसी दिशा में मां दुर्गा की प्रतिमा स्थापित करें। दुर्गा जी को जलाए गए दीपक की दिशा आग्नेय कोण(पूर्व-दक्षिण) होनी चाहिए। साथ ही पूजा करते समय आपका मुंह पूर्व या उत्तर दिशा में होनी चाहिए। पूजा स्थल के सामने थोड़ी खुली जगह हो तो बेहतर है। इससे अन्य लोगों को भी मां की आराधना करने के लिए जगह मिल जाती है। ध्यान रहे कि कलश स्थापना वाली जगह पर शौचालय नहीं होना चाहिए। वह जगह बहुत ही साफ-सुथरी होनी चाहिए।

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