Navratri 2021 Puja Vidhi, Timings, Samagri List: इतने बजे से शुरू हो रहा है घटस्थापना मुहूर्त, यहां जानिये शुभ समय और पूजा विधि

Navratri 2021 Puja Vidhi, Timings, Maa Durga Puja, Samagri List: नवरात्रि की पहले दिन कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त सुबह 6 बजकर 15 मिनट से 7 बजकर 07 मिनट तक रहेगा।

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Navratri 2021 Puja Vidhi: शारदीय नवरात्रि की पूजा विधि

Navratri 2021 Puja Vidhi, Samagri, Mantra, Procedure: आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की पहली तिथि से शारदीय नवरात्रि की शुरुआत होती है, जिसमें पूरे 9 दिनों तक मां दुर्गा के दिव्य रूपों की उपासना की जाती है। हालांकि इस साल नवरात्र महज 8 दिन तक ही रहेंगे, जो 7 अक्टूबर से शुरू होकर 14 अक्टूबर को समाप्त हो जाएंगे। शरद ऋतु में पड़ने वाली नवरात्रि को मुख्य नवरात्र माना जाता है। इस दौरान देशभर में धूम रहती है, खासतौर पर बंगाल और गुजरात जैसे राज्यों में इस त्योहार की सबसे अधिक रौनक देखने को मिलती है। जहां बंगला में दुर्गा पूजा के लिए खूबसूरत और आकर्षक पंडाल लगाए जाते हैं। वहीं गुजरात में जगह-जगह पर गरबा का आयोजन किया जाता है।

कलश स्थापना का समय: नवरात्रि के इस त्योहार में कुछ लोग अपने घरों माता की चौकी लगाकर अखंड ज्योत जलाते हैं। नवरात्रि के पहले दिन प्रात:काल देवी दुर्गा की मूर्ति और कलश की स्थापना की जाती हैं। मुहूर्त के अनुसार कलश की स्थापना करने से शुभ फलों की प्राप्ति होती है। ज्योतिषाचार्यों की मानें तो इसक बार 7 अक्टूबर को सुबह 6 बजकर 15 मिनट से शुभ मुहूर्त शुरू होगा, जो 7 बजकर 07 मिनट तक रहेगा।

मां के पहले स्वरूप शैलपुत्री की पूजा विधि: नवरात्रि के दिन सुबह उठकर नित्य कर्म से निवृत्त होकर साफ कपड़े पहन लें। फिर पूरे घर में गंगा जल का छिड़काव करें। कलश स्थापना करके मां दुर्गा की पूजा शुरू करें और व्रत रखने का संकल्प लें। इसके बाद देवी दुर्गा के पहले स्वरूप मां शैलपुत्री की पूजा करें। माता शैलपुत्री को लाल फूल, सिंदुर, अक्षत और धूप आदि चढ़ाएं। इसके बाद शैलपुत्री देवी के मंत्रों का उच्चारण करें।

फिर दुर्गा चालीसा का पाठ करें और अंतर में घी के दीपक से आरती करें। मां शैलपुत्री को सफेद रंग काफी प्रिय है, आप चाहें तो उन्हें सफेद रंग की बर्फी का भी भोग लगा सकते हैं।

क्यों मनाया जाता है नवरात्रि का त्योहार: हिंदू धर्म में नवरात्रि के त्योहार से जुड़ी दो प्रमुख कथाएं प्रचलित हैं। पहली कथा के अनुसार महिषासुर नामक राक्षस ने भगवान ब्रह्मा से वरदान मांगा था कि देव, दानव या फिर धरती पर रहने वाला कोई भी मनुष्य उसका वध ना कर सके। ब्रह्मा जी का आशीर्वाद पाने के बाद राक्षस ने तीनों लोगों में उत्पात मचाना शुरू कर दिया। जिसके बाद महिषासुर के आतंक से त्रस्त आकर देवताओं ने देवी दुर्गा का आवाहन किया। 9 दिनों तक मां दुर्गा और महिषासुर के बीच भीषण युद्ध चला था। दसवें दिन मां दुर्गा ने भयानक राक्षस महिषासुर का वध कर दिया।

दूसरी कथा के अनुसार भगवान राम ने लंका पर चढ़ाई करने से पहले मां दुर्गा की आराधना की थी। भगवान राम की भक्ति से प्रसन्न होकर देवी दुर्गा ने उन्हें जीत का आशीर्वाद दिया, जिसके बाद राम जी ने दसवें दिन रावण को हराकर लंका पर विजय प्राप्त की थी। इसलिए नवरात्रि की दसवें दिन ‘विजयदशमी’ यानी दशहरा का त्योहार मनाया जाता है।

Live Updates
3:06 (IST) 7 Oct 2021
कलश स्थापना के वक्त पढ़ें ये मंत्र

ओम वरुणास्योत्तम्भनमसि वरुणस्य स्काभसर्जनी स्थो वरुणस्य ऋतसदन्यसि वरुणस्य ऋतसदनमसि वरुणस्य ऋतसदनमा सीद।।

2:23 (IST) 7 Oct 2021
नवरात्रि व्रत करने के लाभ

शास्त्रों में नवरात्रि व्रत की महिमा वर्णित है। मान्यता है कि नवरात्रि व्रत करने वाले को मां दुर्गा की कृपा से सुख-शांति और समृद्धि की प्राप्ति होती है। माता रानी अपने भक्त पर विशेष कृपा बनाए रखती हैं।

2:12 (IST) 7 Oct 2021
मां ब्रह्मचारिणी को प्रसन्न करने का मंत्र

ऊँ ब्रां ब्रीं ब्रूं ब्रह्मचारिण्यै नमः…

2:02 (IST) 7 Oct 2021
नवरात्रि के दूसरे दिन इस विधी से करें पूजा

शुक्रवार को प्रात: उठकर नित्यकर्मों से निवृत्त होकर स्नान करें। स्वच्छ वस्त्र धारण कर पूजा स्थल पर विराजें। मां दुर्गा के इस स्वरूप मां ब्रह्माचिरणी की पूजा करें। उन्हें अक्षत, फूल, रोली, चंदन आदि अर्पित करें। मां को दूध, दही, घृत, मधु और शक्कर से स्नान कराएं। मां ब्रह्मचारिणी को पान, सुपारी, लौंग भी चढ़ाएं. इसके बाद मंत्रों का उच्चारण करें।

12:38 (IST) 7 Oct 2021
उपवास में भूलकर भी न करें ये गल्तियां

– व्रत के दौरान भी अपने शरीर में पानी की कमी न होने दें। इसके लिए नारियल पानी, दूध और ताजे फलों के जूस का सेवन करें।

– उपवास के दौरान धिक मात्रा में भोजन न खाएं, ये उपवास के उद्देश्य को खत्म करने के साथ-साथ पाचन तंत्र पर भी असर करेगा।

– उपवास के दौरान बाजार की चीनी युक्त चीजों का सेवन न करें।

-उपवास में अकसर बाजार में व्रत के हिसाब से चीजें मिलती हैं, लेकिन ये चीजें स्वास्थ्य के लिए हानिकारक भी होती है। इनकी जगह घर पर बनी चीजों का ही सेवन करें।

12:01 (IST) 7 Oct 2021
नवरात्रों में भूलकर भी न खाएं ये चीजें, मां दुर्गा हो जाएंगी रुष्ट

नवरात्रों में अनाज जैसे चावल, सूजी, बेसन, मक्के का आटा, रागी, बाजरे का आटा, सफेद नमक, सब्जियां जैसे लहसुन और प्याज, मसाले जैसे हल्दी, धनिया, जीरे, फल जैसे नाशपाती व मांसाहारी चीजों का सेवन करना वर्जित होता है।

11:28 (IST) 7 Oct 2021
नवरात्रि में चमकेगा इन राशियों का भाग्य

नवरात्रों के खास मौके पर मकर राशि, कुंभ राशि और मीन राशि का भाग्य चमकने वाला है। इन्हें नवरात्रों में कारोबार में परिवर्तन, पिता से धन प्राप्ति, कारोबार में विस्तार और नौकरी के अवसरों में सहयोग मिलेगा।

10:55 (IST) 7 Oct 2021
नवरात्रों में देवी मां को हर दिन क्यों लगता है अलग-अलग भोग

नवरात्रों में पूजा के दौरान देवी मां को हर दिन अलग-अलग चीजों का भोग लगाया जाता है। इससे मां जल्द प्रसन्न होकर भक्तों की सारी मनोकामनाएं पूरी करती हैं। बीमारियों से मुक्ति दिलाती हैं और आर्थिक समस्याओं को दूर करती हैं।

10:32 (IST) 7 Oct 2021
कलश स्थापना में रखें इन बातों का ध्यान-

1. कलश का मुंह खुला न रखें, अगर कलश को किसी ढक्कन से ढका है तो उसे चावलों से भर दें और उसके बीचों-बीच एक नारियल भी रखें।

2. गलत दिशा में कलश की स्थापना न करें। ईशान कोण (उत्तर-पूर्व) देवताओं की दिशा मानी जाती है, इसी दिशा में माता की प्रतिमा तथा घट स्थापना करें।

9:36 (IST) 7 Oct 2021
नवरात्रि में इन मंत्रों का करें उच्चारण…

-ॐ जयन्ती मंगला काली भद्रकाली कपालिनी।

दुर्गा क्षमा शिवा धात्री स्वाहा स्वधा नमोऽस्तुते।।

-या देवी सर्वभूतेषु तुष्टिरूपेण संस्थिता,

नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।।

-सर्वमंगल मांगल्ये शिवे सर्वार्थ साधिके।

शरण्ये त्र्यंबके गौरी नारायणि नमोऽस्तुते।।

9:04 (IST) 7 Oct 2021
मां ब्रह्मचारिणी की पूजा का महत्व…

मां ब्रह्मचारिणी का स्मरण करने से तप, त्याग, सदाचार, वैराग्य और संयम में वृद्धि होती है। प्राचीन मान्यताओं के मुताबिक जो साधक विधि-विधान से देवी के इस स्वरुप की अर्चना करता है उसकी कुंडलिनी शक्ति जाग्रत हो जाती है।

8:34 (IST) 7 Oct 2021
मां दुर्गा का तीसरा स्वरूप है ‘चंद्रघंटा’

नवरात्रि के तीसरे दिन मां चंद्रघंटा की आराधना की जाती है। मान्यता है कि इस दिन माता को दूध और दूध से बनी चीजों के भोग लगाने से माता प्रसन्न होतीं हैं।

8:02 (IST) 7 Oct 2021
लुधियाना के ‘श्री गीता मंदिर’ में 108 दीप हुए प्रज्जवलित

7:20 (IST) 7 Oct 2021
मां के पहले स्वरूप शैलपुत्री की पूजा विधि:

नवरात्रि के दिन सुबह उठकर नित्य कर्म से निवृत्त होकर साफ कपड़े पहन लें। फिर पूरे घर में गंगा जल का छिड़काव करें। कलश स्थापना करके मां दुर्गा की पूजा शुरू करें और व्रत रखने का संकल्प लें। इसके बाद देवी दुर्गा के पहले स्वरूप मां शैलपुत्री की पूजा करें। माता शैलपुत्री को लाल फूल, सिंदुर, अक्षत और धूप आदि चढ़ाएं। इसके बाद शैलपुत्री देवी के मंत्रों का उच्चारण करें। फिर दुर्गा चालीसा का पाठ करें और अंतर में घी के दीपक से आरती करें। मां शैलपुत्री को सफेद रंग काफी प्रिय है, आप चाहें तो उन्हें सफेद रंग की बर्फी का भी भोग लगा सकते हैं।

6:45 (IST) 7 Oct 2021
मां दुर्गा के नौ रूप

पहले दिन मां शैलपुत्री, दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी, तीसरे दिन मां चंद्रघंटा, चौथे दिन मां कुष्मांडा, पांचवे दिन स्कंदमाता, छठे दिन मां कात्यायनी, सातवें दिन मां कालरात्रि, आठवें दिन मां महागौरी और नौवें दिन मां सिद्धिदात्री की पूजा की जाती है। 

6:19 (IST) 7 Oct 2021
नवरात्रि में क्यों करते हैं कलश स्थापना…

कलश स्थापना से संबन्धित हमारे पुराणों में मान्यता है जिसके अनुसार कलश को भगवान विष्णु का रुप माना गया है। इसलिए लोग देवी की पूजा से पहले कलश का पूजन करते हैं। पूजा स्थान पर कलश की स्थापना करने से पहले उस जगह को गंगा जल से शुद्ध किया जाता है और फिर पूजा में सभी देवी -देवताओं को आमंत्रित किया जाता है।

5:44 (IST) 7 Oct 2021
नवरात्रि के दूसरे दिन की जाती है मां ब्रह्मचारिणी की पूजा…

मां ब्रह्मचारिणी की पूजा नवरात्रि के दूसरे दिन की जाती है। माता को शक्कर प्रिय है अतः उन्हें शक्कर से बना प्रसाद भोग में अर्पित करें। शक्कर के साथ पंचामृत का भी भोग लगाएं। इससे माता सभी जीवों को दीर्घायु होने का आशीर्वाद देतीं हैं।

4:59 (IST) 7 Oct 2021
इन सामग्री से करें मां दुर्गा की पूजा…

श्रीदुर्गा की प्रतिमा पर सिंदूर, दर्पण, कंघी, केसर, कपूर, धूप, वस्त्र, बंदनवार आम के पत्तों का, पुष्प, सुपारी साबुत, दूर्वा, मेंहदी, बिंदी, हल्दी की गांठ, पिसी हुई हल्दी, पटरा, आसन, पुष्पहार, बेलपत्र, चौकी, रोली, मौली, कमलगट्टा, दीपक, दीपबत्ती, जायफल और जावित्री चढ़ाएं।

4:29 (IST) 7 Oct 2021
नवरात्रि में करें ये उपाय…

जीवन में धन की कमी हैं तो इस नवरात्र के दिनों में ‘ॐ श्रीं श्रियै नम:’ मंत्र की 101 माला रोज जप करते हुए माता लक्ष्मीजी का पूजन करें। इस मंत्र को जप करने के लिए कमल गट्टे की माला का ही प्रयोग करें। ऐसा करने से घर की दारिद्रय दूर हो जाती है।

4:02 (IST) 7 Oct 2021
नवरात्रि को लेकर दूसरी कथा…

भगवान राम ने लंका पर चढ़ाई करने से पहले मां दुर्गा की आराधना की थी। भगवान राम की भक्ति से प्रसन्न होकर देवी दुर्गा ने उन्हें जीत का आशीर्वाद दिया, जिसके बाद राम जी ने दसवें दिन रावण को हराकर लंका पर विजय प्राप्त की थी। इसलिए नवरात्रि की दसवें दिन ‘विजयदशमी’ यानी दशहरा का त्योहार मनाया जाता है।

3:23 (IST) 7 Oct 2021
अम्बे तू है जगदम्बे काली आरती…

अम्बे तू है जगदम्बे काली,

जय दुर्गे खप्पर वाली,

तेर ही गुण गायें भारती,

ओ मैया हम सब उतारे तेरी आरती ।

तेर भक्त जानो पर मैया भीड़ पड़ी है भारी,

दानव दल पर टूट पड़ो माँ कर के सिंह सवारी ।

सो सो सिंघो से है बलशाली,

है दस भुजाओं वाली,

दुखिओं के दुखड़े निवारती ।

माँ बेटे की है इस जग में बड़ा ही निर्मल नाता,

पूत कपूत सुने है पर ना माता सुनी कुमाता ।

सबपे करुना बरसाने वाली,

अमृत बरसाने वाली,

दुखिओं के दुखड़े निवारती ।

नहीं मांगते धन और दौलत ना चांदी ना सोना,

हम तो मांगे माँ तेरे मन में एक छोटा सा कोना ।

सब की बिगड़ी बनाने वाली,

लाज बचाने वाली,सतिओं के सत को सवारती ।

ओ मैया हम सब उतारे तेरी आरती ।

2:41 (IST) 7 Oct 2021
मां दुर्गा को प्रसन्न करने के लिए इन मंत्रों का भी जरूर करें जाप…

* सर्वमंगल मांगल्ये शिवे सर्वार्थ साधिके।
शरण्ये त्र्यंबके गौरी नारायणि नमोऽस्तुते।।

* ॐ जयन्ती मंगला काली भद्रकाली कपालिनी।
दुर्गा क्षमा शिवा धात्री स्वाहा स्वधा नमोऽस्तुते।।

* या देवी सर्वभूतेषु शक्तिरूपेण संस्थिता,
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।।

* या देवी सर्वभूतेषु लक्ष्मीरूपेण संस्थिता,
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।।

* या देवी सर्वभूतेषु तुष्टिरूपेण संस्थिता,
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।।

* या देवी सर्वभूतेषु मातृरूपेण संस्थिता,
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।।

* या देवी सर्वभूतेषु दयारूपेण संस्थिता,
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।।

* या देवी सर्वभूतेषु बुद्धिरूपेण संस्थिता,
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।।

* या देवी सर्वभूतेषु शांतिरूपेण संस्थिता,
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।।

2:24 (IST) 7 Oct 2021
आज का अशुभ समय:

राहुकाल- 1:37 PM से 3:04 PM
आडल योग- 6:17 AM से 9:13 PM
गुलिक काल- 9:13 AM से 10:41 AM
वर्ज्य- 6:37 AM से 8:05 PM
यमगण्ड- 6:17 AM से 7:45 AM
विडाल योग- 8 अक्टूबर 9:13 PM से 6:18 AM
दुर्मुहूर्त- 10:12 AM से 10:58 AM से 2:53 PM से 3:40 PM

2:12 (IST) 7 Oct 2021
दुर्गा सप्तशती का पाठ करते वक्त बरतें ये सावधानियां…

दुर्गा सप्तशती का पाठ न ज्यादा तेज स्वर में करें न ज्यादा धीमी आवाज में करें। दुर्गा सप्तशती का पाठ करते समय उच्चारण स्पष्ट होना चाहिए। अगर आप एक दिन में पाठ पूरा नहीं कर सकते हैं, तो कम से कम जो अध्याय आरंभ किया है उसे पूरा करना चाहिए।

1:56 (IST) 7 Oct 2021
नवरात्रि में करें इन मंत्रों का उच्चारण

ॐ जयन्ती मंगला काली भद्रकाली कपालिनी।

दुर्गा क्षमा शिवा धात्री स्वाहा स्वधा नमोऽस्तुते।।

या देवी सर्वभूतेषु तुष्टिरूपेण संस्थिता,

नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।।

सर्वमंगल मांगल्ये शिवे सर्वार्थ साधिके।

शरण्ये त्र्यंबके गौरी नारायणि नमोऽस्तुते।।

1:41 (IST) 7 Oct 2021
नवरात्रि में सुख-संपत्ति पाने के लिए करें ये उपाय…

जीवन में धन की कमी हैं तो इस नवरात्र के दिनों में ‘ॐ श्रीं श्रियै नम:’ मंत्र की 101 माला रोज जप करते हुए माता लक्ष्मीजी का पूजन करें। इस मंत्र को जप करने के लिए कमल गट्टे की माला का ही प्रयोग करें। ऐसा करने से घर की दारिद्रय दूर हो जाती है।

1:28 (IST) 7 Oct 2021
आज का अशुभ समय:

राहुकाल- 1:37 PM से 3:04 PM
आडल योग- 6:17 AM से 9:13 PM
गुलिक काल- 9:13 AM से 10:41 AM
वर्ज्य- 6:37 AM से 8:05 PM
यमगण्ड- 6:17 AM से 7:45 AM
विडाल योग- 8 अक्टूबर 9:13 PM से 6:18 AM
दुर्मुहूर्त- 10:12 AM से 10:58 AM से 2:53 PM से 3:40 PM

1:16 (IST) 7 Oct 2021
जय अम्बे गौरी आरती…

जय अम्बे गौरी मैया जय मंगल मूर्ति ।तुमको निशिदिन ध्यावत हरि ब्रह्मा शिव री ॥टेक॥

मांग सिंदूर बिराजत टीको मृगमद को ।उज्ज्वल से दोउ नैना चंद्रबदन नीको ॥जय॥

कनक समान कलेवर रक्ताम्बर राजै।रक्तपुष्प गल माला कंठन पर साजै ॥जय॥

केहरि वाहन राजत खड्ग खप्परधारी ।सुर-नर मुनिजन सेवत तिनके दुःखहारी ॥जय॥

कानन कुण्डल शोभित नासाग्रे मोती ।कोटिक चंद्र दिवाकर राजत समज्योति ॥जय॥शुम्भ निशुम्भ बिडारे महिषासुर घाती ।धूम्र विलोचन नैना निशिदिन मदमाती ॥जय॥

चौंसठ योगिनि मंगल गावैं नृत्य करत भैरू।बाजत ताल मृदंगा अरू बाजत डमरू ॥जय॥

भुजा चार अति शोभित खड्ग खप्परधारी।मनवांछित फल पावत सेवत नर नारी ॥जय॥

कंचन थाल विराजत अगर कपूर बाती ।श्री मालकेतु में राजत कोटि रतन ज्योति ॥जय॥श्री अम्बेजी की आरती जो कोई नर गावै ।कहत शिवानंद स्वामी सुख-सम्पत्ति पावै ॥जय॥

1:03 (IST) 7 Oct 2021
नवरात्रि की पूजा विधि-

नवरात्रि के पहले दिन मां दुर्गा की पूजा करने से पहले कलश स्थापित किया जाता है। कलश को पांच तरह के पत्तों से सजाकर उसमें हल्दी की गांठ, सुपारी, दूर्वा रखी जाती है। कलश को स्थापित करने से पहले उसके नीचे बालू की वेदी बनाई जाती है जिसमें जौ बोये जाते हैं। मान्यता है कि जौ बोने से देवी अन्नपूर्णा प्रसन्न होती हैं। नवरात्रि पूजन के समय मां दुर्गा की प्रतिमा को पूजा स्थल के बीचों-बीच स्थापित किया जाता है और माँ की पूजा में श्रृंगार सामग्री, रोली, चावल, माला, फूल, लाल चुनरी आदि का प्रयोग किया जाता है। कई जगह पूरे नौ दिनों तक पूजा स्थल में एक अखंड दीप भी जलाया जाता है। कलश स्थापना करने के बाद गणेश जी और मां दुर्गा की आरती करते हैं।

12:52 (IST) 7 Oct 2021
घटस्थापना कैसे करते हैं…

घटस्थापना के लिए कलश, सात तरह के अनाज, पवित्र स्थान की मिट्टी, गंगाजल, कलावा, आम के पत्ते, नारियल, सुपारी, अक्षत, फूल, फूलमाला, लाल कपड़ा, मिठाई, सिंदूर, दूर्वा, कपूर, हल्दी, घी, दूध आदि वस्तुएं जरूरी हैं।