Shardiya Navratri 2021 Day 1 Maa Shailputri Puja Vidhi: नवरात्रि के पहले दिन इस तरह करें मां शैलपुत्री की पूजा, जानिये विधि, मंत्र, कथा और आरती

Shardiya Navratri 2021 Day 1, Maa Shailputri Puja Vidhi, Timings, Mantra, Muhurat, Aarti: ज्योतिष अनुसार मां शैलपुत्री की उपासना से चंद्रमा के द्वारा पड़ने वाले बुरे प्रभावों से मुक्ति मिल जाती हैं।

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Shardiya Navratri 2021 Day 1: ॐ देवी शैलपुत्र्यै नम:

नवरात्रि के पहले दिन मां दुर्गा के प्रथम स्वरूप शैलपुत्री की पूजा की जाती है। सफेद वस्त्र धारण किए मां शैलपुत्री के दाहिने हाथ में त्रिशूल और बाएं हाथ में कमल शोभायमान है। मां के माथे पर चंद्रमा सुशोभित है। यह नंदी बैल पर सवार संपूर्ण हिमालय पर विराजमान हैं। शैलपुत्री मां को वृषोरूढ़ा और उमा के नामों से भी जाना जाता है। मान्यता है की मां शैलपुत्री का जन्म पर्वत राज हिमालय के घर में हुआ था, जिसके कारण उनका नाम शैलपुत्री पड़ा। देवी के इस रूप को करुणा और स्नेह का प्रतीक माना गया है। घोर तपस्या करने वाली मां शैलपुत्री सभी जीव-जंतुओं की रक्षक मानी जाती हैं।

पूजा विधि: नवरात्रि के पहले दिन प्रात:काल उठकर स्नानादि से निवृत होकर स्वच्छ कपड़े पहनें। फिर एक चौकी पर देवी दुर्गा की प्रतिमा और कलश स्थापित करें। फिर मां शैलपुत्री का ध्यान कर व्रत का संकल्प करें। मां शैलपुत्री को सफेद रंग की वस्‍तुएं काफी प्रिय हैं, इसलिए चंदन-रोली से टीका कर मां की प्रतिमा पर सफेद वस्‍त्र और सफेद फूल चढ़ाने चाहिए। साथ ही सफेद रंग की मिठाई का भोग भी मां को बेहद ही पसंद आता है। बाद में शैलपुत्री माता की कथा करें और दुर्गा सप्शती का पाठ करें। इसके बाद दुर्गा चालीसा का पाठ करें। बाद में मां की आरती करें।

मां शैलपुत्री की कथा: पौराणिका कथाओं के अनुसार राजा दक्ष ने अपने निवास पर एक यज्ञ का आयोजन किया था, जिसमें उन्होंने सभी देवी-देवताओं को बुलाया। लेकिन अपने अपमान का बदला लेने के लिए उन्होंने शिव जी नहीं बुलाया। माता सती ने भगवान शिव से अपने पिता द्वारा आयोजित किए गए यज्ञ में जाने की इच्छा जताई। सती के आग्रह करने पर भगवान शिव ने भी उन्हें जाने की अनुमति दे दी। लेकिन जब सती यज्ञ में पहुंची तो वहां पर पिता दक्ष ने सबके सामने भगवान शिव के लिए अपमानजनक शब्द कहे। अपने पिता की बाते सुनकर मां सती बेहद निराश हुईं और उन्होंने यज्ञ की वेदी में कूदकर अपने प्राण त्याग दिए। जिसके बाद मां सती अलग जन्म में शैलराज हिमालय के घर में जन्मीं और वह शैलपुत्री कहलाईं।

मां शैलपुत्री के मंत्र:
-ॐ देवी शैलपुत्र्यै नमः॥
-वन्दे वाञ्छितलाभाय चन्द्रार्धकृतशेखराम्।
वृषारुढां शूलधरां शैलपुत्रीं यशस्विनीम्॥

मां अम्बे की आरती:
जय अम्बे गौरी मैया जय श्यामा मूर्ति ।
तुमको निशिदिन ध्यावत हरि ब्रह्मा शिव री ॥1॥

मांग सिंदूर बिराजत टीको मृगमद को ।
उज्ज्वल से दोउ नैना चंद्रबदन नीको ॥2॥

कनक समान कलेवर रक्ताम्बर राजै।
रक्तपुष्प गल माला कंठन पर साजै ॥3॥

केहरि वाहन राजत खड्ग खप्परधारी ।
सुर-नर मुनिजन सेवत तिनके दुःखहारी ॥4॥

कानन कुण्डल शोभित नासाग्रे मोती ।
कोटिक चंद्र दिवाकर राजत समज्योति ॥5॥

शुम्भ निशुम्भ बिडारे महिषासुर घाती ।
धूम्र विलोचन नैना निशिदिन मदमाती ॥6॥

चौंसठ योगिनि मंगल गावैं नृत्य करत भैरू।
बाजत ताल मृदंगा अरू बाजत डमरू ॥7॥

भुजा चार अति शोभित खड्ग खप्परधारी।
मनवांछित फल पावत सेवत नर नारी ॥8॥

कंचन थाल विराजत अगर कपूर बाती ।
श्री मालकेतु में राजत कोटि रतन ज्योति ॥9॥

श्री अम्बेजी की आरती जो कोई नर गावै ।
कहत शिवानंद स्वामी सुख-सम्पत्ति पावै ॥10॥

Live Updates
3:04 (IST) 7 Oct 2021
नवरात्रों में धन प्राप्ति के लिए करें इस मंत्र का जाप

प्रणतानां प्रसीद त्वं देवि विश्वार्तिहारिणि।

त्रैलोक्यवासिनामीड्ये लोकानां वरदा भव।

2:15 (IST) 7 Oct 2021
व्रत के दौरान करें ये काम, प्रसन्न होंगी देवी मां

– व्रत को करने वाले को पलंग के बजाए जमीन पर सोना चाहिए। अगर आप जमीन पर नहीं सो सकते हैं, तो लकड़ी के तख्त पर सो सकते हैं।

– नवरात्रि व्रत में अधिक भोजन नहीं करना चाहिए। फल के अलावा आप कुट्टू का प्रयोग कर सकते हैं।

– व्रत करने वाले को ब्रह्मचर्य का पालन करना चाहिए।

– व्रती को काम, क्रोध, लोभ और मोह से दूर रहना चाहिए।

1:58 (IST) 7 Oct 2021
मां ब्रह्मचारिणी की पूजा का महत्व

पौराणिक कथाओं में मां ब्रह्मचारिणी को महत्वपूर्ण देवी के रूप में माना गया है. मां ब्रह्मचारिणी नाम का अर्थ तपस्या और चारिणी यानि आचरण से है. मां ब्रह्मचारिणी को तप का आचरण करने वाली देवी माना गया है।

1:49 (IST) 7 Oct 2021
नवरात्रि पर घर में लगाएं ये पौधे, कभी नहीं होगी पैसों की दिक्कत

नवरात्रि के खास मौके पर घर में तुलसी का पौधा, हरसिंगार का पौधा और केले का पौधा जरूर लगाएं। मान्यता है कि इन पौधों से घर में पैसों की दिक्कतें कम होती हैं, साथ ही घर में भी खुशियों का वास होता है।

1:45 (IST) 7 Oct 2021
नवरात्रि के दूसरे दिन पहनें हरे रंग के कपड़े

द्वितीय नवरात्रि के दिन मां ब्रह्मचारिणी का पूजन किया जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार इन्हें हरा रंग बेहद प्रिय है। मां ब्रह्माचारिणी को हरे रंग की चुनरी चढ़ानी चाहिए साथ ही स्वयं हरे रंग के वस्त्र धारण करके मां का पूजन करना चाहिए।

9:40 (IST) 7 Oct 2021
नवरात्रि के दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी की पूजा की जाती है…

मां ब्रह्मचारिणी की पूजा नवरात्रि के दूसरे दिन की जाती है। माता को शक्कर प्रिय है अतः उन्हें शक्कर से बना प्रसाद भोग में अर्पित करें। शक्कर के साथ पंचामृत का भी भोग लगाएं। इससे माता सभी जीवों को दीर्घायु होने का आशीर्वाद देतीं हैं।

9:06 (IST) 7 Oct 2021
इन सामग्री से करें मां दुर्गा की पूजा…

श्रीदुर्गा की प्रतिमा पर सिंदूर, दर्पण, कंघी, केसर, कपूर, धूप, वस्त्र, बंदनवार आम के पत्तों का, पुष्प, सुपारी साबुत, दूर्वा, मेंहदी, बिंदी, हल्दी की गांठ, पिसी हुई हल्दी, पटरा, आसन, पुष्पहार, बेलपत्र, चौकी, रोली, मौली, कमलगट्टा, दीपक, दीपबत्ती, जायफल और जावित्री चढ़ाएं।

8:36 (IST) 7 Oct 2021
हैप्पी नवरात्रि 2021…

नवरात्रि के नौ दिन मां दुर्गा के नौ अलग-अलग रूपों की पूजा की जाती है।

8:15 (IST) 7 Oct 2021
क्यों मनाया जाता है नवरात्रि का त्योहार

हिंदू धर्म में नवरात्रि के त्योहार से जुड़ी दो प्रमुख कथाएं प्रचलित हैं। पहली कथा के अनुसार महिषासुर नामक राक्षस ने भगवान ब्रह्मा से वरदान मांगा था कि देव, दानव या फिर धरती पर रहने वाला कोई भी मनुष्य उसका वध ना कर सके। ब्रह्मा जी का आशीर्वाद पाने के बाद राक्षस ने तीनों लोगों में उत्पात मचाना शुरू कर दिया। जिसके बाद महिषासुर के आतंक से त्रस्त आकर देवताओं ने देवी दुर्गा का आवाहन किया। 9 दिनों तक मां दुर्गा और महिषासुर के बीच भीषण युद्ध चला था। दसवें दिन मां दुर्गा ने भयानक राक्षस महिषासुर का वध कर दिया।

7:22 (IST) 7 Oct 2021
मां शैलपुत्री के मंत्र:

-ॐ देवी शैलपुत्र्यै नमः॥
-वन्दे वाञ्छितलाभाय चन्द्रार्धकृतशेखराम्।
वृषारुढां शूलधरां शैलपुत्रीं यशस्विनीम्॥

6:48 (IST) 7 Oct 2021
इन सामग्री से करें मां दुर्गा की पूजा…

श्रीदुर्गा की प्रतिमा पर सिंदूर, दर्पण, कंघी, केसर, कपूर, धूप, वस्त्र, बंदनवार आम के पत्तों का, पुष्प, सुपारी साबुत, दूर्वा, मेंहदी, बिंदी, हल्दी की गांठ, पिसी हुई हल्दी, पटरा, आसन, पुष्पहार, बेलपत्र, चौकी, रोली, मौली, कमलगट्टा, दीपक, दीपबत्ती, जायफल और जावित्री चढ़ाएं।

6:23 (IST) 7 Oct 2021
Navratri Fast: नवरात्रि में व्रत कैसे रखते हैं?

नवरात्रि में व्रत रखने वालों को अन्न नहीं खाना होता है। ये व्रत फलाहार ग्रहण करके रखा जाता है। नवरात्र व्रत रखने वालों को रोज विधि विधान माता की पूजा करनी चाहिए।

5:49 (IST) 7 Oct 2021
मां दुर्गा की स्तुति…

या देवी सर्वभू‍तेषु माँ शैलपुत्री रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:॥

5:01 (IST) 7 Oct 2021
अम्बे तू है जगदम्बे काली आरती

अम्बे तू है जगदम्बे काली,

जय दुर्गे खप्पर वाली,

तेर ही गुण गायें भारती,

ओ मैया हम सब उतारे तेरी आरती ।

तेर भक्त जानो पर मैया भीड़ पड़ी है भारी,

दानव दल पर टूट पड़ो माँ कर के सिंह सवारी ।

सो सो सिंघो से है बलशाली,

है दस भुजाओं वाली,

दुखिओं के दुखड़े निवारती ।

माँ बेटे की है इस जग में बड़ा ही निर्मल नाता,

पूत कपूत सुने है पर ना माता सुनी कुमाता ।

सबपे करुना बरसाने वाली,

अमृत बरसाने वाली,

दुखिओं के दुखड़े निवारती ।

नहीं मांगते धन और दौलत ना चांदी ना सोना,

हम तो मांगे माँ तेरे मन में एक छोटा सा कोना ।

सब की बिगड़ी बनाने वाली,

लाज बचाने वाली,सतिओं के सत को सवारती ।

ओ मैया हम सब उतारे तेरी आरती ।

4:28 (IST) 7 Oct 2021
शैलपुत्री स्रोत…

वन्दे वंछितलाभाय चन्द्रार्धकृतशेखराम्।
वृषारूढाम् शूलधरां शैलपुत्रीं यशस्विनीम्॥

4:05 (IST) 7 Oct 2021
मां दुर्गा के नौ रूप…

पहले दिन मां शैलपुत्री, दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी, तीसरे दिन मां चंद्रघंटा, चौथे दिन मां कुष्मांडा, पांचवे दिन स्कंदमाता, छठे दिन मां कात्यायनी, सातवें दिन मां कालरात्रि, आठवें दिन मां महागौरी और नौवें दिन मां सिद्धिदात्री की पूजा की जाती है। 

3:37 (IST) 7 Oct 2021
मां दुर्गा को चढ़ाएं लाल चुनरी…

मां दुर्गा को चढ़ाने के लिए वस्त्र और लाल चुनरी जरूर खरीदें। दुर्गा मां के वस्त्र लाल रंग के ही खरीदने चाहिए। इसके साथ ही श्रृगांर का सामान लाल रंग की चूड़िया और बिंदी भी दुर्गा मां को चढ़ाई जाती है।

3:15 (IST) 7 Oct 2021
मां शैलपुत्री के मंत्र…

-ॐ देवी शैलपुत्र्यै नमः॥
-वन्दे वाञ्छितलाभाय चन्द्रार्धकृतशेखराम्।
वृषारुढां शूलधरां शैलपुत्रीं यशस्विनीम्॥

2:47 (IST) 7 Oct 2021
नवरात्रि में मां दुर्गा की कैसे करते हैं पूजा…

मां का श्रृंगार रोली ,चावल, सिंदूर, माला, फूल, चुनरी, साड़ी, आभूषण और सुहाग से करते हैं। पूजा स्थल में एक अखंड दीप जलाया जाता है जिसे व्रत के आखिरी दिन तक जलाया जाना चाहिए। कलश स्थापना करने के बाद, गणेश जी और मां दुर्गा की आरती करते है जिसके बाद नौ दिनों का व्रत शुरू हो जाता है।

2:29 (IST) 7 Oct 2021
अम्बे तू है जगदम्बे काली आरती…

अम्बे तू है जगदम्बे काली, जय दुर्गे खप्पर वाली,
तेरे ही गुण गावें भारती, ओ मैया हम सब उतारे तेरी आरती।
तेरे भक्त जनो पर माता भीर पड़ी है भारी।
दानव दल पर टूट पड़ो मां करके सिंह सवारी॥
सौ-सौ सिहों से बलशाली, है अष्ट भुजाओं वाली,
दुष्टों को तू ही ललकारती।
ओ मैया हम सब उतारे तेरी आरती॥

माँ-बेटे का है इस जग में बड़ा ही निर्मल नाता।
पूत-कपूत सुने है पर ना माता सुनी कुमाता॥
सब पे करूणा दर्शाने वाली, अमृत बरसाने वाली,
दुखियों के दुखड़े निवारती।
ओ मैया हम सब उतारे तेरी आरती॥

नहीं मांगते धन और दौलत, न चांदी न सोना।
हम तो मांगें तेरे चरणों में छोटा सा कोना॥
सबकी बिगड़ी बनाने वाली, लाज बचाने वाली,
सतियों के सत को संवारती।
ओ मैया हम सब उतारे तेरी आरती॥

चरण शरण में खड़े तुम्हारी, ले पूजा की थाली।
वरद हस्त सर पर रख दो माँ संकट हरने वाली॥
माँ भर दो भक्ति रस प्याली, अष्ट भुजाओं वाली,
भक्तों के कारज तू ही सारती।
ओ मैया हम सब उतारे तेरी आरती॥

2:15 (IST) 7 Oct 2021
मां शैलपुत्री की आराधना के मंत्र…

ॐ देवी शैलपुत्र्यै नमः॥-वन्दे वाञ्छितलाभाय चन्द्रार्धकृतशेखराम्।वृषारुढां शूलधरां शैलपुत्रीं यशस्विनीम्॥

1:58 (IST) 7 Oct 2021
रोग से मुक्ति पाने के लिए इस मंत्र का करें जाप…

रोग से मुक्ति पाने हेतु ‘ॐ परात्मन परब्रह्म मम् शरीरं, पाहि-पाहि कुरु-कुरु स्वाहा’ मंत्र का 108 बार जप करने से मां सदैव आपकी रक्षा करती हैं। 

1:44 (IST) 7 Oct 2021
आज का शुभ समय:

ब्रह्म मुहूर्त- 4:39 AM से 5:28 AM
अभिजीत मुहूर्त- 11:45 AM से 12: 32 PM
गोधूलि मुहूर्त- 5:58 PM से 6:12 PM
अमृत काल- 3:23 PM से 4:50 AM
प्रात: संध्या- 5:04 AM से 6:17 AM
विजय मुहूर्त- 2:06 PM से 2:53 PM
सायाह्ग संध्या- 6:00 PM से 7:14 PM
निशिता मुहूर्त- 11:44 PM से 12:34 AM

1:33 (IST) 7 Oct 2021
मां की कृपा पाने के लिए इस मंत्र का करें जप…

नवार्ण मंत्र ‘ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चै’ का जाप अवश्‍य करें। इन दिनों में दुर्गा सप्तशती का पाठ अवश्‍य करें। 

1:19 (IST) 7 Oct 2021
मां शैलपुत्री की कथा…

पौराणिक कथा के अनुसार, दक्ष प्रजापति ने अपने यहां महायज्ञ में अपने जमाता भगवान शिव और पुत्री सती को छोड़कर सभी देवी-देवताओं को आमंत्रित किया। बिना निमंत्रण के ही सती अपने पिता के आयोजन में चली गईं और भगवान शिव को निमंत्रण न देने का कारण जानना चाहा। वहां पति शिव के अपमान से दुखी होकर वह स्वयं को यज्ञ वेदी में भस्म कर देती हैं। अगले जन्म में वह पर्वतराज हिमालय के घर जन्म लेती हैं।

1:03 (IST) 7 Oct 2021
मां दुर्गा का प्रथम स्वरूप ‘शैलपुत्री’

मां के नौ रूपों में प्रथम रूप शैलपुत्री या पार्वती का है। ‘शैल’ शब्द ‘शिला’ से बना है और शिला का अर्थ प्रस्तर या पर्वत लिया जा सकता है। इस तरह ‘शैल-पुत्री’ अर्थात् ‘शिला की है जो पुत्री’ उसी को पार्वती (पर्वत की पुत्री) भी कहा जाता है। पौराणिक संदर्भों के अनुसार भी पार्वती गिरिराज हिमालय की पुत्री हैं, जो उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर उनकी पुत्री के रूप में प्रकट हुई थीं। अस्तु, जो शिवत्व के लिए तप करे, वही पार्वती। जो, परिवर्तन करा दे, वह पार्वती।

12:53 (IST) 7 Oct 2021
मां शैलपुत्री के मंत्र…

1. ऊँ शं शैलपुत्री देव्यै: नम:

2. वन्दे वाञ्छितलाभाय चन्द्रार्धकृतशेखराम्। वृषारुढां शूलधरां शैलपुत्रीं यशस्विनीम्॥

3. वन्दे वांछित लाभाय चन्द्राद्र्वकृतशेखराम्। वृषारूढ़ा शूलधरां यशस्विनीम्॥

4. या देवी सर्वभूतेषु माँ शैलपुत्री रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:॥

12:46 (IST) 7 Oct 2021
घटस्थापना का शुभ मुहूर्त…

नवरात्रि कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त सुबह 6 बजकर 17 मिनट से सुबह 7 बजकर 07 मिनट तक रहेगा। इस मुहूर्त की कुल अवधि 50 मिनट की है। दूसरा मुहूर्त सुबह 11 बजकर 45 मिनट से दोपहर 12 बजकर 32 मिनट तक रहेगा। इस मुहूर्त की कुल अवधि 47 मिनट की है।

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