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Navratri 2020 Vrat Vidhi, Katha: ­नवरात्र का महापर्व है अत्यंत शुभ, जानिये प्राचीन व्रत कथा

Navratri 2020 Vrat Puja Vidhi, Katha: नवरात्र का व्रत रखने के साथ-साथ कथा जरूर पढ़नी चाहिए। मान्यता है कि देवी की कथा पढ़ने-सुनने से उनकी कृपा प्राप्त होती है।

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Navratri 2020 Vrat Puja Vidhi, Katha: शारदीय नवरात्र  17 अक्‍टूबर, शनिवार से प्रारंभ हो रहा है। ये मां दुर्गा की उपासना का है। इस साल नवरात्र 17 अक्टूबर से 24 अक्टूबर तक चलेगा। कहते हैं कि इन दिनों में देवी दुर्गा की आराधना करना अत्यंत शुभदायी माना जाता है। नवरात्र में देवी के भक्त व्रत रखकर देवी की उपासना करते हैं। नवरात्र का व्रत रखने के साथ-साथ कथा भी जरूर पढ़नी चाहिए। मान्यता है कि देवी की कथा पढ़ने-सुनने से उनकी कृपा प्राप्त होती है।

नवरात्र व्रत कथा (Navratri Vrat Katha)
पुराणों में नवरात्र की दो प्राचीन कथाओं का वर्णन किया गया है। एक कथा के मुताबिक प्राचीन काल में महिषासुर नाम का एक राक्षस था। वह ब्रह्मा जी का परम भक्त था। उस राक्षस ने अपने कठोर तप से ब्रह्मा जी को प्रसन्न कर यह वरदान लिया कि उसे कोई देव, राक्षस, पृथ्वी पर रहने वाला कोई मनुष्य या जन्तु मार न पाए। वरदान मिलते ही उसके मन से दया का भाव समाप्त हो गया।

अपना राज्य स्थापित करने के लिए वह तीनों लोकों में आतंक माचने लगा। राक्षस के आतंक से परेशान होकर देवी-देवताओं ने ब्रह्मा, विष्णु और महेश के साथ मिलकर मां शक्ति के रूप में देवी दुर्गा को प्रकट किया। फिर मां दुर्गा और महिषासुर के बीच नौ दिनों तक भयंकर युद्ध हुआ और दसवें दिन मां दुर्गा ने महिषासुर का वध किया। पृथ्वी से राक्षसों का नाश होने और बुराई पर अच्छाई की जीत के लिए इन दिनों को खास माना जाता है।

दूसरी प्राचीन कथा के मुताबिक त्रेता युग में भगवान श्रीराम ने लंका पर आक्रमण करने से पहले और रावण के साथ हुए युद्ध में जीत के लिए शक्ति की देवी मां भगवती की आराधना की थीं। रामेश्वरम में प्रभु श्रीराम ने नौ दिनों तक देवी की पूजा की। श्रीराम की भक्ति से प्रसन्न होकर मां ने श्रीराम को लंका में विजय प्राप्ति करने का आशीर्वाद दिया। दसवें दिन भगवान राम ने लंकापति रावण को युद्ध में हराकर उसका वध कर लंका पर विजय प्राप्त की। इस दिन को विजयदशमी यानी दशमी के रूप में जाना जाता है।

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