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Durga Aarti, Jai Ambe Gauri Aarti: जय अम्बे गौरी, मैया जय श्यामा गौरी… इस आरती से मां दुर्गा को करें प्रसन्न

Durga Ji Ki Aarti, jai ambe gauri aarti lyrics, maa durga aarti, jai ambe gauri aarti in HIndi, Ambe Ji Ki Aarti, Mata Ki Aarti, maa Katyayini aarti lyrics: नवरात्रि के छठे दिन मां कात्यायनी की पूजा को जय अम्बे गौरी... आरती के साथ संपन्न करें। इस आरती को खुद बोलने का विशेष महत्व होता है।

Author Updated: October 4, 2019 5:33 PM
durga ji ki aarti: जय अम्बे गौरी, मैया जय अम्बे गौरी

Durga Ji Ki Aarti, jai ambe gauri aarti lyrics, Navratri 2019 : नवरात्रि पर नौ दिनों की पूजा में आज छठा दिन है। आज मां कात्यायनी (Maa Katyayini) की पूजा हो रही है। सुबह पहले विधि विधान पूजा होगी इसके बाद आरती का वक्त है। ऐसे में मां भगवती को प्रिय उनकी आरती ‘जय अम्बे गौरी, मैया जय श्यामा गौरी..’ के साथ आज की पूजा संपन्न करें। आरती के वक्त खुद आरती बोलना ही लाभकारी माना गया है। इसलिए नीचे दी गई पंक्तियों को पढ़कर मां अम्बे की आरती करें। याद रहे आरती करते वक्त दीप से आरती उल्टा न उतारें। इसके अलावा आरती के साथ घड़ी—घंटा, शंख, ढोल ताशे आदि के साथ भी आरती का विधान है। घर में आप आरती के साथ शंख और घंटी बजाएं तो घर से दरिद्रता दूर भागती है।

Jai Ambe Gauri Aarti (मां दुर्गा की आरती)

जय अम्बे गौरी, मैया जय श्यामा गौरी।
तुमको निशदिन ध्यावत, हरि ब्रह्मा शिव री।। जय अम्बे गौरी,…।

मांग सिंदूर बिराजत, टीको मृगमद को।
उज्ज्वल से दोउ नैना, चंद्रबदन नीको।। जय अम्बे गौरी,…।

नवरात्रि व्रत वाले दिन इस कथा को जरूर पढ़ें या सुनें

कनक समान कलेवर, रक्ताम्बर राजै।
रक्तपुष्प गल माला, कंठन पर साजै।। जय अम्बे गौरी,…।

केहरि वाहन राजत, खड्ग खप्परधारी।
सुर-नर मुनिजन सेवत, तिनके दुःखहारी।। जय अम्बे गौरी,…।

कानन कुण्डल शोभित, नासाग्रे मोती।
कोटिक चंद्र दिवाकर, राजत समज्योति।। जय अम्बे गौरी,…।

शुम्भ निशुम्भ बिडारे, महिषासुर घाती।
धूम्र विलोचन नैना, निशिदिन मदमाती।। जय अम्बे गौरी,…।

चण्ड-मुण्ड संहारे, शौणित बीज हरे।
मधु कैटभ दोउ मारे, सुर भयहीन करे।। जय अम्बे गौरी,…।

ब्रह्माणी, रुद्राणी, तुम कमला रानी।
आगम निगम बखानी, तुम शिव पटरानी।। जय अम्बे गौरी,…।

नवरात्रि व्रत सामग्री, कलश स्थापना मुहूर्त और सभी जानकारी मिलेगी यहां

चौंसठ योगिनि मंगल गावैं, नृत्य करत भैरू।
बाजत ताल मृदंगा, अरू बाजत डमरू।। जय अम्बे गौरी,…।

तुम ही जग की माता, तुम ही हो भरता।
भक्तन की दुःख हरता, सुख सम्पत्ति करता।। जय अम्बे गौरी,…।

भुजा चार अति शोभित, खड्ग खप्परधारी।
मनवांछित फल पावत, सेवत नर नारी।। जय अम्बे गौरी,…।

कंचन थाल विराजत, अगर कपूर बाती।
श्री मालकेतु में राजत, कोटि रतन ज्योति।। जय अम्बे गौरी,…।

अम्बे जी की आरती जो कोई नर गावै।
कहत शिवानंद स्वामी, सुख-सम्पत्ति पावै।। जय अम्बे गौरी,…।

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