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Navratri 5th Day, Maa Skandamata Puja: नवरात्र के 5वें दिन स्कंदमाता की उपासना, जानें क्या है पूजा विधि और शुभ मुहुर्त

Navratri 2018 5th Day, Maa Skandamata Puja Vidhi, Vrat Katha, Mantra, Aarti: संतानप्राप्ति में बाधाओं को दूर करने के लिए स्कंदमाता की पूजा की जाती है। इससे संतान की बाधाएं दूर होती हैं।

स्कंदमाता का पूजन करने का सबसे सही समय सुबह के 8 बजे से सुबह के 9 बजे तक होता है।

Navratri 2018 5th Day, Maa Skandamata Puja Vidhi, Vrat Katha, Mantra, Aarti: शारदीय नवरात्र के 5वें दिन देवी स्कंदमाता की पूजा की जाती है। पौराणिक कथाओं के अनुसार स्‍कंदमाता हिमालय की पुत्री पार्वती हैं, जिन्‍हें माहेश्‍वरी और गौरी के नाम से भी जाना जाता है। मां दुर्गा के इस स्वरूप के नाम के पीछे भगवान कार्तिकेय हैं। दरअसल, भगवान शिव और माता पार्वती के ज्येष्ठ पुत्र कार्तिकेय का एक नाम स्कंद भी है। ऐसे में स्कंदमाता यानी कि कार्तिकेय की माता के रूप में मां दुर्गा की पूजा नवरात्र के 5वें दिन की जाती है। संतानप्राप्ति में बाधाओं को दूर करने के लिए स्कंदमाता की पूजा की जाती है। इससे संतान की बाधाएं दूर होती हैं। चार भुजाओं वाली स्कंदमाता अपनी भुजाओं में भगवान कार्तिकेय, वरमुद्रा और कमलपुष्प को धारण किए हुए हैं। स्कंदमाता कमल के आसन पर विराजमान होती हैं इसलिए उन्हें पद्मासना देवी भी कहा जाता है। पद्मासना देवी का वाहन सिंह है।

कैसे करें पूजा – नवरात्र के पांचवे दिन स्कंदमाता की पूजा की करने के लिए सबसे पहले घर के पूर्वोत्तर दिशा में माता का चित्र स्थापित कर उसका पूजन करें। कांसे के दिए में गाय के घी का दीपक और धूप जलाएं। अशोक के पत्ते चढ़ाने से माता प्रसन्न होती हैं। गौलोचन से तिलक करने के बाद मां को मूंग के हलवे का भोग लगाएं। इसके बाद 108 बार ‘ॐ स्कंदमाता देव्यै नमः’ मंत्र का जाप करें। भोग किसी गरीब को दे दें।

क्या है पूजा मुहुर्त और लाभ – स्कंदमाता का पूजन करने का सबसे सही समय सुबह के 8 बजे से सुबह के 9 बजे तक होता है। अगर आपको अजीविका संबंधी दिक्कत है या फिर आप वाणिज्य या व्यापार से संबंधित हैं तो आपके लिए मां स्कंदमाता की पूजा बहुत लाभदायक है। इसके अलावा मां दुर्गा के स्कंदमाता स्वरूप की पूजा करने से रोगों से निजात मिलता है और परिवार में कलह इत्यादि दूर होते हैं।

इस मंत्र से करें उपासना – स्कंदमाता की उपासना के लिए इस मंत्र का जाप करें –

या देवी सर्वभू‍तेषु स्कंदमाता रूपेण संस्थिता,
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।।

या

सौम्या सौम्यतराशेष सौम्येभ्यस्त्वति सुन्दरी।
परापराणां परमा त्वमेव परमेश्वरी।।

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