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Navratri 2018 4th Day Puja Vidhi: नवरात्रि के चौथे दिन होगी मां कूष्मांडा की आराधना, जानिए पूजा विधि और मंत्र!

Navratri 2018 4th Day, Maa Kushmanda Puja Vidhi, Vrat Katha: मां कूष्मांडा को अष्टभुजा देवी के नाम से भी जाना जाता है। क्योंकि देवी कूष्मांडा अष्टभुजा से युक्त हैं। कूष्मांडा देवी अपनी इन भुजाओं में कमण्डल, धनुष, बाण, कमल का फूल, अमृत भरा कलश, चक्र और गदा व माला धारण किए हुए हैं।

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Navratri 2018 4th Day, Maa Kushmanda Puja Vidhi, Vrat Katha: नवरात्रि का पवित्र पर्व चल रहा है। नवरात्रि में नौ दिनों तक मां दुर्गा के अलग-अलग रूपों की पूजा की जाती है। आज यानी कि 13 अक्टूबर, दिन शनिवार को नवरात्रि का चौथा दिन है। इस दिन माता दुर्गा के कूष्मांडा स्वरूप की आराधना की जाती है। मां कूष्मांडा को अष्टभुजा देवी के नाम से भी जाना जाता है। क्योंकि देवी कूष्मांडा अष्टभुजा से युक्त हैं। कूष्मांडा देवी अपनी इन भुजाओं में कमण्डल, धनुष, बाण, कमल का फूल, अमृत भरा कलश, चक्र और गदा व माला धारण किए हुए हैं। माता के स्वरूप के बारे में कहा जाता है कि यह भक्तों को ऋद्धि-सिद्धि प्रदान करता है। इस स्वरूप को सूर्य के समान तेजस्वी कहा गया है। मां का यह तेज स्वरूप जीवन जीने की प्रेरणा देता है।

पूजा विधि: नवरात्रि में सूर्योदय से पहले जग जाएं। स्वस्च्छ होने के बाद मां की आराधना का विचार करें। सबसे पहले कलश और उसमें उपस्थित देवी-देवता की पूजा करें। अब कूष्मांडा देवी की आराधना शुरू करें। सर्वप्रथम अपने हाथों में फूल लेकर देवी मां को प्रणाम करें। देवी मां के सामने व्रत और पूजन का संकल्प लें। इसके बाद वैदिक एवं सप्तशती मंत्रों द्वारा मां कूष्मांडा सहित समस्त स्थापित देवी-देवताओं की षोडशोपचार पूजा करें। इसमें आवाह्न,  आसन, पाद्य,  अध्र्य,  आचमन,  स्नान,  वस्त्र,  सौभाग्य सूत्र, चंदन, रोली, हल्दी, सिंदूर, दुर्वा, बिल्वपत्र, आभूषण, पुष्प-हार, सुगंधित द्रव्य, धूप-दीप, नैवेद्य, फल, पान, दक्षिणा, आरती, प्रदक्षिणा, मंत्र पुष्पांजलि आदि करें। अंत में बड़ी ही श्रद्धा के साथ अपने परिवार और पड़ोसियों में प्रसाद का वितरण करें।

पूजा मंत्र: मां कूष्मांडा की पूजा में इस मंत्र का जप करें। कहते हैं कि इससे मां बड़ी जल्दी प्रसन्न हो जाती हैं। और अपने भक्तों की मनोकामनाएं पूरी करती हैं।
              या देवी सर्वभू‍तेषु मां कूष्मांडा रूपेण संस्थिता।
              नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।।

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