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नवरात्रि 2017: जानिए, मां दुर्गा की पूजा करने और कलश स्थापना का क्या है शुभ मुहूर्त

Navratri 2017 Puja Vidhi, Durga Puja: कलश शुभ मुहूर्त में स्थापित करने से आपके जीवन में आने वाली परेशानियां खत्म हो जाती हैं। सभी पूजा विधि को समयानुसार कर लेना चाहिए।

Navratri 2017 Puja Vidhi: नवरात्र में सभी पूजा विधि समय से करेंगे तो मिलेगा विशेष लाभ

नौ रातों का समूह यानी नवरात्रे की शुरूआत अश्विन माह के शुक्ल पक्ष की पहली यानी तारीख 21 सितंबर से होने जा रही है। इन नौ दिनों में मां दुर्गा के नौ रूपों की पूजा की जाती है। अश्विन पक्ष में आने वाले नवरात्रे शारदीय नवरात्रे भी कहलाते हैं। नवरात्रों की शुरूआत सनातन काल से हुई थी। सबसे पहले भगवान रामचंद्र ने समुंद्र के किनारे नौ दिन तक दुर्गा मां का पूजन किया था और इसके बाद लंका की तरफ प्रस्थान किया था। फिर उन्होंने युद्ध में विजय भी प्राप्त की थी, इसलिए दसवें दिन दशहरा मनाया जाता है और माना जाता है कि अधर्म की धर्म पर जीत, असत्‍य की सत्‍य पर जीत के लिए दसवें दिन दशहरा मनाते हैं। शारदीय नवरात्र 21 सितंबर से शुरू हो रहे हैं।

मां दुर्गा का विशेष आशीर्वाद लेने की अगर कामना करते हैं तो आपको कुछ बातें विशेष तौर पर अपनानी होंगी। जिसमें सबसे पहले हैं शुभ मुहूर्त में पूजा करना। नवरात्र में लोग अपने घरों में कलश स्थापना करते हैं। ये कलश शुभ मुहूर्त में स्थापित करने से आपके जीवन में आने वाली परेशानियां खत्म हो जाती हैं। इस बार नवरात्रि का शुभ मुहूर्त सुबह 6 बजकर 3 मिनट से 8 बजकर 22 मिनट तक रहेगा। इसके बाद नौ दिन तक रोजाना मां दुर्गा का पूजन और उपवास किया जाता है। अभिजीत मुर्हूत 11.36 से 12.24 बजे तक है। देवी बोधन 26 सितंबर मंगलवार को होगा। बांग्ला पूजा पद्धति को मानने वाले पंडालों में उसी दिन पट खुल जाएंगे। जबकि 27 सितंबर सप्तमी तिथि को सुबह 9.40 बजे से देर शाम तक माता रानी के पट खुलने का शुभ मुहूर्त है। शुभ मुहूर्त में कलश स्थापना से आपकी पूजा सफल होती है। सुबह उठकर सप्तशती का पाठ करना शुभ रहता है।

पहले नवरात्रे वाले दिन मां के रूप शैलपुत्री का पूजन किया जाता है। इसी दिन कलश स्थापना होती है। कलश पर स्वास्तिक बनाया जाता है। हिंदू घर्म में इसकी बहुत मान्यता है, इसके बाद कलश पर मौली बांध कर उसमें जल भरकर उसे नौ दिन के लिए स्थापित कर दिया जाता है। कुछ लोग नवरात्रों के अष्टमी के दिन कन्या पूजन करते हैं और कुछ लोग नवमी के दिन पूजन किया जाता है। कन्या पूजन के बिना नवरात्रों का फल नहीं मिलता है। आप चाहे उपवास ना करें लेकिन नवरात्र के दौरान कन्या पूजन सबसे महत्वपूर्ण है। छोटी कन्याओं को मां दुर्गा का रूप माना जाता है।

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