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नर्मदा जयंती 2018: इस दिन स्नान करना माना जाता है लाभकारी, जानें क्या है मां नर्मदा के पूजन का महत्व

Narmada Jayanti 2018: नर्मदा जयंती के दिन नदी के सभी तटों को सजाया जाता है और नदी के किनारे साधू-संत हवन करते हैं। इस दिन मां नर्मदा के पूजन के बाद भंडारा आदि किया जाता है।

Narmada Jayanti 2018: नर्मदा जयंती की शाम को मां नर्मदा की महाआरती की जाती है। (फोटो सोर्स- यूट्यूब)

हिंदू पंचाग के अनुसार माघ माह के शुक्ल पक्ष की सप्तमी के दिन हर वर्ष नर्मदा जयंती महोत्सव मनाया जाता है। मां नर्मदा के जन्मस्थान अमरकंटक में ये उत्सव बहुत ही धूमधाम से मनाया जाता है। जनवरी माह में मकर संक्रांति के त्योहार के बाद नर्मदा जयंती उत्सव मनाया जाता है। भारत में 7 धार्मिक नदियां हैं जिसमें से मां नर्मदा को भगवान शिव ने देवताओं के पाप धोने के लिए उत्पन्न किया था। माना जाता है कि इसके पवित्र जल में स्नान करने से सारे पाप धुल जाते हैं। नर्मदा महोत्सव को हिंदुओं द्वारा पर्व के रुप में मनाया जाता है। इस वर्ष नर्मदा जयंती 24 जनवरी 2018, बुधवार को मनाई जाएगी।

नर्मदा जयंती के दिन नदी के सभी तटों को सजाया जाता है और नदी के किनारे साधू-संत हवन करते हैं। इस दिन मां नर्मदा के पूजन के बाद भंडारा आदि किया जाता है और जरुरतमंदों को भोजन करवाया जाता है। नर्मदा जंयती के दिन शाम को नदी किनारे कई सारे कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। शाम को मां नर्मदा की महाआरती की जाती है। माना जाता है जो भक्त इस दिन मां नर्मदा का पूजन करते हैं उनके सभी पाप नष्ट हो जाते हैं। इस वर्ष नर्मदा जयंती महोत्सव दो दिन तक जारी रहेगा और माना जाता है कि मां नर्मदा की आराधना के साथ इसमें स्नान करने से अनेक रोगों से छुटकारा मिलता है। इसके लिए दो कथाएं महत्वपूर्ण रुप से प्रचलित हैं।

एक कथा के अनुसार माना जाता है कि एक बार भगवान शिव गहरी तपस्या में लीन थे। इसमें उनके शरीर में से पसीना निकलने लगा और नदी के रुप में बहने लगा। भगवान शिव में से निकले इस पसीने के कारण से ही नर्मदा नदी का निर्माण हुआ। एक अन्य कथा के अनुसार माना जाता है कि ब्रह्मा जी किसी बात को लेकर बहुत परेशान थे और तभी उनकी आंखों से आंसु की दो बूंदें गिरी, जिससे दो नदियों का जन्म हुआ। एक नदी को नर्मदा कहा गया और दूसरी नदी को सोन कहा गया। इसके अलावा नर्मदा पुराण में नर्मदा नदी को रेवा कहे जाने के बारे में भी बताया गया है।

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