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नर्मदा जयंती 2018: भगवान शिव से लिया था ‘कभी ना नाश’ होने का वरदान, जानें क्या है नर्मदा की उत्पत्ति का कारण

Narmada Jayanti 2018 Puja Vidhi: नर्मदा महोत्सव को हिंदुओं द्वारा पर्व के रुप में मनाया जाता है। इस वर्ष नर्मदा जयंती 24 जनवरी 2018, बुधवार को मनाई जाएगी।

Narmada Jayanti 2018: जनवरी माह में मकर संक्रांति के त्योहार के बाद नर्मदा जयंती उत्सव मनाया जाता है।

हिंदू पंचाग के अनुसार माघ माह के शुक्ल पक्ष की सप्तमी के दिन हर वर्ष नर्मदा जयंती महोत्सव मनाया जाता है। मां नर्मदा के जन्मस्थान अमरकंटक में ये उत्सव बहुत ही धूमधाम से मनाया जाता है। जनवरी माह में मकर संक्रांति के त्योहार के बाद नर्मदा जयंती उत्सव मनाया जाता है। भारत में 7 धार्मिक नदियां हैं जिसमें से मां नर्मदा को भगवान शिव ने देवताओं के पाप धोने के लिए उत्पन्न किया था। माना जाता है कि इसके पवित्र जल में स्नान करने से सारे पाप धुल जाते हैं। नर्मदा महोत्सव को हिंदुओं द्वारा पर्व के रुप में मनाया जाता है और नदी का पूजन किया जाता है। इस वर्ष नर्मदा जयंती 24 जनवरी 2018, बुधवार को मनाई जाएगी।

पौराणिक कथा के अनुसार माना जाता है कि एक बार देवताओं ने अंधकासुर नाम के राक्षस का विनाश किया और उस वध में देवताओं ने कई पाप किए। इस स्थिति के चलते भगवान विष्णु और ब्रह्मा जी सभी देवताओं के साथ भगवान शिव के पास गए। उस समय भगवान शिव तपस्या में लीन थे। देवताओं ने उनसे अनुरोध किया कि प्रभु राक्षसों का वध करते हुए हम भी पाप के भागीदारी हो गए हैं। हमारे पापों का नाश करने का कोई उपाए सुझाएं। भगवान शिव की आराधना खत्म होती है और जैसी ही वो अपने नेत्र खोलते हैं तभी उनकी भौओं से एक प्रकाशमय बिंदु पृथ्वी पर अमरकंटक के मैखल पर्वत पर गिरता है और वहां एक कन्या ने जन्म लिया। वह कन्या बहुत ही रुपवान होती है, इस कारण से भगवान विष्णु और अन्य देव उस कन्या का नाम नर्मदा रखते हैं। माना जाता है कि भगवान शिव ने देवों के पाप धोने के लिए नर्मदा को उत्पन्न किया था।

एक अन्य कथा के अनुसार माना जाता है कि उत्तर में बहने वाली गंगा के तट पर नर्मदा ने कई सालों तक भगवान शिव की आराधना की थी। भगवान शिव उनकी आराधना से प्रसन्न होकर वरदान देते हैं जो अन्य किसी नदी को प्राप्त नहीं हैं। नर्मदा ने भगवान शिव से वरदान मांगा कि मेरा नाश किसी भी परिस्थिति में नहीं हो चाहे प्रलय क्यों नहीं आ जाए, मैं पृथ्वी पर एक मात्र ऐसी नदी रहूं जो पापों का नाश करे। मेरा हर पत्थर बिना किसी प्राण प्रतिष्ठा के भी पूजनीय हो, मेरे तट पर सभी देवताओं का निवास रहे। इस कारण से नर्मदा का कभी विनाश नहीं होता, वो सभी के पापों को हरने वाली नदी मानी जाती है। इस नदी के पत्थरों को कई मंदिर में शिवलिंग के रुप में स्थापित किया गया है। इस नदी में स्नान करने से पापों से मुक्ति मिलती है।

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