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पिता के श्राप की वजह से नहीं हुई नारद जी की शादी, पढ़ें यह रोचक प्रसंग

ब्रम्हा जी ने सृष्टि निर्माण के वक्त आठ मानस पुत्रों को जन्म दिया था। नारद ब्रम्हा जी के कण्ठ से पैदा हुए थे।

नारद जी।

देवर्षि नारद जी को इस सृष्टि का पहला पत्रकार कहा जाता है। कहते हैं कि इधर-उधर की खबरें पहुंचाने का काम सबसे पहले नारद जी ने ही शुरू किया था। उनसे जुड़े हुए तमाम प्रसंग बड़े ही प्रसिद्ध हैं। इन्हीं प्रसंगों में से एक उनकी शादी से जुड़ा हुआ है। इस प्रसंग के मुताबिक, पिता के श्राप की वजह से नारद जी की शादी नहीं हुई थी। नारद पुराण की एक कथा में इस घटनाक्रम का विस्तार से जिक्र किया गया है। इसके मुताबिक, ब्रम्हा जी ने सृष्टि निर्माण के वक्त आठ मानस पुत्रों को जन्म दिया था। नारद ब्रम्हा जी के कण्ठ से पैदा हुए थे। ब्रम्हा जी ने सृष्टि विस्तार के लिए अपने आठों पुत्रों को विवाह करने का आदेश दिया। लेकिन नारद ब्रम्हा जी का यह आदेश मानने से इनकार कर दिया।

प्रसंग के मुताबिक, नारद के इस इनकार से ब्रम्हा जी काफी क्रोधित हुए। ब्रम्हा ने नारद को श्राप दिया, ‘‘तुमने मेरी आज्ञा नहीं मानी, इसलिए तुम्हारा समस्त ज्ञान नष्ट हो जाएगा और तुम गन्धर्व योनी को प्राप्त होकर कामिनीयों के वशीभूत हो जाओगे।’’ इसी वजह से नारद जी को प्रथम गंदर्भ कहा जाता है। बता दें कि नारद जी ने विवाह ना करने की वजह भगवान पुरुषोत्तम की आराधना करने को बताई थी। उन्होंने भगवान की भक्ति को ही मनुष्य का प्रथम कार्य माना था।

नारद जी के संदर्भ में एक अन्य प्रसंग राजा दक्ष से जुड़ा हुआ है। इस प्रसंग के मुताबिक, राजा दक्ष की पत्नी आसक्ति से 10 हजार पुत्रों का जन्म हुआ था। नारद ने इन सभी को मोक्ष की राह पर चलने की शिक्षा दी थी। इस वजह से इनमें से कोई भी राजा का राज पाट संभालने के लिए तैयार नहीं हुआ। इसके बाद राजा दक्ष ने पंचजनी से विवाह किया। पंचजनी ने एक हजार पुत्रों को जन्म दिया। नारद ने इन्हें भी मोक्ष के रास्ते पर चलने का ज्ञान दे दिया। इस पर दक्ष ने क्रोधित होकर नारद को श्राप दिया कि वे सदा ही इधर-उधर भटकते रहेंगे। वह कहीं एक जगह पर स्थिर नहीं रह पाएंगे।

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