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नारद जयंती 2020: इन श्राप के कारण नारद मुनि आजीवन अविवाहित रहकर इधर उधर भटकते रहे

Narada Jayanti 2020: ब्रह्मा ने अपने पुत्र नारद से सृष्टि के निर्माण में सहयोग करने के लिए विवाह करने की बात कही तब नारद ने अपने पिता को साफ मना कर दिया। जिस पर क्रोधित होकर ब्रह्मा जी ने उन्हें आजीवन अविवाहित रहने का श्राप दे दिया।

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नारद जयंती (Narada Jayanti) इस बार 08 मई को मनाई जायेगी। नारद मुनि भगवान विष्णु के अनन्य भक्त हैं। माना जाता है कि इनका जन्म ब्रह्मा जी की गोद से हुआ था। कहते हैं कि ब्रह्रााजी का मानस पुत्र बनने के लिए उन्होंने पिछले जन्मों में कड़ी तपस्या की थी। नारद मुनि ब्रम्हांड में घट रही सभी घटनाओं की जानकारी एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचाते थे। इन्होंने कभी विवाह नहीं किया जिसका जिक्र ब्रह्मवैवर्त पुराण में मिलता है।

ब्रह्मा जी से अविवाहित रहने का मिला श्राप: ब्रह्मवैवर्त पुराण के अनुसार जब ब्रह्मा सृष्टि का निर्माण कर रहे थे तब उनके चार पुत्र हुए। जो बड़े होने पर तपस्या करने के लिए चले गये। ब्रह्मा के सभी पुत्रों में से नारद सबसे चंचल स्वभाव के थे वह किसी की बात नहीं मानते थे। जब ब्रह्मा ने अपने पुत्र नारद से सृष्टि के निर्माण में सहयोग करने के लिए विवाह करने की बात कही तब नारद ने अपने पिता को साफ मना कर दिया। जिस पर क्रोधित होकर भगवान ब्रह्मा ने उन्हें आजीवन अविवाहित रहने का श्राप दे दिया। नारद मुनि को श्राप देते हुए ब्रह्मा ने कहा तुम हमेशा अपनी जिम्मेदारियों से भागते हो इसलिए अब पूरी जिंदगी इधर उधर भागते ही रहोगे।

दक्ष ने भटकते रहने का दिया श्राप: नारद मुनि हमेशा नारायण नारायण कहते इधर उधर भटकते रहते थे। उनके ऐसा करने के पीछे भी एक कथा है। दरअसल, राजा दक्ष की पत्नी आसक्ति ने 10 हज़ार पुत्रों को जन्म दिया था। लेकिन इनमें से किसी ने भी उनका राज पाट नहीं संभाला क्योंकि नारद जी ने सभी को मोक्ष की राह पर चलना सीखा दिया था। इसके बाद दक्ष ने पंचजनी से विवाह किया और उन्होंने एक हजार पुत्रों को जन्म दिया। नारद जी ने दक्ष के इन पुत्रों को भी सभी प्रकार के मोह माया से दूर रहना सिखा दिया। इस बात से राजा दक्ष को बहुत क्रोध आया, जिसके बाद उन्होंने नारद मुनि को श्राप दे दिया और कहा कि वह हमेशा इधर-उधर भटकते रहेंगे ।

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