दिव्य धाम की सीरीज में आज हम बात करने जा रहे हैं गुजरात प्रदेश के द्वारका शहर में स्थित नागेश्वर ज्योतिर्लिंग के बारे में जो द्वारका से लगभग 17 किलोमीटर दूर है। यह ज्योतिर्लिंग भगवान शिव के 12 पवित्र ज्योतिर्लिंगों में से एक माना जाता है। समुद्र तट के पास यह प्राचीन तीर्थ अपनी दिव्यता, धार्मिक मान्यता और भव्य 80 फीट ऊंची शिव प्रतिमा के लिए विश्वभर के श्रद्धालुओं को आकर्षित करता है। मान्यता है कि यहां सच्चे मन से भगवान शिव की आराधना करने से भय, नकारात्मक शक्तियों और जीवन की बाधाओं से मुक्ति मिलती है। सावन, महाशिवरात्रि और नाग पंचमी के अवसर पर यहां भक्तों की भारी भीड़ उमड़ती है।
नागेश्वर ज्योतिर्लिंग का इतिहास
शिव पुराण के अनुसार, प्राचीन समय में दारुक नामक एक राक्षस और उसकी पत्नी दारुका भक्तों और ऋषियों को अत्यंत कष्ट पहुंचाते थे। उसी समय भगवान शिव के परम भक्त सुप्रिय वैश्य को भी बंदी बना लिया गया। कारागार में रहते हुए सुप्रिय ने अन्य बंदियों के साथ मिलकर भगवान शिव का स्मरण और “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का जाप किया।
भक्त की पुकार सुनकर भगवान शिव स्वयं वहां ज्योतिर्लिंग के रूप में प्रकट हुए और दारुक का अंत कर अपने भक्तों की रक्षा की। इसके बाद भगवान शिव ने उसी स्थान पर ज्योतिर्लिंग रूप में सदैव विराजमान रहने का आशीर्वाद दिया। तभी से यह स्थान नागेश्वर ज्योतिर्लिंग के नाम से प्रसिद्ध हो गया।
धार्मिक महत्व
धार्मिक मान्यता है कि नागेश्वर ज्योतिर्लिंग के दर्शन और पूजा-अर्चना करने से व्यक्ति को भय, शत्रु बाधा और सर्प दोष से राहत मिलती है। शिव भक्त यहां विशेष रूप से रुद्राभिषेक, जलाभिषेक और बेलपत्र अर्पित कर भगवान शिव का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। ऐसा भी माना जाता है कि इस ज्योतिर्लिंग की आराधना करने से मानसिक शांति, आध्यात्मिक उन्नति और परिवार में सुख-समृद्धि का वास होता है। सावन मास और महाशिवरात्रि पर यहां पूजा का विशेष महत्व बताया गया है।
नागेश्वर ज्योतिर्लिंग कैसे पहुंचे?
नागेश्वर ज्योतिर्लिंग से सबसे पास हवाई अड्डा जामनगर एयरपोर्ट है, जो मंदिर से लगभग 135–140 किलोमीटर की दूर है। एयरपोर्ट से टैक्सी या बस के माध्यम से आसानी से नागेश्वर मंदिर पहुंचा जा सकता है। वहीं मंदिर से सबसे पास द्वारका रेलवे स्टेशन है, जो नागेश्वर ज्योतिर्लिंग से लगभग 17–18 किलोमीटर दूर है। द्वारका स्टेशन से ऑटो, टैक्सी और स्थानीय बसों की सुविधा उपलब्ध रहती है।
डिसक्लेमर- यह लेख धार्मिक मान्यताओं, पौराणिक कथाओं और उपलब्ध ऐतिहासिक जानकारी पर आधारित है। मंदिर से जुड़ी मान्यताओं पर आस्था व्यक्ति विशेष की हो सकती है। यात्रा से पहले स्थानीय प्रशासन या आधिकारिक स्रोतों से समय और व्यवस्थाओं की जानकारी अवश्य प्राप्त करें।
