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पौराणिक कथा:जानिए कैसे हुई भगवान गणेश की शादी, क्या है उनके बेटों का नाम

शादी के बाद भगवान गणेश को दो पुत्रों की प्राप्ति हुई। इन दोनों के नाम रखे गए शुभ और अशुभ।
भगवान गणेश जी (सांकेतिक फोटो)

गणेश जी भगवान शिवजी और माता पार्वती के बेटे हैं। गणेश जी की शादी के बारे में एक पौराणिक कथा है। पौराणिक कथा के मुताबिक गणेश जी से कोई लड़की शादी करने को तैयार नहीं होती थी, इसकी वजह थी गणेश जी के शरीर पर हाथी का सिर और उनका वाहन चूहा। साथ ही भगवान परशुराम के युद्ध करते हुए उनका एक दांत भी टूट गया था। यही कारण थे कि कोई भी लड़की गणेश जी से शादी करने को तैयार नहीं होती थी। इस बात से गणेश जी परेशान रहते थे।

पौराणिक कथा के मुताबिक दूसरे देवताओं के विवाह के दौरान गणेश जी का चूहा मंडप में जाकर मंडप को खोखला कर देता था। ऐसा काफी समय तक चलता रहा है। सभी देवता गणेश जी से परेशान हो गए। परेशान होकर देवता शिवजी और पार्वती के पास गए। देवताओं ने माता पार्वती और शिवजी को अपनी परेशानी बताई। देवताओं की बात सुनकर शिवजी ने देवताओं को भगवान ब्रह्माजी के पास जाने की सलाह दी।

देवता जब भगवान ब्रह्माजी के पास पहुंचे तो वो तपस्या में लीन थे। देवताओं ने ब्रह्माजी को परेशानी बताई तो उन्होंने अपने योगबल से दो कन्याएं अवतरित की। इन दोनों का नाम ऋद्धि और सिद्धि था।

इन दोनों कन्याओं को लेकर ब्रह्माजी गणेश जी के पास पहुंचे। ब्रह्मा जी ने गणेश जी को इन दोनों को शिक्षा देने को कहा। गणेश जी दोनों को शिक्षा देने को तैयार हो गए। दोनों कन्याएं गणेश जी के पास रहने लगी। जब भी चूहा गणेश जी के पास किसी देवता के विवाह की खबर लेकर आता तो ऋद्धि और सिद्धि उन्हें अपनी पढ़ाई में व्यस्त कर लेती।

एक दिन चूहे ने गणेश जी को बताया कि एक देवता का विवाह हो गया वो भी बीना किसी परेशानी के। चूहे की बातें सुनकर गणेश जी को पूरा मामला समझ में आया। इससे गणेश जी को गुस्सा आ गया। ऋद्धि-सिद्धि को लेकर वो ब्रह्मा जी के पास पहुंचे। ब्रह्मा जी ने गणेश जी को कहा कि इन दोनों को आपने शिक्षा दी है, मुझे इनके लिए कोई आपसे अच्छा वर नहीं मिलेगा। आप इनसे शादी कर लें।

इसके बाद गणेश जी ने दोनों से शादी कर ली। शादी के बाद भगवान गणेश को दो पुत्रों की प्राप्ति हुई। इन दोनों के नाम रखे गए शुभ और अशुभ।

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