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शनि की क्रूर दृष्टि से कटा था भगवान गणेश का सिर! जानें क्या है पौराणिक कथा

माता पार्वती ने अपने तन के मैल से गणेश का स्वरुप तैयार किया था

भगवान गणेश का स्वरुप विलक्षण और मंगलकारी माना जाता है।

भगवान गणेश को गजानन के नाम से भी जाना जाता है। इसका कारण उनका मुख गज यानि हाथी का होना है। भगवान गणेश के हाथी के सिर होने की एक पौराणिक कथा प्रचलित है कि भगवान शिव से अपने ही पुत्र का सिर कट गया था और उसके बाद उन्हें हाथी का सिर लगाया गया था। भगवान गणेश का स्वरुप विलक्षण और मंगलकारी माना जाता है। भगवान गणेश को बुद्धिमान माना जाता है और उनसे जुड़ी अनेकों कथाएं हिंदू धर्म में प्रचलित हैं, लेकिन क्या हम जानते हैं जब भगवान शिव ने गणेश जी का सिर काट दिया था तो वो मस्तक कहां चला गया।

एक कथा अनुसार माना जाता है कि माता पार्वती ने जब भगवान गणेश को जन्म दिया तब इन्द्र, चंद्र सहित सारे देवी-देवता उनके दर्शन की इच्छा लेकर प्रकट हुए। सभी देवताओं में शनिदेव भी आए, जिन्हें श्राप मिला हुआ है कि इनकी दृष्टि जिस किसी पर भी पड़ेगी उसे हानि होगी। इसी श्राप के कारण जब शनिदेव ने गणेश जी को देखा तो उसी समय भगवान गणेश का मस्तक अलग होकर चंद्रमंडल में चला गया।

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इसी की तरह एक दूसरे प्रचलित प्रंसग के अनुसार माता पार्वती ने अपने तन के मैल से गणेश का स्वरुप तैयार किया था और स्नान होने तक गणेश को द्वार पर पहरा देने के लिए कहा कि किसी को भी अंदर प्रवेश ना करने दिया जाए। भगवान शिव को गणेश जी ने अंदर जाने से रोका तो अनजाने में उन्होनें गणेश का सिर काट दिया। सिर कटने के बाद वो अपने आप चंद्रलोक में चला गया। माता पार्वती को जब इस बारे में पता चला तो वो बहुत क्रोधित हुई। माता के क्रोध को शांत करने के लिए गणेश जी को गज का मुख जोड़ा गया। माना जाता है कि गणेश का मस्तक चंद्रमंडल में है और इसी मान्यता के कारण गणेश चतुर्थी के दिन चांद के दर्शन या उसे अर्घ्य देने के बाद ही व्रत पूरा किया जाता है।

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