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वैष्णो देवी की रहस्यमयी गर्भजून गुफा, जिससे निकल मां ने भैरों का किया था वध

ऐसी पौराणिक कथा है कि इसी गुफा में माता वैष्णो ने 9 महीने तक तपस्या की थी। गुफा से निकलते ही मां ने भैरोनाथ का वध कर दिया था।

Maa vaishno, bhairavnath, ardhkuwari, sanjhi chaat, badh ganga, gangaसांकेतिक तस्वीर।

हिंदू धर्म का पवित्र स्थान वैष्णो देवी, जहां हर साल लाखों की संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए आते हैं। 14 किलोमीटर इस लम्बी यात्रा में श्रद्धालुओं को बाणगंगा, अर्द्धकुंवारी और सांझी छत से होकर गुजरना पड़ता है। इन स्थानों के भी अपने महत्व और मान्यताएं हैं। लेकिन इनमें से अर्द्धकुंवारी की गुफा का विशेष महत्व माना गया है। जिसे गर्भजून गुफा के नाम से जाना जाता है।

गुफा का आकार एक माता के गर्भ के आकार जैसा ही है। छोटी सी इस गुफा में से बड़े से बड़े आकार का व्यक्ति बड़ी ही आसानी से निकल जाता है। भक्तों में प्रचलित है कि जो भी इस गुफा में जाते हैं वो जीवन मरण के चक्र से मुक्त हो जाते हैं। और अगर उन्हें फिर से ये जीवन मिल भी जाए, तो वो सुखमयी होता है। ऐसी पौराणिक कथा है कि इसी गुफा में माता वैष्णो ने 9 महीने तक तपस्या की थी। और गुफा से निकलते ही मां ने भैरोनाथ का वध कर दिया था।

इसके बाद आती है वह गुफा जहां माता का भवन है। यहां माता वैष्णो मां काली, सरस्वती और लक्ष्मी के पिंडी रूप में विराजमान हैं। यहां तक पहुंचने के लिए पहले प्राचीन गुफा का इस्तेमाल किया जाता था। लेकिन भक्तों की भीड़ को देखते हुए इस मार्ग को बंद कर दिया गया। और उसकी जगह पर एक नया मार्ग बनाया गया। वैसे मां वैष्णो के दरबार में 12 महीने भक्त दर्शन के लिए आते रहते हैं। लेकिन साल के जनवरी-फरवरी महीने में भीड़ को कम देखते हुए कुछ समय के लिए इस मार्ग को खोल दिया जाता है। लेकिन ऐसा तभी किया सकता है जब भक्तों की संख्या 10 हजार से कम हो।

भक्तों में प्रचलित मान्यता के अनुसार ये गुफा इसलिए खास है क्योंकि यहां भैरव का शरीर मौजूद है। माता ने जब भैरव का वध किया था। तब उसका सिर उड़कर भैरव घाटी में चला गया और शरीर इस गुफा में ही रह गया था। कहा जाता है कि इस प्राचीन गुफा में मां गंगा की पवित्र जल धारा प्रवाहित होती है। गुफा का रास्ता बेहद ही संकरा है। उसके बावजूद भी चाहे व्यक्ति मोटा हो या पतला बड़ी ही आसानी से निकल जाता है।

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