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जानिए कब है मोक्षदा एकादशी, श्रीकृष्ण ने अर्जुन को इसी दिन दिया था मोक्ष का गीता ज्ञान

Mokshada Ekadashi Vrat: मोक्षदा एकादशी के दिन भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन को गीता का उपदेश देकर मोक्ष प्राप्ति का मार्ग प्रशस्त किया था।

Mokshada Ekadashi 2019: मान्यता है कि मोक्षदा एकादशी का व्रत रखने से जीवन में जाने-अनजाने में किए गए पापों से मुक्ति मिल जाती है।

Mokshada Ekadashi Vrat: मोक्षदा एकादशी अगहन मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को मनाई जाती है। साल 2019 में मोक्षदा एकादशी 08 दिसंबर, रविवार को मनाई जाएगी। पुराणों में मोक्षदा एकादशी को मोक्ष कारक माना गया है। इस एकादशी के बारे में ऐसी मान्यता है कि तुलसी की मंजरी, धूप-दीप और नैवेद्य से भगवान विष्णु की पूजा की जाती है। मान्यता है कि मोक्षदा एकादशी का व्रत रखने से जीवन में जाने-अनजाने में किए गए पापों से मुक्ति मिल जाती है।

कथा: मोक्षदा एकादशी के दिन भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन को गीता का उपदेश देकर मोक्ष प्राप्ति का मार्ग प्रशस्त किया था। इस एकादशी के बारे में कथा है कि प्राचीन काल में वैखानस नाम का एक राजा था। जिसके राज्य में ब्राह्मण चारों वेदों के ज्ञाता थे। कहते हैं कि एक दिन राजा ने सपने में अपने पिता को नरक में देखा।

इस स्वप्न के बारे में राजा बहुत चिंतित था। राजा ब्राह्मणों से इस सपने के बारे में जानना चाहा। इसके अलावा राजा ने अपने पिता को नरक से मुक्ति का उपाय के बारे में पूछा। जिस पर ब्राह्मण कहते हैं कि हे राजन! यहां पास ही भूत और भविष्य के ज्ञाता एक ‘पर्वत’ नाम के मुनि रहते हैं। जो नरक से मुक्ति के बारे में बताएंगे। राजा यह सुनकर मुनि के आश्रम में गए।

उस आश्रम में अनेकों मुनि शांत अवस्था में तपस्या कर रहे थे। राजा में ऋषि को सारी बात बताई। जिस पर मुनि राजा को बोले- “आपके पिता ने पूर्व जन्म में एक दुष्कर्म किया था जिस पाप के कारण वे नरक में हैं।” यह सुनकर राजा नेम मुनि से इसका उपाय जानना चाहा।

ऋषि ने कहा- “मार्गशीर्ष (अगहन) मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को उपवास रखें। उस एकादशी के पुण्य फल के प्रभाव से आपके पिता को मुक्ति मिलेगी।” कहते हैं कि राजा ने जब मोक्षदा एकादशी को विधिपूर्वक किया तो उनके पिता को नरक से मुक्ति मिल गई और स्वर्ग को प्रस्थान किए।

मोक्षदा एकादशी शुभ मुहूर्त

-एकादशी आरंभ- 07 दिसंबर, सुबह 06 बजकर 34 मिनट से

-एकादशी समाप्त- 08 दिसंबर, सुबह 08 बजकर 29 मिनट पर

-एकादशी पारण- 09 दिसंबर 07 बजकर 02 मिनट से 09 बजकर 07 मिनट तक

-पारण के दिन द्वादशी समाप्त होने का समय- सुबह 09 बजकर 54 मिनट पर

मोक्षदा एकादशी पूजा-विधि

एकादशी के दिन विधिपूर्वक व्रत रखना चाहिए। घर या मंदिर में भगवान विष्णु का विधिवत पूजन कर उनके मंत्रों का जाप करना चाहिए। व्रत का समापन द्वादशी तिथि को करना चाहिए। द्वादशी पर ब्राह्मण को भोजन कराकर उन्हें दक्षिणा देना चाहिए।

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