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Mokshada Ekadashi 2018: मोक्ष प्राप्ति के लिए उत्तम है यह एकादशी, जानिए शुभ मुहूर्त

Mokshada Ekadashi 2017 Puja Vidhi, Vrat Katha: शास्त्रों के अनुसार इस दिन भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन को गीता का ज्ञान दिया था। जिस कारण से इस दिन को मोक्षदा एकादशी के रूप में मनाया जाने लगा।

दशमी तिथि की रात्रि से शुरु होकर ये व्रत द्वादशी की सुबह तक किया जाता है।

हिंदू पंचांग के अनुसार मोक्षदा एकादशी मार्गशीर्ष महीने के शुक्लपक्ष की एकादशी को मनाई जाती है। इस एकादशी को भगवान श्रीकृष्ण की विशेष पूजा की जाती है। इस साल मोक्षदा एकादशी मंगलवार 18 दिसंबर को मनाई जा रही है। इस दिन भगवान श्रीकृष्ण की कृपा पाने के लिए उपवास किया जाता है। शास्त्रों के अनुसार इस दिन भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन को गीता का ज्ञान दिया था। जिस कारण से इस दिन को मोक्षदा एकादशी के रूप में मनाया जाने लगा। माना जाता है इस दिन व्रत करने से मनुष्य संसार के सभी बंधनों से मुक्त होकर मोक्ष को प्राप्त करता है।

मान्यता है कि यह एकादशी पितरों के लिए भी मोक्ष का द्वार खोलने वाली होती है। इस एकादशी के दिन व्रत रखने से पूर्वजों को भी मोक्ष मिल जाता है और उन्हें स्वर्ग की प्राप्ति होती है। मोक्षदा एकादशी के दिन उपवास रखने वाले व्यक्ति के सभी पाप खत्म हो जाते हैं तथा वह जीवन में सभी सांसरिक सुख प्राप्त करता है। इस दिन गीता जयंती भी मनाई जाती है। मोक्षदा एकादशी के दिन ही भगवान श्रीकृष्ण ने कुरुक्षेत्र में अर्जुन को श्रीमद्भगवद्गीता का पाठ पढ़ाया था। इस दिन कई जगहों पर गीता पाठ भी किया जाता है।

यह व्रत पूरे दिन का होता है। दशमी तिथि की रात्रि से शुरु होकर ये व्रत द्वादशी की सुबह तक किया जाता है। इस दिन भगवान विष्णु के साश दामोदर और कृष्ण की पूजा की जाती है। एकदाशी के दिन भगवान विष्णु को फलाहार करवाया जाता है। कहा जाता है इस दिन चावल खाना अशुभ होता है। इस दिन व्रत करने वाले सुबह जल्दी उठकर व्रत का संकल्प लेते हैं और धूप, दीप, तुलसी आदि से भगवान की पूजा की जाती है। इस दिन व्रत करने से परिवार को सुख-समृद्धि प्राप्त होती है। मोक्षदा एकादशी के व्रत का महत्व धनुर्मास के कारण बढ़ जाता है। दक्षिण भारत में इसका पालन धार्मिक विधि के साथ किया जाता है।

मोक्षदा एकादशी मुहूर्त
18 दिसंबर 2018 की शाम 07:57pm से शुरू
19 दिसंबर 2018 की शाम 07:35pm पर समाप्त
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