ताज़ा खबर
 

Mohini Ekadashi 2019: जानिए, भगवान विष्णु ने असुरों को हराने के लिए कैसे लिया मोहिनी रूप

Mohini Ekadashi 2019: ऐसे में समुद्र मंथन की शुरुआत हुई और एक-एक कर कई चीजें निकलने लगी। इनमें विष, कामधेनु, उच्चश्रवा, ऐरावत हाथी और कल्पवृक्ष आदि शामिल थे।

Author नई दिल्ली | May 14, 2019 12:11 PM
Mohini Ekadashi 2019: जानिए, भगवान विष्णु ने असुरों को हराने के लिए कैसे लिया मोहिनी रूप।

Mohini Ekadashi 2019: रामायण और महाभारत में प्रायः सभी पढ़ते आए हैं कि देवी-देवताओं ने वक्त के अनुसार अपने अलग-अलग रूप लिए। देवी-देवताओं द्वारा अलग-अलग रूप लिए जाने के पीछे कुछ न कुछ कारण जरूर है। पौराणिक कथाओं के अनुसार श्रीहरि यानि विष्णु जी ने तीन-तीन बार मोहिनी का अवतार लिया और असुरों को पराजित किया। इन सब के बावजूद क्या आप जानते हैं कि आखिर भगवान विष्णु को मोहिनी रूप क्यों लेना पड़ा? साथ ही पुराणों में भगवान विष्णु के मोहिनी अवतार की कथा क्या है? यदि नहीं, तो आगे इसे जानते हैं।

पौराणिक कथाओं के अनुसार जब देवराज इंद्र दुर्वाशा ऋषि द्वारा दिए गए श्राप के कारण अपनी सारी शक्तियों से वंचित हो चुके थे तब असुर ज्यादा बलवान हो चुका था। कहते हैं कि ऐसी परिस्थिति में समुद्र मंथन के अलावा कोई और विकल्प नहीं था। ऐसे में समुद्र मंथन की शुरुआत हुई और एक-एक कर कई चीजें निकलने लगी। इनमें विष, कामधेनु, उच्चश्रवा, ऐरावत हाथी और कल्पवृक्ष आदि शामिल थे। इसे देवता और असुर आपस में बांट लिया। परंतु जब समुद्र मंथन से अमृत निकला तो असुर चाहते थे वो अमृत पी लें और देवता चाहते थे वह अमृत उनलोगों को मिले, लेकिन यदि असुर अमृत पी लेते तो वे अमर हो जाते। इसलिए यहां भगवान विष्णु मोहिनी के रूप में प्रकट हुए।

मोहिनी अत्यंत सुंदर थी। साथ ही इसकी सुंदरता पर असुर ने प्रस्ताव रखा जिसके अनुसार वो अमृत पान मोहिनी के हाथों ही करेंगे। कहते हैं कि विष्णु की के इसी अवतार ने असुरों को अमृत की जगह जल ग्रहण करवाया और देवताओं को अमृत। वहीं विष्णु जी ने दूसरा अवतार दैत्य भस्मासुर का अंत करने के लिए लिया। धार्मिक ग्रन्थों के अनुसार जब महादेव ने भस्मासुर को वरदान दिया था कि वह जैसे ही किसी के सिर पर अपना हाथ रखेगा वह जलकर भस्म हो जाएगा। वरदान मिलते ही भस्मासुर खुद को सबसे ज्यादा शक्तिशाली समझने लगा था।

तभी भस्मासुर की इच्छा हुई कि वो महादेव की पत्नी पार्वती जी को अपना ले और महादेव के सिर पर ही अपने हाथ रखने की कोशिश करने लगा। तब एक बार फिर विष्णु जी ने मोहिनी का अवतार लिया और भस्मासुर के सामने नृत्य करने का प्रस्ताव रखा। इस प्रकार नृत्य करते करते भस्मासुर का खुद का हाथ उसके सिर पर रखवा दिया। जिससे उसका नाश हो गया। दरअसल अर्जुन की जीत पर उसका पुत्र खुद की बलि देना चाहता था। लेकिन रावण ये भी चाहता था कि खुद की अंत से पहले वह विवाह करे। परंतु कोई भी कन्या विवाह के लिए तैयार नहीं हुई। क्योंकि विवाह के बाद पति की मौत की वाहजह से वो विधवा हो जाएगी। कहते हैं कि इस वक्त में भी श्रीहरि मोहिनी का अवतार लिया और विवाह के लिए तैयार हो गए।

Hindi News से जुड़े अपडेट और व्‍यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल के साथ लिंक्डइन पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News App

X