आज दिव्य धाम की सीरीज में हम बात करने जा रहे हैं, गुजरात के मेहसाणा जिले में स्थित मोढेरा सूर्य मंदिर के बारे में, जिसे भारत की वास्तु कला और खगोल विज्ञान का अनूठा उदाहरण माना जाता है। यह भव्य मंदिर सूर्य देव को समर्पित है और अपनी अद्भुत नक्काशी, वास्तुकला और वैज्ञानिक संरचना के कारण दुनियाभर के पर्यटकों को आकर्षित करता है। करीब 1000 साल पुराने इस मंदिर को गुजरात की सांस्कृतिक पहचान भी कहा जाता है।
क्या है मोढेरा सूर्य मंदिर का इतिहास?
इतिहासकारों के अनुसार इस मंदिर का निर्माण 1026-27 ईस्वी में चालुक्य या सोलंकी वंश के राजा भीमदेव प्रथम ने करवाया था। माना जाता है कि यह मंदिर उस दौर की उन्नत वास्तुकला और सूर्य उपासना परंपरा का प्रमुख केंद्र था। मंदिर पुष्पावती नदी के किनारे स्थित है और वर्तमान में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण द्वारा संरक्षित स्मारक है।
मंदिर की वास्तुकला बनाती है इसे खास
मोढेरा सूर्य मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता इसकी वैज्ञानिक संरचना है। मंदिर को इस तरह बनाया गया था कि विषुव के समय उगते सूर्य की पहली किरण सीधे गर्भगृह तक पहुंचती थी। यह मंदिर मुख्य रूप से तीन भागों में विभाजित है, गर्भगृह, सभामंडप और सूर्यकुंड।
वहीं मंदिर की दीवारों और स्तंभों पर देवी-देवताओं, अप्सराओं, पशु-पक्षियों और पौराणिक कथाओं की बेहद बारीक नक्काशी देखने को मिलती है। सूर्यकुंड में बने छोटे-छोटे मंदिर इसकी सुंदरता को और भी खास बनाते हैं।
यहां पूजा क्यों नहीं होती?
मोढेरा सूर्य मंदिर में अब नियमित पूजा-अर्चना नहीं होती। इसे एक संरक्षित ऐतिहासिक स्मारक घोषित किया गया है। कहा जाता है कि आक्रमणों और समय के साथ मंदिर का मूल स्वरूप प्रभावित हुआ, जिसके बाद यहां पूजा बंद कर दी गई।
कैसे पहुंचे मोढेरा सूर्य मंदिर?
मोढेरा सड़क मार्ग से गुजरात के प्रमुख शहरों से अच्छी तरह जुड़ा हुआ है। वहीं सबसे पास अहमदाबाद एयरपोर्ट है। साथ ही सबसे पास मेहसाणा रेलवे स्टेशन है, जो मंदिर से करीब 25 किलोमीटर दूर है। आपको बता दें कि अहमदाबाद और मेहसाणा से टैक्सी और बस की सुविधा आसानी से मिल जाती है।
घूमने का सबसे अच्छा समय
अक्टूबर से मार्च के बीच का समय मोढेरा घूमने के लिए सबसे बेहतर माना जाता है। जनवरी में आयोजित होने वाला मोढेरा डांस फेस्टिवल भी पर्यटकों के बीच काफी लोकप्रिय है।
डिसक्लेमर- यह लेख धार्मिक मान्यताओं, पौराणिक कथाओं और उपलब्ध ऐतिहासिक जानकारी पर आधारित है। मंदिर से जुड़ी मान्यताओं पर आस्था व्यक्ति विशेष की हो सकती है। यात्रा से पहले स्थानीय प्रशासन या आधिकारिक स्रोतों से समय और व्यवस्थाओं की जानकारी अवश्य प्राप्त करें।
