Masik Shivaratri 2018: मासिक शिवरात्रि आज, जानिए क्या है महत्व और व्रत विधि

Masik Shivaratri 2018: हर महीने आने वाले इस पर्व को इस व्रत को महिला और पुरुष दोनों कर सकते है। श्रद्धालुओं को शिवरात्रि की रात को जाग कर शिव जी की पूजा करनी चाहिए।

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Masik Shivratri 2018: 5 दिसंबर को मासिक शिवरात्रि है।

Masik Shivaratri 2018: हिंदू पंचाग के अनुसार हर माह कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी यानी 14वें दिन मासिक शिवरात्रि मनाई जाती है। मासिक त्योहारों में शिवरात्रि का व्रत और पूजन का महत्व माना जाता है। 5 दिसंबर को मासिक शिवरात्रि है। शिवरात्रि के दिन व्रत करने का प्रचलन प्राचीन काल से माना जाता है। हिंदू पुराणों में शिव रात्रि के व्रत का महत्व बताया गया है। शास्त्रों के अनुसार देवी लक्ष्मी, इंद्राणी, सरस्वती, गायत्री, सावित्री, सीता, पार्वती ने भी शिवरात्रि का व्रत करके भगवान शिव का पूजन किया था। भगवान शिव के पूजन के लिए उचित समय प्रदोष काल में होता है। ऐसा माना जाता है कि शिव की अराधना दिन और रात्रि के मिलने के दौरान करना ही शुभ होता है। शिवरात्रि भगवान शिव और शक्ति के अभिसरण का पर्व माना जाता है। आइए जानते हैं मासिक शिवरात्रि का महत्व और पूजन विधि।

मासिक शिवरात्रि का महत्व: हिन्दू धर्म में मासिक शिवरात्रि का अपना अलग ही महत्व है। शिव के भक्त जहां साल में एक बार महाशिवरात्रि बड़ी ही धूमधाम से मनाते हैं। मासिक शिवरात्रि पर भी भोलेनाथ की आराधना करने की परंपरा हैं। शिव पुराण के अनुसार इस दिन व्रत और भगवान शिव की आराधना करने से मनोमनाएं पूरी होती हैं। इस दिन व्रत करने से मुश्किलें दूर होने लगती हैं। कहा जाता है कि कुंवारी कन्याएं मनचाहा वर पाने के लिए यह व्रत करती हैं। इससे विवाह में आ रही रुकावटें भी दूर होती हैं।

मासिक शिवरात्रि व्रत विधि: हर महीने आने वाले इस पर्व को इस व्रत को महिला और पुरुष दोनों कर सकते है। श्रद्धालुओं को शिवरात्रि की रात को जाग कर शिव जी की पूजा करनी चाहिए। मासिक शिवरात्रि वाले दिन आप सूर्योदय से पहले उठकर स्नान आदि के बाद किसी मंदिर में जा कर भगवान शिव और उनके परिवार (पार्वती, गणेश, कार्तिक, नंदी) की पूजा करें। पूजा के दौरान शिवलिंग का रुद्राभिषेक जल, शुद्ध घी, दूध, शक़्कर, शहद, दही आदि से करें। शिवलिंग पर बेलपत्र, धतूरा और श्रीफल चढ़ाएं। अब आप भगवान शिव की धुप, दीप, फल और फूल आदि से पूजा करें। शिव पूजा करते समय आप शिव पुराण, शिव स्तुति, शिव अष्टक, शिव चालीसा और शिव श्लोक का पाठ करें। इसके बाद शाम के समय फल खा सकते हैं लेकिन व्रती को अन्न ग्रहण नहीं करना चाहिए। अगले दिन भगवान शिव की पूजा करें और दान आदि करने के बाद अपना व्रत खोलें। कहा जाता है कि मासिक शिवरात्रि के दिन शिव पार्वती की पूजा व्यक्ति को हर तरह के कर्जों से मुक्ति दिलाती है।

मासिक शिवरात्रि शुभ मुहूर्त

– सोमवार, 15 जनवरी – 24:03 से 24:57 तक
– मंगलवार, 13 फरवरी – 24:09 से 25:01 तक
– गुरुवार, 15 मार्च – 24:05 से 24:53 तक
– शनिवार, 14 अप्रैल – 23:58 से 24:43 तक
– रविवार, 13 मई – 23:56 से 24:38 तक
– मंगलवार, 12 जून – 24:00 से 24:41 तक
– बुधवार, 11 जुलाई – 24:06 से 24:47 तक
– गुरुवार, 09 अगस्त – 24:05 से 24:48 तक
– शनिवार, 08 सितंबर – 23:55 से 24:42 तक
– रविवार, 07 अक्टूबर – 23:44 से 24:33 तक
– सोमवार, 05 नवंबर – 23:46 से 24:31 तक
– बुधवार, 05 दिसंबर – 23:44 से 24:39 तक

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