Shri Rudrashtakam Stotram: हिंदू धर्म में भगवान शिव की आराधना के लिए मासिक शिवरात्रि का दिन बहुत पवित्र माना जाता है। इस दिन भक्त व्रत रखते हैं और भोलेनाथ को प्रसन्न करने के लिए अलग-अलग मंत्रों और स्तोत्रों का पाठ करते हैं। इन्हीं में श्री रुद्राष्टकम स्तोत्र का विशेष महत्व बताया गया है। मान्यता है कि मासिक शिवरात्रि के दिन श्रद्धा और भक्ति के साथ रुद्राष्टकम का पाठ करने से भगवान महादेव जल्दी प्रसन्न होते हैं और भक्तों के कष्ट दूर करते हैं। कहा जाता है कि इस स्तोत्र का नियमित पाठ करने से मन को शांति मिलती है, नकारात्मकता दूर होती है और जीवन में सुख-समृद्धि बढ़ती है। इसलिए मासिक शिवरात्रि व्रत के दिन शिव पूजा के साथ श्री रुद्राष्टकम स्तोत्र का पाठ करना बेहद शुभ माना जाता है।
शिव रुद्राष्टकम पाठ (Shri Rudrashtakam Stotram)
नमामीशमीशान निर्वाणरूपं
विभुं व्यापकं ब्रह्मवेदस्वरूपम्
निजं निर्गुणं निर्विकल्पं निरीहं
चिदाकाशमाकाशवासं भजेहम्
निराकारमोङ्करमूलं तुरीयं
गिराज्ञानगोतीतमीशं गिरीशम् ।
करालं महाकालकालं कृपालं
गुणागारसंसारपारं नतोहम्
तुषाराद्रिसंकाशगौरं गभिरं
मनोभूतकोटिप्रभाश्री शरीरम् ।
स्फुरन्मौलिकल्लोलिनी चारुगङ्गा
लसद्भालबालेन्दु कण्ठे भुजङ्गा
चलत्कुण्डलं भ्रूसुनेत्रं विशालं
प्रसन्नाननं नीलकण्ठं दयालम् ।
मृगाधीशचर्माम्बरं मुण्डमालं
प्रियं शङ्करं सर्वनाथं भजामि
प्रचण्डं प्रकृष्टं प्रगल्भं परेशं
अखण्डं अजं भानुकोटिप्रकाशं ।
त्र्यःशूलनिर्मूलनं शूलपाणिं
भजेहं भवानीपतिं भावगम्यम्
कलातीतकल्याण कल्पान्तकारी
सदा सज्जनानन्ददाता पुरारी ।
चिदानन्दसंदोह मोहापहारी
प्रसीद प्रसीद प्रभो मन्मथारी
न यावद् उमानाथपादारविन्दं
भजन्तीह लोके परे वा नराणाम् ।
न तावत्सुखं शान्ति सन्तापनाशं
प्रसीद प्रभो सर्वभूताधिवासं
न जानामि योगं जपं नैव पूजां
नतोहं सदा सर्वदा शम्भुतुभ्यम् ।
जराजन्मदुःखौघ तातप्यमानं
प्रभो पाहि आपन्नमामीश शंभो
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