Masik Krishna Janmashtami 2026 Date: द्रिक पंचांग के अनुसार, हर मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मासिक कृष्ण जन्माष्टमी का व्रत रखा जाता है। इस दिन भगवान कृष्ण की विधिवत पूजा करने के साथ व्रत रखने का विधान है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार,इस दिन व्रत रखने और पूजा करने से संतान सुख की प्राप्ति हो सकती है। इसके साथ ही सुख-समृद्धि, धन-संपदा की प्राप्ति हो सकती है। ऐसे ही वैशाख मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मासिक कृष्ण जन्माष्टमी का व्रत रखा जा रहा है। इस बार अष्टमी तिथि दो दिन होने के कारण तिथि को लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई है। आइए जानते हैं वैशाख मास की मासिक कृष्ण जन्माष्टमी की सही तिथि, शुभ मुहूर्त, पूजा विधि, महत्व, मंत्र और श्री कृष्ण जी की आरती…
कब है मासिक कृष्ण जन्माष्टमी का व्रत? (Masik Krishna Janmashtami 2026 Date)
द्रिक पंचांग के अनुसार, वैशाख माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि 9 अप्रैल को रात 9 बजकर 19 मिनट से आरंभ हो रही है, जो अगले दिन यानी 10 अप्रैल को सुबह 11 बजकर 15 मिनट पर समाप्त होगी। इस दिन निशिता काल में पूजा की जाती है। ऐसे में मासिक कृष्ण जन्माष्टमी 9 अप्रैल 2026, दिन गुरुवार को मनाई जाएगी।
मासिक कृष्ण जन्माष्टमी का शुभ मुहूर्त (Masik Krishna Janmashtami 2026 Muhurat)
ब्रह्म मुहूर्त- सुबह 4 बजकर 38 मिनट से लेकर सुबह 5 बजकर 26 मिनट तक
अमृत काल- सुबह 6 बजकर 7 मिनट से लेकर सुबह 7 बजकर 54 मिनट
अभिजीत मुहूर्त- दोपहर 12 बजकर 3 मिनट से लेकर दोपहर 12 बजकर 53 मिनट तक
हर मास क्यों मनाते हैं मासिक कृष्ण जन्माष्टमी?
बता दें कि भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को कान्हा का जन्म हुआ था। इसी के कारण देशभर में इस दिन को श्री कृष्ण जन्माष्टमी के रूप में मनाते हैं। लेकिन इसके अलावा हर माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को भी कृष्ण जन्माष्टमी मनाई जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, श्री कृष्ण के जन्म की याद करने से लेकर अपने प्रभु से जुड़े रहने के कारण मासिक कृष्ण जन्माष्टमी का पर्व मनाया जाता है। मासिक जन्माष्टमी के दिन पूजा करने से भक्त हर महीने अपनी भक्ति से कृष्ण की कृपा प्राप्त कर सकता है।
मासिक कृष्ण जन्माष्टमी 2026 का महत्व (Masik Krishna Janmashtami 2026 Significance)
मासिक कृष्ण जन्माष्टमी का हिंदू धर्म में विशेष महत्व है। इस दिन को भक्त प्रेम, भक्ति, सत्य और धर्म के प्रतीक के रूप में मानते हैं। श्री कृष्ण का जीवन हमें सही और गलत का अंतर समझाता है और धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है। इस दिन उनकी उपासना करने से व्यक्ति के जीवन में शांति और समृद्धि आती है। मानसिक या शारीरिक कष्ट झेल रहे लोग भगवान की भक्ति से मुक्ति पा सकते हैं, क्योंकि उनकी पूजा से सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और जीवन में संतुलन और आशा बनी रहती है।
मासिक कृष्ण जन्माष्टमी का मुख्य उद्देश्य केवल उनके जन्म का उत्सव मनाना नहीं, बल्कि उनके जीवन के आदर्शों को अपनाना है। भगवान कृष्ण ने हमें धर्म, सत्य, कर्म और भक्ति का महत्व सिखाया। इस दिन भक्त उनके उपदेशों को अपने जीवन में उतारने का संकल्प लेते हैं।
श्री कृष्ण के शक्तिशाली मंत्र
मूल मंत्र:ॐ कृष्णाय वासुदेवाय हरये परमात्मने। प्रणत: क्लेशनाशाय गोविंदाय नमो नम:॥
महामंत्र (हरे कृष्ण मंत्र):हरे कृष्ण हरे कृष्ण, कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम, राम राम हरे हरे॥
बीज मंत्र:ॐ क्लीं कृष्णाय नमः
अन्य मंत्र: ॐ नमो भगवते वासुदेवाय, श्री कृष्ण शरणं ममः
मासिक कृष्ण जन्माष्टमी पर करें कृष्ण जी की आरती (Shri Krishna Aarti Lyrics)
आरती कुंजबिहारी की,श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की।
गले में बैजंती माला,बजावै मुरली मधुर बाला।
श्रवण में कुण्डल झलकाला,नंद के आनंद नंदलाला।
गगन सम अंग कांति काली,राधिका चमक रही आली।
लतन में ठाढ़े बनमाली;भ्रमर सी अलक, कस्तूरी तिलक,
चन्द्र सी झलक;ललित छवि श्यामा प्यारी की॥
श्री गिरिधर कृष्णमुरारी की॥
आरती कुंजबिहारी की
श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की॥
कनकमय मोर मुकुट बिलसै,देवता दरसन को तरसैं।
गगन सों सुमन रासि बरसै;बजे मुरचंग, मधुर मिरदंग,
ग्वालिन संग;अतुल रति गोप कुमारी की॥
श्री गिरिधर कृष्णमुरारी की॥
आरती कुंजबिहारी की
श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की॥
जहां ते प्रकट भई गंगा,कलुष कलि हारिणि श्रीगंगा।
स्मरन ते होत मोह भंगा;बसी सिव सीस, जटा के बीच,
हरै अघ कीच;चरन छवि श्रीबनवारी की॥
श्री गिरिधर कृष्णमुरारी की॥
आरती कुंजबिहारी की
श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की॥
चमकती उज्ज्वल तट रेनू,बज रही वृंदावन बेनू।
चहुं दिसि गोपि ग्वाल धेनू;हंसत मृदु मंद,चांदनी चंद,
कटत भव फंद;टेर सुन दीन भिखारी की॥
श्री गिरिधर कृष्णमुरारी की॥
आरती कुंजबिहारी की
श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की॥ x2
आरती कुंजबिहारी की,श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की॥
आरती कुंजबिहारी की,श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की॥
आरती कुंजबिहारी की, श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की॥
डिस्क्लेमर: इस लेख में दी गई तिथि, शुभ मुहूर्त और धार्मिक महत्व की जानकारी सामान्य मान्यताओं, पंचांग और धार्मिक ग्रंथों पर आधारित है। मासिक कृष्ण जन्माष्टमी का समय और विधि अलग-अलग क्षेत्रों या परंपराओं में भिन्न हो सकती है। जनसत्ता इसकी पूर्ण सत्यता या सटीक परिणामों का कोई दावा नहीं करता है। किसी भी त्योहार की तिथि या पूजा विधि के बारे में अंतिम निर्णय लेने से पहले अपने क्षेत्र के विद्वान ज्योतिषी या पुरोहित से परामर्श अवश्य लें।
