Masik Durgashtami 2018 Puja Vidhi: Lord Shiva, Lord Vishnu And Brahma Gave Birth To Mata Durga On Ashtami - मासिक दुर्गाष्टमी 2018 पूजा विधि: जानें क्या है मां दुर्गा व्रत की कथा, दुखों का करती है देवी अंत - Jansatta
ताज़ा खबर
 

मासिक दुर्गाष्टमी 2018 पूजा विधि: जानें क्या है मां दुर्गा व्रत की कथा, दुखों का करती है देवी अंत

मासिक दुर्गाष्टमी के दिन माता का पसंदीदा गुलाबी फूल, केला, नारियल, पान के पत्ते, लौंग, इलायची, सूखे मेवे आदि को प्रसाद के रुप में माता को अर्पित किया जाता है।

दुर्गा अष्टमी के दिन माता दुर्गा के हथियारों की पूजा की जाती है।

हिंदू मान्यताओं के अनुसार मासिक दुर्गाष्टमी के लिए माना जाता है कि दुर्गम नास के क्रूर राक्षस ने अपनी क्रूरता से तीनों लोकों पर अत्याचार किया हुआ था। उसके आतंक के कारण सभी देवता स्वर्ग छोड़कर कैलास चले गए थे। दुर्गम राक्षस को वरदान था कि कोई भी देवता उसका वध नहीं कर सकता था। इस परेशानी को लेकर सभी देवता ने भगवान शिव से विनती कि वो इस परेशानी का हल निकालें। इसके बाद ब्रह्मा, विष्णु और शिव ने अपनी शक्तियों को मिलाकर शुक्ल पक्ष की अष्टमी के दिन देवी दुर्गा को जन्म दिया। इसके बाद माता दुर्गा को सबसे शक्तिशाली हथियार दिया गया और राक्षस दुर्गम के साथ युद्ध छेड़ दिया, जिसमें माता दुर्गा ने राक्षस का वध कर दिया और इसके बाद से दुर्गाष्टमी की उत्पत्ति हुई।

दुर्गा अष्टमी के दिन माता दुर्गा के हथियारों की पूजा करी जाती है। इस दिन व्रत करने वाले लोग सुबह स्नान करके देवी दुर्गा का पूजन करते हैं। माता के पूजन में लाल फूल, लाल चंदन, दीपक, धूप आदि सामाग्री का प्रयोग किया जाता है। मासिक दुर्गाष्टमी के दिन माता के पसंद का गुलाबी फूल, केला, नारियल, पान के पत्ते, लौंग, इलायची, सूखे मेवे आदि को प्रसाद के रुप में माता को अर्पित किया जाता है। इसके साथ माता को पंचामृत दही, दूध, शहद, गाय का घी और चीनी का मिश्रण बनाया जाता है। इसके बाद दीपक जलाकर मंत्रों का जाप किया जाता है।
सर्व मंगलय मांगल्ये, शिवे सर्वाध साधिके,
शिरण्ये त्र्यम्बके गौरी नारायणी नमस्तुते।।

माता दुर्गा के व्रत को कई लोग अन्न-जल ग्रहण किए बिना करते हैं, वहीं कुछ लोग फलों का सेवन करते हैं। माता के व्रत के लिए किसी प्रकार की विशेष विधि नहीं होती है। मान्यता है कि माता अपने भक्तों की परेशानी को हल कर देती हैं, बस उनका पूजन श्रद्धा से करना होता है। इसके साथ कई लोग माता के व्रत में भोगविलासता से दूर रहना उचित मानते हैं।

Hindi News से जुड़े अपडेट और व्‍यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल के साथ गूगल प्लस पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News App