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Mangal Vakri 2020: मंगल मेष राशि में होगा वक्री, जानिए तारीख और समय, ये होता है प्रभाव

Mangal Vakri 2020: ज्योतिष शास्त्र यह कहता है कि जिस जताक की कुंडली में मंगल वक्री होता है, उन्हें डॉक्टर, वैज्ञानिक या किसी रहस्यमय विद्या में रुचि रखने की संभावना प्रबल हो जाती है।

ज्योतिष शास्त्र में मंगल को क्रूर और विशेष ग्रह के तौर पर मान्यता प्राप्त है।

ज्योतिष में मंगल को क्रूर ग्रह के रूप में देखा गया है। परंतु, इसके बावजूद भी मंगल कई स्थितियों में मंगल शुभ फल भी देते हैं। ज्योतिष शास्त्र के मुताबिक मंगल ऊर्जा का कारक होता है। ज्योतिष शास्त्र यह कहता है कि जिस जताक की कुंडली में मंगल वक्री होता है, उन्हें डॉक्टर, वैज्ञानिक या किसी रहस्यमय विद्या में रुचि रखने की संभावना प्रबल हो जाती है। वक्री की अवस्था में मंगल अशुभ प्रभाव के परिणामस्वरूप व्यक्ति को गुस्सा अधिक आता है। जिसकी वजह से व्यक्ति आमतौर पर गलत कार्य करता है। साथ ही अपनी ऊर्जा को गलत कार्यों में लगाता है। इसके अलावा जातक दाम्पत्य सुख से वंचित रह जाता है। वहीं जब कुंडली में मंगल शुभ अवस्था में रहता है तो जातक नौकरी अथवा व्यापार में अचानक उन्नति के रास्ते पर आगे बढ़ता है।

मंगल वक्री तिथि व समय

-मंगल वक्री आरंभ की तिथि- 10 सितंबर (गुरुवार) 2020
-समय- रात्रि 12 बजकर 45 मिनट पर
-मंगल वक्री की समाप्ति- 14 नवंबर (शनिवार) 2020
-समय- रात्रि 02 बजकर 45 मिनट पर

क्या मंगल का का शुभ प्रभाव: ज्योतिष शास्त्र में मंगल को क्रूर और विशेष ग्रह के तौर पर मान्यता प्राप्त है। कुंडली के दसवें भाव में स्थित मंगल अच्छा परिणाम देता है। इस स्थिति में जातक को अपने कार्यक्षेत्र में अपार सफलता मिलती है। साथ जी जातक को खेल में सफलता, किसी जमीन-जायदाद के काम में सफलता मिलती है।

मंगल वक्री का अशुभ प्रभाव: वक्री होकर मंगल जब किसी जातक की कुंडली में मंगल अशुभ अवस्था में होता है तो यह बहुत अधिक क्रोध उत्पन्न करता है। व्यक्ति में आक्रामकता बढ़ जाती है, जिसके प्रभाव से निर्णय लेने के क्षमता कमजोर पड़ जाती है।

मंगल वक्री के प्रभाव से जातक के जीवन में बदलाव आते हैं। यह बदलाव सकारात्मक और नकारात्मक दोनों हो सकता है। अचानक हुए बदलाव के कारण जातक में परेशानी बढ़ जाती है। हालांकि वक्री अवस्था में जब मंगल शुभ होता है तो जातक को ऊंची मुकाम दिलवाता है।

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