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Basant Panchami 2018: हर वर्ष बनता है विवाह के लिए अबूझ मुहूर्त, जानें इस बार क्या हुआ है बदलाव

Basant Panchami 2018 Marriage Muhurat: इस वर्ष हिंदू पंचाग के अनुसार 13 जनवरी के बाद गुरु ग्रह के अस्त होने के कारण विवाह योग का मुहूर्त नहीं है। ऐसा वर्षों के बाद हो रहा है। इसी के साथ कई लोग देवताओं के यहां से पाति लाकर विवाह के आयोजन कर रहे हैं।

तस्वीर का इस्तेमाल प्रतीकात्मक तौर पर किया गया है।

बसंत पंचमी 2018: हिंदू पंचाग के अनुसार हर वर्ष माघ माह की शुक्ल पक्ष पंचमी को मनाया जाने वाला पर्व पंचमी के नाम से प्रसिद्ध है। इस दिन माता सरस्वती का पूजन किया जाता है। इसी उपासना के दिन को बसंत पंचमी कहा जाता है। इस दिन संगीत कला और आध्यात्म का आशीर्वाद भी लिया जा सकता है। इस दिन से वसंत ऋतु की शुरुआत मानी जाती है। वसंत को सभी ऋतुओं में राजा माना जाता है और ये पावन पर्व पर उल्लास के साथ सांस्कृतिक कार्यक्रम भी किए जाते हैं। इसी के साथ बसंत पंचमी का दिन अबूझ मुहूर्त माना जाता है। इश दिन वैवाहिक संबंधों में बंधने वाले वर-वधु का दांपत्य जीवन सुखद रहता है और संतान सुख भी श्रेष्ठ प्राप्त होता है।

इस वर्ष हिंदू पंचाग के अनुसार 13 जनवरी के बाद गुरु ग्रह के अस्त होने के कारण विवाह योग का मुहूर्त नहीं है। ऐसा वर्षों के बाद हो रहा है। इसी के साथ कई लोग देवताओं के यहां से पाति लाकर विवाह के आयोजन कर रहे हैं। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार बताया जा रहा है कि गुरु विवाह के लिए काफी महत्वपूर्ण होता है। गुरु देवताओं का स्वामी है और जब देवताओं का गुरु ही उपस्थित नहीं हो तो मांगलिक कार्य संभव नहीं होते हैं। ज्योतिषों द्वारा माना जाता है कि गुरु मकर राशि में 12 वर्ष में एक बार आता है। हिंदू धर्म में देवताओं का आशीर्वाद लेने के बाद ही मांगलिक कार्य किए जाते हैं।

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शुक्र ग्रह को असुरों का स्वामी कहा जाता है। इसी के साथ ज्योतिष विद्या के अनुसार माना जाता है कि शुक्र संतान की उत्पत्ति में सहायता करता है। जब दोनों ग्रह शुभ स्थिति में होते हैं तभी विवाह के योग बनते हैं लेकिन जब दोनों में से एक भी ग्रह अस्त हो तो विवाह के लिए शुभ योग नहीं होते हैं। वर्तमान में शुक्र तो उदय स्थिति में है लेकिन गुरु अस्त हैं। इसी कारण से वर्ष बसंत पंचमी पर अबूझ विवाह मुहूर्त नहीं बन रहा है। हर वर्ष बसंत पंचमी के दिन अबूझ मुहूर्त होने के कारण कई जगहों पर सामूहिक विवाह और अन्य शुभ या मांगलिक कार्यों का आयोजन किया जाता है। कई व्यापारी दुकानों की स्थापना करते हैं। गृह प्रवेश के लिए भी ये दिन शुभ माना जाता है। भूमि पूजन करना भी कई स्थानों पर शुभ होता है।

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