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Marriage Muhurat 2020-2021: आज से अगले चार महीने तक नहीं होंगी शादियां, जानिए अब कब बजेगी शहनाई

Marriage Dates In November And December: देवशयनी एकादशी के बाद विवाह मुहूर्त 25 नवंबर के बाद से शुरू होंगे। क्योंकि इस दिन भगवान विष्णु का शयनकाल समाप्त हो जाएगा। 25 नवंबर से 15 दिसंबर तक के बीच में कुल 8 विवाह मुहूर्त रहेंगे। 15 दिसंबर से खरमास लग जाएगा।

marriage dates in 2020, marriage dates in 2021, marriage dates in November, wedding dates in 2021,Marriage Muhurat In 2021: वैसे तो शादी ब्याह के मुहूर्त जनवरी से प्रारंभ हो जाते हैं। लेकिन साल 2021 में मांगलिक कार्यों को करने के लिए अप्रैल तक का इंतजार करना पड़ेगा।

Wedding Dates In 2020-2021: सनातन धर्मावलंबियों के लिए शादी-ब्याह के शुभ मुहूर्त चातुर्मास लगते ही बंद हो जाते हैं। 1 जुलाई को देवशयनी एकादशी से चातुर्मास लग गया है जिसकी समाप्ति 25 नवंबर को होगी। चातुर्मास उन चार महीनों की अवधि को कहा जाता है जिस दौरान भगवान विष्णु योग निद्रा में रहते हैं। लेकिन इस बार अधिक मास लगने के कारण ये अवधि बढ़कर 5 महीनों की हो गई है। जिस कारण अब अगले 5 महीनों तक शादी ब्याह जैसे मांगलिक कार्यों के शुभ मुहूर्त नहीं हैं।

साल 2020 में बचें हैं सिर्फ 12 शुभ मुहूर्त: देवशयनी एकादशी के बाद विवाह मुहूर्त 25 नवंबर के बाद से शुरू होंगे। क्योंकि इस दिन भगवान विष्णु का शयनकाल समाप्त हो जाएगा। 25 नवंबर से 15 दिसंबर तक के बीच में कुल 8 विवाह मुहूर्त रहेंगे। 15 दिसंबर से खरमास लग जाएगा।
नवंबर में विवाह मुहूर्त- 25 और 30
दिसंबर में विवाह मुहूर्त- 1, 2, 7, 8, 9, 11

2021 में अप्रैल से होगी शुभ मुहूर्तों की शुरुआत: वैसे तो शादी ब्याह के मुहूर्त जनवरी से प्रारंभ हो जाते हैं। लेकिन साल 2021 में मांगलिक कार्यों को करने के लिए अप्रैल तक का इंतजार करना पड़ेगा। जनवरी से मार्च तक गुरु व शुक्र ग्रह के अस्त रहने पर मुहूर्त नहीं रहेंगे। हालांकि 16 फरवरी को वसंत पंचमी पर अबूझ मुहूर्त वाला दिन होने के कारण इस दिन विवाह किया जा सकता है। 22 अप्रैल 2021 से दिसंबर 2021 तक करीब 46 विवाह मुहूर्त रहेंगे।

अप्रैल- 22, 24, 25, 26, 27, 28, 29, 30
मई- 1, 2, 7, 8, 9, 13, 14, 21, 22, 23, 24, 26, 28, 29, 30
जून- 3, 4, 5, 16, 19, 20, 22, 23, 24
जुलाई- 1, 2, 7, 13, 15
नवंबर- 15, 16, 20, 21, 28, 29, 30
दिसंबर- 1, 2, 7, 11, 13

क्या होता है चातुर्मास- मान्यता है कि चातुर्मास का आरंभ होते ही भगवान विष्णु धरती की कमान भगवान शिव को दे देते हैं। इसलिए इन चार महीनों में भगवान शिव की उपासना का विशेष महत्व होता है। चार्तुमास में अनुशासित जीवन शैली का पालन करना चाहिए। इन दिनों में किसी भी प्रकार का शुभ कार्य नहीं किये जाते। लेकिन जप तप के कामों के लिए ये समय महत्वपूर्ण माना गया है। पंचांग के अनुसार भगवान विष्णु कार्तिक मास की एकादशी पर जाग्रत अवस्था में आते हैं। उस समय सूर्य देव तुला राशि में प्रवेश करते हैं। जब भगवान विष्णु का शयन काल समाप्त होता है तो उसे देवोत्थानी एकादशी कहते हैं।

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