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मार्गशीर्ष पूर्णिमा 2017: जानिए क्या है इस दिन का महत्व, किस विधि से पूजा करने से भगवान विष्णु होंगे प्रसन्न

इस वर्ष मार्गशीर्ष पूर्णिमा 3 दिसंबर 2017 को है, इसके साथ ही जो लोग चंद्र देव के लिए व्रत रखते हैं वो 2 दिसंबर को कर सकते हैं।

इस दिन चंद्र देव की पूजा करने से चंद्र ग्रह के दोषों से मुक्ति मिलती है।

मार्गशीर्ष माह को पवित्र माह माना जाता है। कार्तिक माह की तरह ही इस माह की महत्वता होती है। इस दिन के लिए मान्यता है कि सनातन धर्म के अनुसार सतयुग काल का प्रारंभ देवताओं ने मार्गशीर्ष माह की पहली तिथि को किया था। पुराणों के अनुसार मार्गशीर्ष माह में नदी-स्नान के लिए तुलसी जड़ की मिट्टी और तुलसी के पत्ते का प्रयोग की मान्यता है। माना जाता है कि मार्गशीर्ष माह की पूर्णिमा का उल्लेख सभी पौराणिक ग्रंथो में मिलता है। इस दिन दान करने से कई गुणा फल की प्राप्ति होती है। इसके साथ ही इस पूर्णिमा को बत्तीसी पूर्णिमा भी कहा जाता है।

मार्गशीर्ष माह की पूर्णिमा के दिन व्रत किया जाता है और भगवान सत्यानारायण की पूजा की जाती है। इस दिन भगवान सत्यनारायण की कथा सुनना और पढ़ना शुभ माना गया है। भगवान नारायण की पूजा धूप, दीप, अगरबत्ती से पूजा की जाती है। भगवान विष्णु का प्रिय भोग चूरमा होता है, इस दिन विष्णु जी को भोग लगाया जाता है। इस दिन पूजा के बाद प्रसाद का वितरण किया जाता है। इस दिन लोग ब्रह्मणों को दान-दक्षिणा देते हैं। माना जाता है इस दिन जो व्रत करता है उसकी सभी मनोकामनाएं भगवान विष्णु पूरी करते हैं।

इस वर्ष मार्गशीर्ष पूर्णिमा 3 दिसंबर 2017 को है, इसके साथ ही जो लोग चंद्र देव के लिए व्रत रखते हैं वो 2 दिसंबर को कर सकते हैं। पौराणिक मान्यता के अनुसार पूर्णिमा के दिन चंद्रमा को अमृत से सिंचित किया गया था। माना जाता है कि इस दिन चंद्र देव की पूजा करने से चंद्र ग्रह के दोषों से मुक्ति मिलती है। इस दिन चंद्र ग्रह के क्रूर प्रभाव से बचने के लिए कन्या और परिवार की सभी स्त्रियों को वस्त्र देने चाहिए।

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