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मार्गशीर्ष अमावस्या 2017: कब है अगहन अमावस्या, जानिए क्या है इस अमावस्या का महत्व

शास्त्रों के अनुसार मान्यता है कि व्यक्ति को देवों से पहले पितरों को प्रसन्न करना चाहिए।

हिंदू धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मार्गशीर्ष माह की धार्मिक मान्यता मानी गई है।

हिंदू पंचाग के अनुसार मार्गशीर्ष अमावस्या मार्गशीर्ष अमावस्या में आती है, इसे अगहन अमावस्या के नाम से जाना जाता है। इस अमावस्या का महत्व कार्तिक माह की अमावस्या से कम नहीं माना जाता है। इस दिन देवी लक्ष्मी के पूजन का विधान होता है। इसके साथ ही गंगा स्नान, दान आदि धार्मिक कार्य आदि किए जाते हैं। मार्गशीर्ष अमावस्या के दिन पितरों को प्रसन्न करने के लिए विशेष पूजा का विधान माना गया है और इसे पूर्वजों का दिन माना जाता है। हिंदू धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मार्गशीर्ष माह की धार्मिक मान्यता मानी गई है। ये माह भगवान कृष्ण की भक्ति के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। इस दिन पितृ दोष शांत करने के लिए भी पूजन और व्रत किया जाता है।

शास्त्रों के अनुसार मान्यता है कि व्यक्ति को देवों से पहले पितरों को प्रसन्न करना चाहिए। जिन लोगों की कुंडली में पितृ दोष विराजमान होता है या संतानहीन का योग बन रहा होता है तो उन लोगों को अवश्य ही इस दिन उपवास करना चाहिए। विष्णुपुराण के अनुसार इस अमावस्या को व्रत करने से सिर्फ पितृ तृप्त नहीं होते बल्कि ब्रह्मा, इंद्र, रुद्र, सूर्य, अग्नि, पशु-पक्षी और सभी भूत-प्रेत भी तृप्त होकर प्रसन्न होते हैं। इस माह में गंगा स्नान का भी विशेष महत्व माना जाता है। इस दिन व्रत के साथ श्री सत्यनारायण भगवान की पूजा और कथा का पाठ किया जाना शुभ माना जाता है।

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मार्गशीर्ष अमावस्या जिसे अगहन अमावस्या कहा जाता है वो कृष्ण पक्ष की अंतिम तिथि को होती है। इस वर्ष अंग्रेजी कैलेंडर के अनुसार अमावस्या 18 नवंबर को शनिवार के दिन है। वैसे अमावस्या की तिथि का आरंभ 17 नवंबर शाम 3 बजकर 29 मिनट से शुरु हो जाएगा और तिथि समाप्त 18 नवंबर शाम 5 बजकर 11 मिनट पर होगी।

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