Pradosh Vrat March 2026: वैदिक ज्योतिष अनुसार एक महीने में 2 प्रदोष पड़ते हैं। प्रदोष व्रत शुक्ल और कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि पर पड़ता हैं, यहां हम बात करने जा रहे हैं मार्च के अंतिम प्रदोष व्रत के बारे में। आपको बता दें कि मार्च 2026 का सोम प्रदोष व्रत इस बार बेहद खास माना जा रहा है, क्योंकि इस दिन शुभ रवि योग का संयोग बन रहा है। यह व्रत भगवान शिव को समर्पित होता है और सोमवार के दिन पड़ने के कारण इसका महत्व और अधिक बढ़ जाता है। शास्त्रों के अनुसार सोम प्रदोष व्रत रखने से व्यक्ति के जीवन में सुख-समृद्धि आती है, विवाह में आ रही बाधाएं दूर होती हैं और मानसिक शांति प्राप्त होती है। आइए जानते हैं प्रदोष व्रत की तिथि और पूजा का शुभ मुहूर्त…

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सोम प्रदोष व्रत तिथि 2026

फ्यूचर पंचांग के अनुसार चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि 30 मार्च को सुबह 7 बजकर 8 मिनट पर आरंभ हो रही है। वहीं इस तिथि का समापन 31 मार्च को सुबह 6 बजकर 56 मिनट पर होगा। ऐसे में प्रदोष व्रत सोमवार 30 मार्च को रखा जाएगा।

सोम प्रदोष व्रत शुभ मुहूर्त 2026

प्रदोष काल: 30 मार्च शाम 06:30 बजे से 08:50 बजे तक है। इस बीच में आप भोलेनाथ की पूजा- अर्चना कर सकते हैं।

मूल मंत्र: “ॐ नमः शिवाय” – यह मंत्र मानसिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा के लिए प्रतिदिन 108 बार जपा जाना चाहिए।
महामृत्युंजय मंत्र: “ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥” – अकाल मृत्यु और बीमारियों से रक्षा के लिए।
रुद्र मंत्र: “ॐ नमो भगवते रुद्राय” – जीवन की सभी बाधाओं को दूर करने और सफलता पाने के लिए।
शिव पंचाक्षर मंत्र: ॐ शिवाय नम:, ॐ हराय नम:, ॐ त्रिनेत्राय नम:, ॐ इन्द्रमुखाय नम:, ॐ श्रीकंठाय नम:।
शिव जी की प्रसन्नता के लिए अन्य मंत्र: “ॐ साम्ब सदाशिवाय नमः” – भगवान शिव और माता पार्वती की संयुक्त आराधना के लिए।

भगवान शिव की आरती

जय शिव ओंकारा ॐ जय शिव ओंकारा ।
ब्रह्मा विष्णु सदा शिव अर्द्धांगी धारा ॥ ॐ जय शिव…॥

एकानन चतुरानन पंचानन राजे ।
हंसानन गरुड़ासन वृषवाहन साजे ॥ ॐ जय शिव…॥

दो भुज चार चतुर्भुज दस भुज अति सोहे।
त्रिगुण रूपनिरखता त्रिभुवन जन मोहे ॥ ॐ जय शिव…॥

अक्षमाला बनमाला रुण्डमाला धारी ।
चंदन मृगमद सोहै भाले शशिधारी ॥ ॐ जय शिव…॥

श्वेताम्बर पीताम्बर बाघम्बर अंगे ।
सनकादिक गरुणादिक भूतादिक संगे ॥ ॐ जय शिव…॥

कर के मध्य कमंडलु चक्र त्रिशूल धर्ता ।
जगकर्ता जगभर्ता जगसंहारकर्ता ॥ ॐ जय शिव…॥

ब्रह्मा विष्णु सदाशिव जानत अविवेका ।
प्रणवाक्षर मध्ये ये तीनों एका ॥ ॐ जय शिव…॥

काशी में विश्वनाथ विराजत नन्दी ब्रह्मचारी ।
नित उठि भोग लगावत महिमा अति भारी ॥ ॐ जय शिव…॥

त्रिगुण शिवजीकी आरती जो कोई नर गावे ।
कहत शिवानन्द स्वामी मनवांछित फल पावे ॥ ॐ जय शिव…॥

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डिसक्लेमर- इस लेख को विभिन्न माध्यमों जैसे ज्योतिषियों, पंचांग, मान्यताओं या फिर धर्मग्रंथों से संग्रहित कर ये जानकारियां आप तक पहुंचाई गई हैं। हमारा उद्देश्य महज सूचना पहुंचाना है। इसके सही और सिद्ध होने की प्रामाणिकता नहीं दे सकते हैं। इसके किसी भी तरह के उपयोग करने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें