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माणिक्य रत्न धारण करने से करियर में तरक्की मिलने की है मान्यता, जानिए किन राशियों को नहीं करता सूट

Ruby Gemstone Benefits: जिनकी कुंडली में सूर्य दूषित है उन्हें ये रत्न पहनने की सलाह दी जाती है। लेकिन अगर ये रत्न सूट न करे तो ये व्यक्ति की बर्बादी का कारण भी बन सकता है। जानिए माणिक्य रत्न किसे और कब करना चाहिए धारण।

इस रत्न को धारण करने से व्यक्ति को प्रशासनिक कार्यों में सफलता हासिल होती है। चेहरे पर एक अलग ही चमक आ जाती है।

Manik Gemstone Benefits: माणिक्य को अंग्रेजी में रुबी (Ruby) कहा जाता है। ये सूर्य ग्रह का रत्न है। इसे धारण करने से जीवन में सफलता की प्राप्ति होती है। ये रत्न सूर्य ग्रह के शुभ प्रभावों को बढ़ाने का काम करता है। इसका रंग गहरा गुलाबी या रक्त के समान लाल होता है। जिनकी कुंडली में सूर्य दूषित है उन्हें ये रत्न पहनने की सलाह दी जाती है। लेकिन अगर ये रत्न सूट न करे तो ये व्यक्ति की बर्बादी का कारण भी बन सकता है। जानिए माणिक्य रत्न किसे और कब करना चाहिए धारण।

रत्न के लाभ: इस रत्न को धारण करने से व्यक्ति को प्रशासनिक कार्यों में सफलता हासिल होती है। चेहरे पर एक अलग ही चमक आ जाती है। इस रत्न के शुभ प्रभाव से नौकरी और व्यापार में तरक्की मिलती है। खासतौर से सरकारी नौकरी से जुड़े जातकों के लिए ये रत्न अत्यंत ही लाभकारी साबित होता है। इस रत्न को पहनने से व्यक्ति का मनोबल बढ़ता है।

किन्हें धारण करना चाहिए ये रत्न: मेष, सिंह और धनु लग्न के जातकों को ये रत्न धारण करना चाहिए। कर्क, वृश्चिक और मीन लग्न वालों के लिए भी ये रत्न अनुकूल रहता है। अगर धन भाव ग्याहरवां भाव, दसवां भाव, नवम भाव, पंचम भाव, एकादश भाव में सूर्य उच्च के स्थित हैं तो भी इस रत्न को धारण किया जा सकता है। रूबी यानी माणिक्य रत्न व्यक्ति को तब ही धारण करने की सलाह दी जाती है जब जातक की कुंडली में सूर्य की स्थिति ठीक न हो। (यह भी पढ़ें- हस्तरेखाशास्त्र: हथेली में मौजूद ये रेखाएं बताती हैं कि आपकी लाइफ में विदेश यात्रा का योग है या नहीं?)

किन्हें धारण नहीं करना चाहिए: कन्या, मकर, मिथुन, तुला और कुंभ लग्न वालों को भूलकर भी इस रत्न को धारण नहीं करना चाहिए। कुंडली में अगर सूर्य नीच का हो तब भी ये रत्न धारण नहीं करना चाहिए। जो लोग शनि से संबंधित व्यापार कर रहे हों उन्हें भी इस रत्न को धारण करने से बचना चाहिए। माणिक को नीलम, हीरा और गोमेद के साथ पहनना नुकसानदायक साबित हो सकता है। हालांकि मोती, पन्ना, मूंगा और पुखराज के साथ आप इसे पहन सकते हैं।

धारण करने की विधि: इस रत्न को तांबे या सोने की अंगूठी में जड़वाकर शुक्ल पक्ष के पहले रविवार को सूर्य उदय के बाद दाएं हाथ की रिंग फिंगर में धारण करना चाहिए। रत्न धारण करने से पहले इसे शहद, मिश्री, गंगाजल व दूध के घोल में डाल दें। इसके बाद सूर्य देव की पूजा करें और “ओम् ह्रां ह्रीं, ह्रौं सः सूर्याय नमः” मंत्र का जप करते हुए अंगूठी धारण कर लें।

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