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Makar Sankranti 2020 Date, Puja Vidhi, Muhuart, Timings: मकर संक्रांति यानी स्नान, दान और पुण्य, शाम तक रहेगा संक्रांति मनाने का मुहूर्त

Makar Sankranti 2020 Date, Puja Vidhi, Snan Shubh Muhurat, Puja Time, Samagri, Mantra: इस दिन खिचड़ी बनाने, खाने और उसका दान करने की भी परंपरा है। इसलिए कई जगहों पर इस पर्व को खिचड़ी (khichdi 2020) भी कहा जाता है। जानिए कैसे मनाएं इस पर्व को क्या है पूजा विधि...

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Makar Sankranti (Khichdi) 2020 Date, Puja Vidhi, Snan Shubh Muhurat, Puja Time, Samagri, Mantra: इस साल मकर संक्रांति 15 जनवरी को मनाई जा रही है। जब जब सूर्य अपनी राशि बदलता है तब तब संक्रांति पर्व मनाया जाता है। लेकिन सूर्य के मकर राशि में गोचर करने का दिन सबसे खास माना गया है। इस दिन लोग पूजा पाठ और स्नान दान करते हैं। इस दिन से सूर्य भगवान उत्तरायण हो जाते हैं। पुराणों अनुसार इस दिन तीर्थ या गंगा में स्नान करने से पुण्य की प्राप्ति होती है। जानिए इस पर्व की पूजा विधि…

मकर संक्रांति की पूजा विधि (Makar Sankranti Puja Vidhi):

– इस दिन सुबह सूर्योदय से पहले उठ जाएं और नहाने के पानी में तिल डालकर स्नान करें।
– संभव हो तो इस दिन किसी पवित्र नदी में जाकर स्नान कर लें इससे पुण्य फल की प्राप्ति की मान्यता है।
– जो लोग इस दिन उपवास रखना चाहते हैं वो व्रत रखने का संकल्प लें और श्रद्धा के अनुसार दान भी जरूर करें।
– सूर्य देव को जल चढ़ाने के लिए एक तांबे के लोटे में जल लेकर उसमें लाल फूल, चंदन, तिल और गुड़ मिला लें और इस जल के मिश्रण को भगवान सूर्य देव को समर्पित कर दें।
– ‘ऊं सूर्याय नम:’ मंत्र का जाप सूर्य को जल चढ़ाते हुए करें।
– इस दिन दान में आटा, दाल, चावल, खिचड़ी और तिल के लड्डू विशेष रूप से बांटे।

मकर संक्रांति मुहूर्त (Makar Sankranti Muhurat):

15 जनवरी को भगवान सूर्य का मकर राशि में गोचर का समय 02:22 ए एम है।
मकर संक्रांति का पुण्य काल सुबह 7 बजकर 15 मिनट से प्रारंभ होकर शाम 5 बजकर 46 मिनट तक है। जिसकी कुल अवधि 10 घण्टे 31 मिनट्स की है।
मकर संक्रान्ति का महा पुण्य काल सुबह 07:15 ए एम से 09:00 ए एम तक रहेगा। इसकी कुल अवधि 01 घण्टा 45 मिनट्स की है।

मकर संक्रांति पर्व से संबंधित सभी जानकारी जानने के लिए बने रहिए हमारे इस ब्लॉग पर…

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Highlights

    11:59 (IST)15 Jan 2020
    मकर संक्रांति के दिन इन कार्यों को करने की होती है मनाही...

    - इस दिन बाल धोने से बचना चाहिए।- बाल न कटवाएं।- दाढ़ी न बनवाएं।- किसी से उधार न लें।- अन्न का अपमान न करें।- इस दिन फसल नहीं काटनी चाहिए।- गाय या भैंस का दूध निकालने जैसा काम नहीं करना चाहिए।- इस दौरान किसी से भी कड़वे बोल न बोलें।- किसी भी वृक्ष को नहीं काटें।- मांस और शराब के सेवन से इस दिन बचना चाहिए।- घर के बड़ों का निरादर न करें।- भिखारी को न भगाएं।- ईश्वर निंदा से बचें।- जानवर-पंछियों को न दुत्कारें।

    11:33 (IST)15 Jan 2020
    प्रयागराज में आज बड़ी संख्या में भक्त स्नान करेंगे...

    तीर्थराज प्रयाग में गंगा, यमुना और सरस्वती के पावन तट पर माघ मेले के दूसरे बड़े स्नान पर्व मकर संक्रांति पर लाखों लोग स्नान करेंगे। इस अवसर पर संक्रांति पर सूर्य देव धनु राशि को छोड़कर मकर राशि में प्रवेश करेंगे। सूर्य के मकर राशि में प्रवेश करने के साथ ही खरमास भी समाप्त हो जायेगा और शुभ कार्यों की शुरूआत होगी।

    10:51 (IST)15 Jan 2020
    सूर्य की अराधना का विशेष पर्व होता है मकर संक्रांति...

    इस दिन सूर्य उत्तरायण होता है। चन्द्र के आधार पर माह के 2 भाग हैं- कृष्ण और शुक्ल पक्ष। इसी तरह सूर्य के आधार पर वर्ष के 2 भाग हैं- उत्तरायन और दक्षिणायन। इस दिन से सूर्य उत्तरायन हो जाता है। उत्तरायन अर्थात उस समय से धरती का उत्तरी गोलार्द्ध सूर्य की ओर मुड़ जाता है, तो उत्तर ही से सूर्य निकलने लगता है। इसे सोम्यायन भी कहते हैं। 6 माह सूर्य उत्तरायन रहता है और 6 माह दक्षिणायन। अत: यह पर्व 'उत्तरायन' के नाम से भी जाना जाता है। मकर संक्रांति से लेकर कर्क संक्रांति के बीच के 6 मास के समयांतराल को उत्तरायन कहते हैं। इस दिन से दिन धीरे-धीरे बड़ा होने लगता है और रातें छोटी।

    10:30 (IST)15 Jan 2020
    इसलिए मकर संक्रांति का दिन माना जाता है खास...

    महाभारत काल में भीष्म पितामह ने अपनी देह त्यागने के लिए मकर संक्रांति का ही चयन किया था। मकर संक्रांति के दिन ही गंगाजी भगीरथ के पीछे-पीछे चलकर कपिल मुनि के आश्रम से होती हुई सागर में जाकर मिली थीं। महाराज भगीरथ ने अपने पूर्वजों के लिए इस दिन तर्पण किया था इसलिए मकर संक्रांति पर गंगासागर में मेला लगता है।इसी दिन सूर्य अपने पुत्र शनि के घर एक महीने के लिए जाते हैं, क्योंकि मकर राशि का स्वामी शनि है। इस दिन भगवान विष्णु ने असुरों का अंत करके युद्ध समाप्ति की घोषणा की थी। उन्होंने सभी असुरों के सिरों को मंदार पर्वत में दबा दिया था। इसलिए यह दिन बुराइयों और नकारात्मकता को खत्म करने का दिन भी माना जाता है।

    10:04 (IST)15 Jan 2020
    संपूर्ण भारत में मनाया जाता है यह पर्व...

    मकर संक्रांति का पर्व ब्रह्मा, विष्णु, महेश, गणेश, आद्यशक्ति और सूर्य की आराधना एवं उपासना का पावन व्रत है। मकर संक्रांति का पर्व पूरे भारत में मनाया जाता है। यह सूर्य आराधना का पर्व है जिसे भारत के प्रांतों में अलग-अलग नाम से जाना जाता है। भारत के अलग-अलग प्रांतों में इस त्योहार को मनाए जाने के ढंग भी अलग हैं, लेकिन इन सभी के पीछे मूल ध्येय सूर्य की आराधना करना है। संक्रांति के आसपास लोहड़ी, पोंगल और बिहू पर्व मनाया जाता है। ये सभी संक्रांति के ही स्थानीय रूप हैं।

    09:45 (IST)15 Jan 2020
    ऐसे मनाया जाता है मकर संक्रांति पर्व...

    मकर संक्रांति के पर्व को श्रद्धा, उल्लास और पंरपरा के अनुसार मनाया जाता है। इसी दिन माघ मास के दूसरे प्रमुख स्नान पर्व पर लाखों श्रद्धालु संगम समेत गंगा-यमुना के विभिन्न घाटों पर आस्था की डुबकी लगाने पहुंचते हैं। घरों में पारंपरिक रूप से खिचड़ी मनाई जाएगी। इसके साथ ही लोग पतंगबाजी का लुत्फ उठाएंगे। इस बार मकर संक्रांति पर शोभन और बुधादित्य योग होने से स्नान, दान का महापुण्य मिलेगा। मान्यता है कि यहां जितने भी दान किए जाते हैं वे अक्षय फल देने वाले होते हैं।

    09:25 (IST)15 Jan 2020
    खिचड़ी पर इन चीजों का दान करने से मिलता है पुण्य...

    खिचड़ी, तिल का दान फलदायी मकर संक्रांति पर खिचड़ी, तिल, गुड़, चावल, नीबू, मूली, उड़द दाल और द्रव्य का दान करना चाहिए। इस दिन सूर्य को आराध्य मानकर पितरों को भी तिल, दान करना पुण्यदायी है।

    06:27 (IST)15 Jan 2020
    आज दिन और रात होंगे बराबर

    मकर संक्रांति खास तौर पर सूर्य की उपासना का दिन है। इसकी वजह ये है कि आज ही के दिन सूर्य मकर राशि में प्रवेश करते हैं। आज दिन और रात दोनों बराबर होंगे, आज के बाद से दिन लंबा और रातें छोटी होंगी।

    22:39 (IST)14 Jan 2020
    उड़द की खिचड़ी है खास पकवान

    मकर संक्रांति के दिन खिचड़ी खाने और उसका दान करने का विशेष महत्व माना जाता है। इस दिन काली उड़द की छिलके वाली दाल की खचड़ी बनाई जाती है। काली उड़द को शनि का तो चावल को चंद्र का प्रतीक माना गया है। मान्यता है कि इस दिन खिचड़ी का दान करने से चंद्र, शनि और सूर्य मजबूत होते हैं।

    21:54 (IST)14 Jan 2020
    ऐसे मनाएं मकर संक्रांति

    तड़के सुबह उठ कर स्नान करें और सूर्य को अर्घ्य दैं। इसके बाद श्रीमदभागवद के एक अध्याय का पाठ या गीता क पाठ करें। नए अन्न, कंबल और घी का दान करें। भोजन में नए अन्न की खिचड़ी बनाएं। भोजन भगवान को समर्पित करके ग्रहण करें।

    21:19 (IST)14 Jan 2020
    स्नान के पश्चात दान का क्या है महत्व

    स्नान दान के इस महापर्व में राशि अनुसार इन चीजों का करें दान... मेष: गुड़।वृषभ: शक्कर।मिथुन: सिंघाड़ा, नारियल।कर्क: दूध और चावल।सिंह: अनार।कन्या: हरे फल।तुला: चावल, खट्टे फल।वृश्चिक: दूध और गुड़।धनु: चना दाल, गुड़।मकर: मूंगफली।कुम्भ: शक्कर, उड़द दाल।मीन: बेसन की मिठाई।

    20:32 (IST)14 Jan 2020
    माघ मास में स्नान का महत्व:

    वैसे तो माघ मास के दौरान देश भर में कई जगहों पर श्रद्धालु आस्था की डुबकी लगाते हैं लेकिन इसका विशेष आयोजन प्रयागराज, उज्जैन, नासिक और हरिद्वार में देखा जाता है। पौष पूर्णिमा से लोग इन तीर्थस्थलों पर जुटना शुरू हो जाते हैं और महाशिवरात्रि तक यहां स्नान चलते हैं। धार्मिक मान्यता है कि इस दौरान पवित्र नदियों में स्नान करने से पुण्य फल और मोक्ष की प्राप्ति होती है। स्नान की सभी तिथियों में से मकर संक्रांति का स्नान और मौनी अमावस्या के दिन के स्नान को विशेष रूप से फलदायी माना गया है।

     
    18:21 (IST)14 Jan 2020
    क्या है मकर संक्रांति 2020 का शुभ मुहूर्त...

    मकर संक्रांति 2020- 15 जनवरीसंक्रांति काल- 07:19 बजे (15 जनवरी)पुण्यकाल-07:19 से 12:31 बजे तकमहापुण्य काल- 07:19 से 09: 03 बजे तकसंक्रांति स्नान- प्रात: काल, 15 जनवरी 2020

    17:49 (IST)14 Jan 2020
    मकर संक्रांति को क्यों कहा जाता है

    पतंग महोत्सव पर्व- यह पर्व 'पतंग महोत्सव' के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन लोग छतों पर खड़े होकर पतंग उड़ाते हैं। हालांकि पतंग उड़ाने के पीछे कुछ घंटे सूर्य के प्रकाश में बिताना मुख्य वजह बताई जाती है। सर्दी के इस मौसम में सूर्य का प्रकाश शरीर के लिए स्वास्थवर्द्धक और त्वचा और हड्डियों के लिए बेहद लाभदायक होता है।

    17:17 (IST)14 Jan 2020
    मकर संक्रांति का मुहूर्त:

    सूर्य जब मकर राशि में गोचर करता है तब मकर संक्रांति पर्व मनाया जाता है। इस बार सूर्य का राशि गोचर 15 जनवरी को हुआ है। मकर संक्रांति के दिन स्नान दान का सबसे शुभ मुहूर्त सुबह 7 बजकर 15 मिनट से 9 बजे कर रहेगा। इसकी कुल अवधि 1 घंटा 45 मिनट की है। वैसे सुबह सवा सात से लेकर शाम 6 बजे तक मकर संक्रांति का मुहूर्त रहेगा।

    16:41 (IST)14 Jan 2020
    मकर संक्रांति पर क्या करें दान, जानिए...

    मकर संक्रांति सूर्य देव की अराधना का पर्व है। इस दिन स्नान दान (Makar Sankranti Snan Time) का विशेष महत्व माना जाता है। तभी तो तीर्थस्थलों पर इस पर्व वाले दिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु स्नान करने के लिए पहुंचते हैं। पिछले कुछ सालों से संक्रांति पर्व 15 तारीख को मनाया जा रहा है। इस बार भी ज्योतिष अनुसार 15 की सुबह ही स्नान दान करने का सबसे शुभ मुहूर्त रहेगा। इस दिन खिचड़ी का दान करना विशेष रूप से फलदायी माना गया है। जानिए राशि अनुसार किन चीजों का किया जा सकता है दान…

    16:39 (IST)14 Jan 2020
    15 जनवरी 2020 पंचांग...

    15 जनवरी 2020 को मकर संक्रांति पर्व मनाया जायेगा। ये एक ऐसा त्योहार है जिसे लगभग पूरे भारत में मनाया जाता है। बस इसके नाम अलग अलग है। उत्तर भारत में इसे मकर संक्रांति, तमिलनाडु में पोंगल, असम में बिहु, कश्मीर घाटी में शिशुर सेंक्रांत, उत्तर प्रदेश और बिहार में खिचड़ी, कर्नाटक में मकर संक्रमण के नाम से जाना जाता है। इसी दिन सूर्य भगवान दक्षिणायन से उत्तरायण होते हैं। जानिए 15 जनवरी के दिन का पूरा पंचांग और अपना राशिफल…

    16:07 (IST)14 Jan 2020
    कल बुधादित्य योग में मनाया जायेगा मकर संक्रांति पर्व...

    सूर्य और बुध की युति से ये योग बनता है। इसके बनने से जातकों को सफलता मिलती है और मान सम्मान में बढ़ोतरी होती है। मकर संक्रांति पर्व में स्नान का काफी महत्व माना गया है। कहा जाता है कि इसी दिन माता गंगा का धरती पर अवतरण हुआ था। 

    15:45 (IST)14 Jan 2020
    हिंदू धर्म के लोगों के लिए क्यों खास है मकर संक्रांति पर्व...

    सूर्य के मकर राशि में प्रवेश के साथ ही सूर्य उत्तरायण होंगे। इसी काल से देवताओं के दिन शुरू हो जायेंगे। सूर्य सिद्धांत के अनुसार कर्क से धनु के सूर्य तक 6 माह देवताओं की रात्रि होती है। मकर से मिथुन के सूर्य तक 6 माह देवताओं के दिन होते हैं। देवताओं के दिन की शुरुआत संक्रांति से माना जाता है। इसलिए यह दिन शुभ कार्यों के लिए सर्वश्रेष्ठ माना जाता है।

    15:45 (IST)14 Jan 2020
    मकर संक्रांति साउथ में पोंगल के रूप में मनाया जाता है...

    तमिलनाडु में इस त्योहार को पोंगल के रूप में चार दिन तक मनाते हैं। प्रथम दिन भोगी-पोंगल, द्वितीय दिन सूर्य-पोंगल, तृतीय दिन मट्टू-पोंगल अथवा केनू-पोंगल और चौथे व अन्तिम दिन कन्या-पोंगल। इस प्रकार पहले दिन कूड़ा करकट इकठ्ठा कर जलाया जाता है। दूसरे दिन लक्ष्मी जी की पूजा की जाती है और तीसरे दिन पशु धन की पूजा की जाती है। पोंगल मनाने के लिये स्नान करके खुले आंगन में मिट्टी के बर्तन में खीर बनायी जाती है, जिसे पोंगल कहते हैं। इसके बाद सूर्य देव को नैवैद्य चढ़ाया जाता है। उसके बाद खीर को प्रसाद के रूप में सभी ग्रहण करते हैं। इस दिन बेटी और जमाई राजा का विशेष रूप से स्वागत किया जाता है।

    15:10 (IST)14 Jan 2020
    मकर संक्रांति का महत्व...

    ऐसी मान्यता है कि इस दिन भगवान भास्कर अपने पुत्र शनि से मिलने स्वयं उसके घर जाते हैं। चूँकि शनिदेव मकर राशि के स्वामी हैं, अत: इस दिन को मकर संक्रान्ति के नाम से जाना जाता है। महाभारत काल में भीष्म पितामह ने अपनी देह त्यागने के लिये मकर संक्रान्ति का ही चयन किया था। मकर संक्रान्ति के दिन ही गंगाजी भगीरथ के पीछे-पीछे चलकर कपिल मुनि के आश्रम से होती हुई सागर में जाकर मिली थीं।

    14:28 (IST)14 Jan 2020
    मकर संक्रांति के विभिन्न नाम...

    छत्तीसगढ़, उड़ीसा, हरियाणा, बिहार, झारखण्ड, आंध्रप्रदेश, दिल्ली, उत्तर प्रदेश, तेलंगाना, कर्नाटक, केरल, मध्यप्रदेश, राजस्थान, सिक्किम, उत्तराखण्ड, बिहार, पश्चिम बंगाल, जम्मू में इस पर्व को मकर संक्रांति के नाम से जाना जाता है। तमिलनाडु में ताइ पोंगल, गुजरात और उत्तराखंड के कई इलाकों में उत्तरायण, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, पंजाब में माघी, असम में बिहु, कश्मीर घाटी में शिशुर सेंक्रात, उत्तर प्रदेश और पश्चिमी बिहार में खिचड़ी, पश्चिम बंगाल में पौष संक्रांति, कर्नाटक में मकर संक्रमण नाम से जाना जाता है।

    13:56 (IST)14 Jan 2020
    मकर संक्रांति के दिन तिल और गुड़ का इस्तेमाल करने के वैज्ञानिक कारण...

    इस दिन गुड़ और तिल का दान किया जाता है। इसका आध्यात्मिक महत्व है और वैज्ञानिक भी। तिल और गुड़ गर्म तासीर के होते हैं। गर्मियों में इनका अधिक सेवन नहीं किया जाता लेकिन शीत में ये बहुत लाभदायक हैं। तिल नेत्र, हड्डियों, रक्त, केश आदि के रोग दूर कर इन्हें दुरुस्त करता है। यह खांसी-जुकाम, बहुमूत्रता जैसे रोगों में भी बहुत लाभदायक है। शीत से होने वाले शक्ति के क्षय को रोक कर शरीर को पुष्ट करता है। गुड़ भी शरीर को गर्म रखता है। यह पाचन और रक्त के लिए बहुत फायदेमंद माना जाता है।

    13:28 (IST)14 Jan 2020
    मकर संक्रांति के दिन सूर्य भगवान की ऐसे करें पूजा...

    मकर संक्रांति के प्रातः काल स्नान करने के बाद सूर्यदेव के सामने जल लेकर संकल्प करें। इसके पश्चात एक वेदी पर लाल कपड़ा बिछाकर चंदन या अक्षतों का अष्ट दल कमल बनाएं। इसके पश्चात उसमें सूर्य की मूर्ति स्थापित कर उनका स्नान कराएं। अब गंध, पुष्प, धूप तथा नैवेद्य से पूजन करें। इसके बाद ओम सूर्याय नमः मंत्र से जाप करें। आदित्य हृदय स्त्रोत का पाठ कर घी, शक्कर तथा मेवा मिले हुए तिलों का हवन करें। इनका दान भी करें।

    12:24 (IST)14 Jan 2020
    स्नान दान का सबसे शुभ मुहूर्त...

    15 जनवरी को सुबह सात बजकर 19 मिनट से दोपहर 12 बजकर 31 मिनट तक का समय ध्यान, पूजा-पाठ, स्नान व दान के लिए श्रेष्ठ रहेगा। ऐसी मान्यता है कि इस पर्व पर किया गया दान सौ गुना बढ़कर प्राप्त होता है। इसी कारण इस पर्व पर दान करने का विशेष महत्व है।

    11:55 (IST)14 Jan 2020
    मकर संक्रांति पर क्या करें दान?

    मकर संक्रांति पर स्नान कर दान करने का काफी महत्व माना गया है। इस दिन लोग पवित्र नदियों में स्नान करते हैं और जरूरतमंदों को दान किया जाता है। जानिए राशि अनुसार किन चीजों का करें दान

    11:29 (IST)14 Jan 2020
    'गर्दभ' पर सवाल होकर आ रही संक्रांति...

    साल 2020 में सूर्य 14 जनवरी की शाम को मकर राशि में प्रवेश कर रहा है। चूंकि संक्रांति का पुण्य स्नान सूर्योदय पर किया जाता है, इसलिए इस बार संक्रांति 15 जनवरी को मनाई जाएगी। 14 जनवरी को संक्रांति 'गर्दभ' पर सवार होकर शाम को आ रही है। संक्रांति का उपवाहन मेष है। संक्रांति गर्दभ पर सवार होकर गुलाबी वस्त्र धारण करके मिठाई का भक्षण करते हुए दक्षिण से पश्चिम दिशा की ओर जाएगी।

    10:49 (IST)14 Jan 2020
    इस वजह से मकर संक्रांति को माना जाता है सबसे शुभ दिन...

    धार्मिक मान्यताओं के अनुसार महाभारत काल में भीष्म पितामह ने अपनी देह त्यागने के लिए मकर संक्रांति के दिन का ही चयन किया था। इसके अलावा मकर संक्रांति के दिन ही गंगाजी भागीरथ के पीछे−पीछे चलकर कपिल मुनि के आश्रम से होकर सागर में जा मिली थीं। साथ ही महाराज भगीरथ ने अपने पूर्वजों के मोक्ष के लिए इस दिन तर्पण किया था। यही वजह है कि मकर संक्रांति के दिन गंगासागर में हर साल मेला लगता है।

    10:24 (IST)14 Jan 2020
    क्या है मकर संक्रांति...

    सूर्य का किसी राशी विशेष पर भ्रमण करना संक्रांति कहलाता है. सूर्य हर माह में राशी का परिवर्तन करता है. वर्ष की बारह संक्रांतियों में से दो संक्रांतियां सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण मानी जाती हैं. मकर संक्रांति और कर्क संक्रांति. सूर्य जब मकर राशी में जाता है तब मकर संक्रांति होती है. मकर संक्रांति से अग्नि तत्त्व  की शुरुआत होती है और कर्क संक्रांति से जल तत्त्व की.

    09:41 (IST)14 Jan 2020
    स्नान दान के इस महापर्व में राशि अनुसार इन चीजों का करें दान...

    मेष: गुड़।वृषभ: शक्कर।मिथुन: सिंघाड़ा, नारियल।कर्क: दूध और चावल।सिंह: अनार।कन्या: हरे फल।तुला: चावल, खट्टे फल।वृश्चिक: दूध और गुड़।धनु: चना दाल, गुड़।मकर: मूंगफली।कुम्भ: शक्कर, उड़द दाल।मीन: बेसन की मिठाई।

    09:27 (IST)14 Jan 2020
    मकर संक्रांति पर खिचड़ी का क्या है महत्व?

    इस दिन खिचड़ी बनाने, खाने और उसका दान करने की भी परंपरा है। इसलिए कई जगहों पर इस पर्व को खिचड़ी भी कहा जाता है। ऐसी मान्यता है कि चावल चंद्रमा का प्रतीक है, काली उड़द शनि का और हरी सब्जियां बुध का, इसलिए इस दिन खिचड़ी बनाने से कुंडली के कमजोर ग्रह मजबूत हो जाते हैं।

     

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