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महावीर जयंती 2018: जानिए कौन थे महावीर और क्यों मनाई जाती है महावीर जयंती

Mahavir Jayanti 2018: महावीर जयंती का महत्व सिर्फ जैनियों के लिए ही नहीं, पूरे देशवासियों के लिए है। यही नहीं, विदेशों में रहने वाले वो भारतीय जो जैन मत को मानने वाले हैं, यह पवित्र दिन बहुत ही हर्षोल्लास के साथ मनाते हैं।

Mahavir Jayanti 2018: भारत में जैन धर्म को मानने वाले लोगों की अच्छी-खासी संख्या है।

महावीर को जैन धर्म का 24वां और अंतिम तीर्थांकर माना जाता है, जिन्होंने इस धर्म के प्रमुख सिद्धांतों का प्रतिपादन करने के साथ ही उन्हें व्यवस्थित रूप दिया। इनके दर्शन के पांच प्रमुख सिद्धान्त हैं – अहिंसा, सत्य, असत्येय, ब्रह्मचर्य और अपरिग्रह। इनमें अहिंसा का स्थान सर्वोपरि है। आगे चल कर जैन धर्म में दो संप्रदाय सामने आए – दिगंबर और श्वेतांबर, लेकिन जहां तक महावीर की मूल शिक्षाओं का सवाल है, दोनों समान रूप से उन्हें मानते हैं। भारत में जैन धर्म को मानने वाले लोगों की अच्छी-खासी संख्या है। जैन धर्म और इसके बाद आने वाले बौद्ध धर्म को लेकर यह एक अंतर है कि जहां जैन धर्म का प्रसार देश के अंदर हुआ, बौद्ध धर्म देश के बाहर भी फला-फूला। पर दोनों धर्म वैदिक धर्म से अलग भाव-भूमि और विचारों को लेकर विकसित हुए। इनमें जन्म से व्यक्ति और व्यक्ति के बीच के अंतर को नहीं स्वीकार किया गया और सबको समान माना गया। यही कारण है कि व्यापक जन समुदाय को इसने आकर्षित किया।

महावीर जयंती हर साल मार्च या अप्रैल महीने में आती है। इस साल 29 मार्च, गुरुवार को महावीर जयंती पड़ रही है। महावीर जयंती जैन धर्मावलंबियों के साथ ही पूरे देश के लोगों द्वारा मनाई जाती है। जैन धर्मावलंबियों के लिए तो यह एक बड़ा उत्सव होता है। इस दिन पूरे देश में राजपत्रित अवकाश होता है। महावीर जयंती के दिन देश भर के जैन मंदिरों और स्थलों को खास तौर पर सजाया जाता है। महावीर की मूर्ति का पारंपरिक तौर पर स्नान कराने के साथ शोभायात्रा निकाली जाती है, जिसमें जैन मत मानने वाले लोगों के अलावा दूसरे समुदाय के लोग भी बड़े पैमाने पर भाग लेते हैं। देश के बड़े जैन मंदिरों की शोभा देखने योग्य होती है। गुजरात, राजस्थान के जैन मंदिरों के साथ कोलकाता के जैन मंदिर और बिहार के पावापुरी स्थित मंदिर में विशेष अभिषेक और शोभायात्रा का आयोजन होता है। जैन धर्मावलंबी इस दिन मंदिरों में विशेष ध्यान और अनुष्ठान के लिए जाते हैं। जैन मुनियों के प्रवचनों का आयोजन होता है। जैन धर्म को मानने वाले महावीर जयंती के दिन गरीबों को अन्न, कपड़े, पैसे और अन्य वस्तुओं का दान करते हैं।

महावीर जयंती का महत्व सिर्फ जैनियों के लिए ही नहीं, पूरे देशवासियों के लिए है। यही नहीं, विदेशों में रहने वाले वो भारतीय जो जैन मत को मानने वाले हैं, यह पवित्र दिन बहुत ही हर्षोल्लास के साथ मनाते हैं। महावीर की शिक्षाओं की उपादेयता सर्वकालिक है और यह पूरी दुनिया के लिए प्रासंगिक एवं ग्राह्य है। दुनिया के तमाम महान लोगों ने इनके विचारों से प्रेरणा ली है। सत्य, अहिंसा, अपरिग्रह ऐसे सिद्धांत हैं जो हमेशा स्वीकार्य रहेंगे और विश्व मानवता को प्रेरणा देते रहेंगे।

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