Mahashivratri 2026 Vrat Niyam: महाशिवरात्रि हिंदू धर्म का बेहद पवित्र और आस्था से जुड़ा पर्व माना जाता है। मान्यता है कि इसी दिन भगवान शिव और माता पार्वती का दिव्य विवाह हुआ था। इसलिए इस दिन किया गया व्रत और पूजा विशेष फल देने वाला माना जाता है। शास्त्रों में बताया गया है कि जो भक्त पूरे विधि-विधान से महाशिवरात्रि का व्रत करता है, उसे वर्षभर की पूजा के समान पुण्य प्राप्त हो सकता है। इसी कारण देश-विदेश में करोड़ों श्रद्धालु इस दिन उपवास रखते हैं, रात्रि जागरण करते हैं और शिव मंत्रों का जाप करते हैं। इस दिन व्रती को सही नियमों का पालन करना बेहद जरूरी माना गया है। अगर व्रत करते समय कुछ महत्वपूर्ण बातें अनदेखी हो जाएं, तो व्रत अधूरा रह सकता है। यहां जानिए महाशिवरात्रि 2026 के व्रत में क्या करना चाहिए और किन चीजों से परहेज करना चाहिए, ताकि व्रत का पूरा पुण्य प्राप्त हो सके।
महाशिवरात्रि व्रत पर क्या करें?
- महाशिवरात्रि का व्रत एक दिन पहले यानी त्रयोदशी तिथि से ही शुरू माना जाता है। इस दिन से ही सात्विक भोजन करना चाहिए।
- इस दिन चार अलग-अलग समय में पूजा करना बहुत शुभ माना गया है। हर पहर में जल, दूध, दही, शहद या घी से अभिषेक किया जाता है।
- शिवजी को बेलपत्र सबसे प्रिय माना जाता है। इसके साथ धतूरा, आक और सफेद फूल चढ़ाना शुभ होता है।
- निशीथ काल यानी मध्य रात्रि तक भजन-कीर्तन और मंत्र जाप करने से विशेष फल मिलता है। “ॐ नमः शिवाय” का जाप अत्यंत प्रभावी माना जाता है।
- विवाहित महिलाएं माता पार्वती को श्रृंगार सामग्री चढ़ाती हैं। मान्यता है इससे वैवाहिक जीवन सुखी रहता है।
- व्रत में फल, दूध, मखाना, साबूदाना आदि खाए जा सकते हैं। शाम को सेंधा नमक वाला सात्विक भोजन भी लिया जा सकता है।
- व्रत वाले दिन सुबह स्नान कर साफ कपड़े पहनें और व्रत का संकल्प लें।
- मान्यता है कि शिवलिंग की आधी परिक्रमा करनी चाहिए।
महाशिवरात्रि के दिन क्या न करें?
- शिव पूजा में हल्दी, सिंदूर, तुलसी, केतकी और कमल अर्पित नहीं किए जाते। इन्हें चढ़ाना अशुभ माना जाता है।
- शिवलिंग पर जल या दूध चढ़ाते समय शंख का उपयोग नहीं करना चाहिए।
- इस दिन साधारण नमक नहीं खाना चाहिए। फलाहार या सेंधा नमक का सेवन करें।
- शिवजी को खट्टे फल चढ़ाना वर्जित माना जाता है। इसकी जगह मिठाई या मिष्ठान चढ़ाएं।
- जलधारा की दिशा (सोमसूत्र) को लांघना अशुभ माना जाता है।
- धार्मिक मान्यता है कि इस दिन काले रंग के वस्त्र नहीं पहनने चाहिए। इसे अशुभ माना जाता है और इससे पूजा का फल कम हो सकता है।
- व्रत केवल भोजन त्यागना नहीं, बल्कि मन और व्यवहार को शुद्ध करना भी है। इसलिए गुस्सा, बहस और अपशब्दों से दूर रहें।
- महाशिवरात्रि का व्रत जागरण और भक्ति का प्रतीक है। इसलिए दिन में सोने की बजाय मंत्र जाप या शिव कथा सुनना अधिक शुभ माना गया है।
- मन को शांत रखें और नकारात्मक विचारों से दूरी बनाएं।
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डिस्क्लेमर: “इस लेख में दी गई जानकारी शिव पुराण और प्रचलित धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है। जनसत्ता इसकी पूर्ण सत्यता और परिणामों की पुष्टि नहीं करता है। किसी भी विधि या उपाय को अपनाने से पहले संबंधित विषय के विशेषज्ञ या ज्योतिषी से परामर्श अवश्य लें।”

