Mahashivratri 2026 Date, Time, Puja Vidhi, Shubh Muhurat, Vrat Katha, Mantra, Upay in Hindi LIVE Updates: महाशिवरात्रि 2026 का पर्व इस बार बेहद खास माना जा रहा है, क्योंकि इस दिन सर्वार्थसिद्धि योग का शुभ संयोग बन रहा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस योग में की गई भगवान शिव की पूजा से हर मनोकामना पूर्ण होती है और जीवन की बाधाएं दूर होती हैं। इस पावन अवसर पर फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को चार पहर में शिव पूजा का विशेष महत्व होता है। भक्त इस दिन व्रत रखकर शिवलिंग पर जल, दूध, बेलपत्र आदि अर्पित करते हैं और मंत्र जाप, आरती व रुद्राभिषेक करते हैं। चारों पहर की पूजा अलग-अलग शुभ मुहूर्त में की जाती है, जिससे पूजा का फल कई गुना बढ़ जाता है। महाशिवरात्रि पर शिव मंत्र, महामृत्युंजय मंत्र और शिव आरती का पाठ करने से नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और सुख-शांति व समृद्धि की प्राप्ति होती है। सर्वार्थसिद्धि योग में की गई साधना को विशेष फलदायी माना गया है।
द्रिक पंचांग के अनुसार, फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि 15 फरवरी 2026, रविवार को पड़ रही है। चतुर्दशी तिथि की शुरुआत 15 फरवरी को शाम 5 बजकर 4 मिनट पर होगी और इसका समापन 16 फरवरी को शाम 5 बजकर 34 मिनट पर होगा। निशिता काल और प्रदोष काल को ध्यान में रखते हुए महाशिवरात्रि का पर्व 15 फरवरी 2026 को मनाया जाएगा। इस दिन शिव भक्त व्रत रखकर भगवान शिव की पूजा-अर्चना करते हैं और रात्रि जागरण कर उनका स्मरण करते हैं।
महाशिवरात्रि 2026 शुभ मुहूर्त (Mahashivratri 2026 Shubh Muhurat)
- ब्रह्म मुहूर्त – सुबह 5:21 बजे से 6:12 बजे तक
- अभिजीत मुहूर्त – दोपहर 12:15 बजे से 12:59 बजे तक
- निशिता काल – 15 फरवरी की रात 12:11 बजे से 1:02 बजे तक
- प्रदोष काल – शाम 6:00 बजे से रात 8:38 बजे तक
Mahashivratri 2026: 500 साल बाद महाशिवरात्रि पर बन रहे 8 दुर्लभ योग, जानिए चार पहर पूजा का शुभ मुहूर्त, मंत्र, आरती और उपाय
महाशिवरात्रि 2026 चार पहर का पूजन मुहूर्त (Maha Shivaratri 2026 Char Prahar Puja Muhurat)
- प्रथम प्रहर – 15 फरवरी, शाम 6:11 से रात 9:23 तक
- द्वितीय प्रहर – रात 9:23 से 12:36 तक
- तृतीय प्रहर – रात 12:36 से सुबह 3:47 तक
- चतुर्थ प्रहर – 16 फरवरी, सुबह 3:47 से 6:59 तक
महाशिवरात्रि पूजा विधि इन हिंदी (Maha Shivratri Puja Vidhi In Hindi)
- महाशिवरात्रि के दिन सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें और साफ-सुथरे वस्त्र पहनें। इस दिन काले कपड़े पहनने से बचना चाहिए। इसके बाद घर के पूजा स्थान पर दीपक जलाएं और व्रत का संकल्प लें।
- भगवान शिव और माता पार्वती की विधि-विधान से पूजा करें। पूजा में बेलपत्र, धतूरा, भांग, फल, फूल, चंदन, रोली और अक्षत अर्पित करें। यदि संभव हो तो मंदिर जाकर शिवलिंग पर जल, दूध और बेलपत्र चढ़ाएं।
- दिन भर व्रत रखें और समय-समय पर भगवान शिव का ध्यान करते रहें। “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का जाप करना अत्यंत फलदायी माना जाता है। दिन में रुद्राभिषेक कराना भी शुभ होता है। यदि यह संभव न हो तो शाम को स्वयं शिवलिंग का अभिषेक करें।
- शाम के समय प्रदोष काल में विशेष पूजा करें। महाशिवरात्रि व्रत कथा सुनें और अंत में कपूर से भगवान शिव की आरती करें। भोग लगाकर पूजा संपन्न करें। कई श्रद्धालु इस दिन पूरी रात जागरण भी करते हैं और भजन-कीर्तन करते हैं।
Maha Shivratri 2026 Aarti: ॐ जय शिव ओंकारा, महाशिवरात्रि पर करें भगवान शिव की आरती
कैसे करें व्रत का पारण? जानें सरल विधि (Mahashivratri 2026 Paran)
16 फरवरी की सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ-सुथरे वस्त्र धारण करें। इसके बाद पूजा स्थल को स्वच्छ करें और धूप-दीप जलाकर भगवान शिव की पूजा करें।पूजा के दौरान भगवान शिव को बेलपत्र, भांग, धतूरा, दूध, दही और घी अर्पित करें। शिवलिंग पर जल और दूध से अभिषेक करें। इसके बाद शिव मंत्रों का जाप करें और शिव चालीसा का पाठ करें। भगवान शिव को फल का भोग लगाना भी शुभ माना जाता है। आप केला, सेब, बेर आदि अर्पित कर सकते हैं। पूजा के अंत में शिव जी की आरती करें और उनसे आशीर्वाद मांगें। इसके बाद शुभ मुहूर्त में फलाहार जैसे फल, मखाना, साबुदाना आदि ग्रहण कर व्रत का पारण करें। कोशिश करें कि पारण सात्विक और हल्के भोजन से ही करें।
कब करें महाशिवरात्रि व्रत का पारण? (Mahashivratri 2026 Paran Time)
महाशिवरात्रि व्रत का पारण 16 फरवरी 2026 को किया जाएगा। व्रत का पारण शुभ मुहूर्त में करना बहुत जरूरी माना गया है। आइए जानते हैं पारण के शुभ समय -
पहला शुभ मुहूर्त: 16 फरवरी सुबह 7 बजे से 8 बजकर 33 मिनट तक। ध्यान रखें कि सुबह 8 बजकर 33 मिनट से 9 बजकर 58 मिनट तक राहुकाल रहेगा, इसलिए इस दौरान पारण न करें।
अमृत काल: 16 फरवरी सुबह 9 बजकर 58 मिनट से 11 बजकर 38 मिनट तक अमृत काल रहेगा। यह समय व्रत पारण के लिए अत्यंत शुभ माना गया है।
अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 12 बजकर 30 मिनट से 1 बजकर 16 मिनट तक अभिजीत मुहूर्त रहेगा। इस समय भी व्रत का पारण किया जा सकता है।
विजय मुहूर्त: दोपहर 3 बजकर 48 मिनट से 3 बजकर 34 मिनट तक विजय मुहूर्त बताया गया है। (समय में अंतर होने पर स्थानीय पंचांग अवश्य देखें।) यह समय भी शुभ माना गया है।
माता पार्वती जी की आरती (Mata Parvati Ki Aarti)
जय पार्वती माता जय पार्वती माता
ब्रह्म सनातन देवी शुभ फल कदा दाता।
जय पार्वती माता जय पार्वती माता।अरिकुल पद्मा विनासनी जय सेवक त्राता
जग जीवन जगदम्बा हरिहर गुण गाता।जय पार्वती माता जय पार्वती माता।
सिंह को वाहन साजे कुंडल है साथादेव वधु जहं गावत नृत्य कर ताथा।
जय पार्वती माता जय पार्वती माता।सतयुग शील सुसुन्दर नाम सती कहलाता।
हेमांचल घर जन्मी सखियन रंगराता।जय पार्वती माता जय पार्वती माता।
शुम्भ निशुम्भ विदारे हेमांचल स्यातासहस भुजा तनु धरिके चक्र लियो हाथा।
जय पार्वती माता जय पार्वती माता।सृष्टि रूप तुही जननी शिव संग रंगराता।
नंदी भृंगी बीन लाही सारा मदमाता।जय पार्वती माता जय पार्वती माता।
देवन अरज करत हम चित को लाता।गावत दे दे ताली मन में रंगराता।
जय पार्वती माता जय पार्वती माता।श्री प्रताप आरती मैया की जो कोई गाता।
सदा सुखी रहता सुख संपति पाता।जय पार्वती माता मैया जय पार्वती माता।
शिव जी की आरती (Maha Shivratri 2026 Shiv Ji Ki Aarti)
जय शिव ओंकारा ॐ जय शिव ओंकारा।
ब्रह्मा विष्णु सदा शिव अर्द्धांगी धारा॥ ॐ जय शिव॥
एकानन चतुरानन पंचानन राजे।
हंसानन गरुड़ासन वृषवाहन साजे॥ ॐ जय शिव॥
दो भुज चार चतुर्भुज दस भुज अति सोहे।
त्रिगुण रूपनिरखता त्रिभुवन जन मोहे॥ ॐ जय शिव॥
अक्षमाला बनमाला रुण्डमाला धारी।
चंदन मृगमद सोहै भाले शशिधारी॥ ॐ जय शिव॥
श्वेताम्बर पीताम्बर बाघम्बर अंगे।
सनकादिक गरुणादिक भूतादिक संगे॥ ॐ जय शिव॥
कर के मध्य कमंडलु चक्र त्रिशूल धर्ता।
जगकर्ता जगभर्ता जगसंहारकर्ता॥ ॐ जय शिव॥
ब्रह्मा विष्णु सदाशिव जानत अविवेका।
प्रणवाक्षर मध्ये ये तीनों एका॥ ॐ जय शिव॥
काशी में विश्वनाथ विराजत नन्दी ब्रह्मचारी।
नित उठि भोग लगावत महिमा अति भारी॥ ॐ जय शिव॥
त्रिगुण शिवजी की आरती जो कोई नर गावे।
कहत शिवानन्द स्वामी मनवांछित फल पावे॥ ॐ जय शिव॥
महाशिवरात्रि पर करें इन मंत्रों का जाप (Mahashivratri Mantra)
चंद्र बीज मंत्र- ‘ॐ श्रां श्रीं श्रौं स: चंद्रमसे नम:’चंद्र मूल मंत्र- ‘ॐ चं चंद्रमसे नम:’ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव बन्धनान मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥ॐ तत्पुरुषाय विदमहे, महादेवाय धीमहि तन्नो रुद्र: प्रचोदयात्।ॐ नमः शिवायॐ हौं जूं स:
महाशिवरात्रि का धार्मिक महत्व (Mahashivratri 2026 LIVE)
शिवपुराण में महाशिवरात्रि व्रत की महिमा का विस्तार से वर्णन मिलता है। ग्रंथों के अनुसार, जो भक्त श्रद्धा और भक्ति भाव से महाशिवरात्रि का व्रत रखते हैं और विधि-विधान से भगवान शिव की पूजा करते हैं, उन्हें जीवन में सुख, शांति और समृद्धि की प्राप्ति होती है। माना जाता है कि इस व्रत के प्रभाव से सभी कष्ट और बाधाएं दूर हो जाती हैं तथा अंत में भक्त को शिवलोक की प्राप्ति होती है। इसलिए महाशिवरात्रि के दिन पूरे मनोयोग, सही पूजा विधि और आवश्यक पूजन सामग्री के साथ भोलेनाथ की आराधना करना अत्यंत फलदायी माना गया है।
महाशिवरात्रि 2026 पूजन सामग्री लिस्ट (Mahashivratri Pujan Samagri List)
महाशिवरात्रि या शिव पूजा के लिए आवश्यक पूजन सामग्री में कई वस्तुएं शामिल होती हैं। इनमें बेलपत्र, रक्षा सूत्र, भांग, शिव-पार्वती की प्रतिमा और शिवलिंग, नारियल, सिंदूर, पीली सरसों, भस्म, मिट्टी के दीपक (5 या 11), केसर, लौंग, सुपारी, इलायची शामिल हैं। माता पार्वती के लिए श्रृंगार का सामान और वस्त्र, शिव परिवार सभी के लिए वस्त्र, भगवान शिव के लिए वस्त्र और अंगोछा, जनेऊ, पान के पत्ते, गुलाब जल, भोग के लिए मिठाई और फल, हवन सामग्री भी आवश्यक मानी जाती हैं। शिवलिंग के अभिषेक के लिए गाय का दूध, आम का पल्लव, पीला कपड़ा, अक्षत, जौ, तिल, कुमकुम, शहद और गंगाजल भी पूजन सामग्री में शामिल होते हैं।
महाशिवरात्रि के दिन क्या न करें? (Mahashivratri 2026 LIVE)
शिव पूजा में हल्दी, सिंदूर, तुलसी, केतकी और कमल अर्पित नहीं किए जाते। इन्हें चढ़ाना अशुभ माना जाता है।शिवलिंग पर जल या दूध चढ़ाते समय शंख का उपयोग नहीं करना चाहिए।इस दिन साधारण नमक नहीं खाना चाहिए। फलाहार या सेंधा नमक का सेवन करें।शिवजी को खट्टे फल चढ़ाना वर्जित माना जाता है। इसकी जगह मिठाई या मिष्ठान चढ़ाएं।जलधारा की दिशा (सोमसूत्र) को लांघना अशुभ माना जाता है।धार्मिक मान्यता है कि इस दिन काले रंग के वस्त्र नहीं पहनने चाहिए। इसे अशुभ माना जाता है और इससे पूजा का फल कम हो सकता है।व्रत केवल भोजन त्यागना नहीं, बल्कि मन और व्यवहार को शुद्ध करना भी है। इसलिए गुस्सा, बहस और अपशब्दों से दूर रहें।महाशिवरात्रि का व्रत जागरण और भक्ति का प्रतीक है। इसलिए दिन में सोने की बजाय मंत्र जाप या शिव कथा सुनना अधिक शुभ माना गया है।मन को शांत रखें और नकारात्मक विचारों से दूरी बनाएं।
महाशिवरात्रि व्रत पर क्या करें? (Mahashivratri 2026 LIVE)
महाशिवरात्रि का व्रत एक दिन पहले यानी त्रयोदशी तिथि से ही शुरू माना जाता है। इस दिन से ही सात्विक भोजन करना चाहिए।इस दिन चार अलग-अलग समय में पूजा करना बहुत शुभ माना गया है। हर पहर में जल, दूध, दही, शहद या घी से अभिषेक किया जाता है।शिवजी को बेलपत्र सबसे प्रिय माना जाता है। इसके साथ धतूरा, आक और सफेद फूल चढ़ाना शुभ होता है।निशीथ काल यानी मध्य रात्रि तक भजन-कीर्तन और मंत्र जाप करने से विशेष फल मिलता है। “ॐ नमः शिवाय” का जाप अत्यंत प्रभावी माना जाता है।विवाहित महिलाएं माता पार्वती को श्रृंगार सामग्री चढ़ाती हैं। मान्यता है इससे वैवाहिक जीवन सुखी रहता है।व्रत में फल, दूध, मखाना, साबूदाना आदि खाए जा सकते हैं। शाम को सेंधा नमक वाला सात्विक भोजन भी लिया जा सकता है।व्रत वाले दिन सुबह स्नान कर साफ कपड़े पहनें और व्रत का संकल्प लें।मान्यता है कि शिवलिंग की आधी परिक्रमा करनी चाहिए।
महाशिवरात्रि 2026 चार पहर का पूजन मुहूर्त (Maha Shivaratri 2026 Char Prahar Puja Muhurat)
प्रथम प्रहर – 15 फरवरी, शाम 6:11 से रात 9:23 तकद्वितीय प्रहर – रात 9:23 से 12:36 तकतृतीय प्रहर – रात 12:36 से सुबह 3:47 तकचतुर्थ प्रहर – 16 फरवरी, सुबह 3:47 से 6:59 तक
क्या शाम को शिवलिंग पर जल चढ़ा सकते हैं? (Mahashivratri 2026 LIVE)
शिवपुराण के अनुसार, शिवलिंग पर जल चढ़ाने का सबसे उत्तम समय सुबह का होता है। शाम के समय सूर्यास्त के बाद जल चढ़ाना भी शुभ माना गया है। जल के साथ दूध, दही, घी, गंगाजल, बेलपत्र, फूल, धतूरा आदि भी अर्पित किए जा सकते हैं। जल अर्पित करते समय शिव मंत्रों का उच्चारण करना अधिक फलदायी माना जाता है।
शंख से जल न चढ़ाएं (Mahashivratri 2026 LIVE)
शिवलिंग पर शंख से जल चढ़ाना वर्जित माना गया है। पौराणिक कथा के अनुसार, शिवजी ने एक बार शंखचूड़ नामक राक्षस का वध किया था। शंख उसी राक्षस की हड्डियों से बना होता है। यही कारण है कि शिव पूजा में शंख का इस्तेमाल नहीं किया जाता। जब भी शिवलिंग पर जल अर्पण करें तो इस बात का ध्यान रखें कि आप शंख का उपयोग न करें।
माता पार्वती के मंत्र (Mahashivratri 2026 LIVE)
ॐ पार्वत्यै नमःॐ नमः पार्वती पतये नमः ॐ पार्वतीपतये नमः या देवी सर्वभूतेषु मां गौरी रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:॥हे गौरी शंकरार्धांगी, मां कुरु कल्याणी, कान्त कान्तां सुदुर्लभाम्।ॐ उमामहेश्वराभ्यां नमः
चार प्रहर की पूजा में करें इन मंत्रों का जाप (Mahashivratri 2026 LIVE)
ह्रीं ईशानाय नमः
ह्रीं अघोराय नम:
ह्रीं वामदेवाय नमः
ह्रीं सद्योजाताय नमः
महाशिवरात्रि की शुभकामनाएं: Mahashivratri Quotes
शिव आएं आपके द्वार, भर दें खुशियों से संसार, ना रहे दुख का नाम, मुबारक हो शिव का त्योहार।
Mahashivratri ki Hardik Shubhkamnaye
Happy Mahashivratri 2026 Wishes LIVE: महाशिवरात्रि की हार्दिक शुभकामनाएं
भोलेनाथ का साथ मिले, खुशियों का आशीर्वाद मिले, जीवन में ना हो निराशा, आपको नई हर शुरुआत मिले।
महाशिवरात्रि 2026 चार पहर का पूजन मुहूर्त (Maha Shivaratri 2026 Char Prahar Puja Muhurat)
प्रथम प्रहर – 15 फरवरी, शाम 6:11 से रात 9:23 तक
द्वितीय प्रहर – रात 9:23 से 12:36 तक
तृतीय प्रहर – रात 12:36 से सुबह 3:47 तक
चतुर्थ प्रहर – 16 फरवरी, सुबह 3:47 से 6:59 तक
माता पार्वती जी की आरती (Mata Parvati Ki Aarti)
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, महाशिवरात्रि पर माता पार्वती की आरती करने से न केवल माता का आशीर्वाद मिलता है, बल्कि भगवान शिव भी शीघ्र प्रसन्न होते हैं। पूरी खबर के लिए लिंक पर क्लिक करें।
https://www.jansatta.com/religion/mahashivratri-2026-mata-parvati-ki-aarti-lyrics-in-hindi/4410232/
क्या महाशिवरात्रि व्रत में चाय पीना चाहिए (Mahashivratri 2026 LIVE)
ज्योतिषियों और शास्त्रों के अनुसार, महाशिवरात्रि व्रत के दौरान आप चाय पी सकते हैं। हालांकि साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखें।
महाशिवरात्रि की शुभकामनाएं: Mahashivratri Quotes
हर हर महादेव का नारा हो, जीवन में खुशियों का उजियारा हो, शिव की कृपा आप पर बरसे, हर दिन आपका प्यारा हो।
महाशिवरात्रि का व्रत कब खुलता है? (Mahashivratri 2026 LIVE)
महाशिवरात्रि व्रत का पारण अगले दिन सूर्योदय के बाद किया जाता है। वर्ष 2026 में महाशिवरात्रि व्रत का पारण 16 फरवरी को सुबह 06:59 बजे से लेकर दोपहर 03:24 बजे तक किया जा सकेगा।
माता पार्वती जी की आरती (Mata Parvati Ki Aarti)
जय पार्वती माता जय पार्वती माता
ब्रह्म सनातन देवी शुभ फल कदा दाता।
जय पार्वती माता जय पार्वती माता।
अरिकुल पद्मा विनासनी जय सेवक त्राता
जग जीवन जगदम्बा हरिहर गुण गाता।
जय पार्वती माता जय पार्वती माता।
सिंह को वाहन साजे कुंडल है साथा
देव वधु जहं गावत नृत्य कर ताथा।
जय पार्वती माता जय पार्वती माता।
सतयुग शील सुसुन्दर नाम सती कहलाता।
हेमांचल घर जन्मी सखियन रंगराता।
जय पार्वती माता जय पार्वती माता।
शुम्भ निशुम्भ विदारे हेमांचल स्याता
सहस भुजा तनु धरिके चक्र लियो हाथा।
जय पार्वती माता जय पार्वती माता।
सृष्टि रूप तुही जननी शिव संग रंगराता।
नंदी भृंगी बीन लाही सारा मदमाता।
जय पार्वती माता जय पार्वती माता।
देवन अरज करत हम चित को लाता।
गावत दे दे ताली मन में रंगराता।
जय पार्वती माता जय पार्वती माता।
श्री प्रताप आरती मैया की जो कोई गाता।
सदा सुखी रहता सुख संपति पाता।
जय पार्वती माता मैया जय पार्वती माता।
महाशिवरात्रि पर इन सामग्रियों के बिना अधूरी मानी जाती है शिव पूजा (Mahashivratri 2026 Puja Samagri List)
महाशिवरात्रि पर भगवान शिव की पूजा करने से पहले पूजन सामग्री का सही होना बेहद जरूरी माना जाता है। ऐसी मान्यता है कि अगर पूजा में आवश्यक वस्तुएं शामिल न हों, तो पूजा अधूरी रह जाती है। पूरी खबर पढ़ने के लिए लिंक पर क्लिक करें।
शिव जी की आरती (Maha Shivratri 2026 Shiv Ji Ki Aarti)
जय शिव ओंकारा ॐ जय शिव ओंकारा।
ब्रह्मा विष्णु सदा शिव अर्द्धांगी धारा॥ ॐ जय शिव॥
एकानन चतुरानन पंचानन राजे।
हंसानन गरुड़ासन वृषवाहन साजे॥ ॐ जय शिव॥
दो भुज चार चतुर्भुज दस भुज अति सोहे।
त्रिगुण रूपनिरखता त्रिभुवन जन मोहे॥ ॐ जय शिव॥
अक्षमाला बनमाला रुण्डमाला धारी।
चंदन मृगमद सोहै भाले शशिधारी॥ ॐ जय शिव॥
श्वेताम्बर पीताम्बर बाघम्बर अंगे।
सनकादिक गरुणादिक भूतादिक संगे॥ ॐ जय शिव॥
कर के मध्य कमंडलु चक्र त्रिशूल धर्ता।
जगकर्ता जगभर्ता जगसंहारकर्ता॥ ॐ जय शिव॥
ब्रह्मा विष्णु सदाशिव जानत अविवेका।
प्रणवाक्षर मध्ये ये तीनों एका॥ ॐ जय शिव॥
काशी में विश्वनाथ विराजत नन्दी ब्रह्मचारी।
नित उठि भोग लगावत महिमा अति भारी॥ ॐ जय शिव॥
त्रिगुण शिवजी की आरती जो कोई नर गावे।
कहत शिवानन्द स्वामी मनवांछित फल पावे॥ ॐ जय शिव॥
भगवान शिव की प्रिय राशियां (Lord Shiva Favorite Zodiac)
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार 12 राशियों में से कुछ राशियां ऐसी मानी गई हैं, जो भगवान शिव को विशेष रूप से प्रिय हैं। इन राशियों पर भोलेनाथ की खास कृपा बनी रहती है। पूरी खबर पढ़ने के लिए लिंक पर क्लिक करें।
महादेव को प्रिय हैं ये फूल (Mahashivratri 2026 LIVE)
कनेर का फूल, धतूरे का फूल, आक का फूल
श्रीशिवषडाक्षरस्तोत्रम् (Mahashivratri 2026 LIVE)
ॐकारं बिन्दुसंयुक्तं नित्यं ध्यानन्ति योगिनः।
कामदं मोक्षदं चैव ॐकाराय नमो नमः॥ ॥
नमंति ऋषयो देवा नामन्त्यपसरसां गणः।
नरा नमंति देवेशं निश्चयाय नमो नमः॥ 2॥
महादेवं महतनं महाध्यानं परायणम्।
महापापहरं देवं मकराय नमो नमः॥ 3॥
शिवं शांतं जगन्नाथं लोकानुग्रहकारकम्।
शिवमेकपदं नित्यं शिकाराय नमो नमः॥ 4॥
वाहनं वृषभो यस्य वासुकिः कंठभूषणम्।
वामे शक्तिधरं वेदं वक्राय नमो नमः॥ 5॥ वर. देवं
यत्र यत्र स्थितो देवः सर्वबन्ध महेश्वरः।
यो गुरुः सर्वदेवानां यकाराय नमो नमः ॥ 6॥
षडक्षरमिदं स्तोत्रं यः पथेच्छिवसंनिधौ।
शिवलोकमाप्नोति शिवेन सह मोदते ॥ 7॥
क्या खड़े होकर जल अर्पित कर सकते हैं? (Mahashivratri 2026 LIVE)
शिवलिंग पर चल अर्पित करने समय इस बात का खास ध्यान रखें कि शिवलिंग पर कभी भी खड़े होकर जल अर्पण नहीं करना चाहिए। शिव पुराण के अनुसार हमेशा बैठकर और मंत्रोच्चार के साथ जल चढ़ाना चाहिए। खड़े होकर जल अर्पण करने से पूजा का फल नहीं मिलता है।
कैसे करें व्रत का पारण? जानें सरल विधि (Mahashivratri 2026 LIVE)
16 फरवरी की सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ-सुथरे वस्त्र धारण करें। इसके बाद पूजा स्थल को स्वच्छ करें और धूप-दीप जलाकर भगवान शिव की पूजा करें।पूजा के दौरान भगवान शिव को बेलपत्र, भांग, धतूरा, दूध, दही और घी अर्पित करें। शिवलिंग पर जल और दूध से अभिषेक करें। इसके बाद शिव मंत्रों का जाप करें और शिव चालीसा का पाठ करें। भगवान शिव को फल का भोग लगाना भी शुभ माना जाता है। आप केला, सेब, बेर आदि अर्पित कर सकते हैं। पूजा के अंत में शिव जी की आरती करें और उनसे आशीर्वाद मांगें। इसके बाद शुभ मुहूर्त में फलाहार जैसे फल, मखाना, साबुदाना आदि ग्रहण कर व्रत का पारण करें। कोशिश करें कि पारण सात्विक और हल्के भोजन से ही करें।
महाशिवरात्रि की हार्दिक शुभकामनाएं
शिव नाम से सब कष्ट टल जाएं, मन में खुशियों के फूल खिल जाएं, महादेव रखें सब पर हाथ, शिवरात्रि की शुभ हो रात।
