Mahashivratri 2026 Shivling Me Jal Chadane Ke Niyam: महाशिवरात्रि के पावन पर्व पर भगवान शिव की विधि-विधान से पूजा करने का विशेष महत्व बताया गया है। फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को महाशिवरात्रि का व्रत रखा जाता है। शिव पुराण के कोटिरुद्र संहिता के अध्याय 39 में महाशिवरात्रि के बारे में विस्तार से बताया गया है। इसके अलावा महाशिवरात्रि को मंदिरों में जाकर विधिपूर्वक भगवान शिव का पूजन करना चाहिए। पूजा करते समय प्रार्थना करे कि हे नीलकंठ! मैं आपसे प्रार्थना करता हूं कि आप कृपा कर मेरे जीवन में आने वाले कष्टों को दूर करें और मेरे सभी कार्य सिद्ध करें। काम, क्रोध, मोह आदि दोषों से मुझे मुक्त करें। इसके साथ ही शिवलिंग का अभिषेक करें। जलाभिषेक करना सबसे अधिक लाभकारी माना जाता है। जल के अलावा दूध, दही, घी, शहद और गंगाजल से पंचामृत तैयार कर अभिषेक करें। इसके बाद बेलपत्र, धतूरा, आक के पुष्प, चंदन, अक्षत, भांग, फल और मिठाई अर्पित करें।

आमतौर पर शिवलिंग पर जल चढ़ाना सरल माना जाता है, लेकिन इसके भी कुछ नियम और विधि बताई गई है। तो आइए जानते हैं शिवपुराण के कोटिरुद्र संहिता और विद्येश्वर संहिता के अध्याय के अनुसार शिवलिंग पर जल अर्पित करने का सही तरीका क्या है और किन बातों का ध्यान रखना चाहिए…

महाशिवरात्रि पर जलाभिषेक का मुहूर्त (Mahashivratri 2026 Jalabhishek Muhurat)

महाशिवरात्रि के दिन सुबह 08:24 बजे से दोपहर 12:35 बजे तक जलाभिषेक का सबसे उत्तम मुहूर्त रहने वाला है। इसके अलावा शाम को 06:11 बजे से लेकर शाम 07:47 बजे के बीच भी जलाभिषेक कर सकते हैं।

शिवलिंग पर किस दिशा में खड़े होकर चढ़ाएं जल?

महाशिवरात्रि पर भगवान शिव को जल अर्पित करते समय दिशा का विशेष ध्यान रखना चाहिए। शिव पुराण के अनुसार शिवलिंग पर जल चढ़ाते समय श्रद्धालु को उत्तर दिशा की ओर मुख करके खड़ा होना चाहिए। उत्तर दिशा को भगवान शिव का बायां अंग माना गया है, जो माता पार्वती को समर्पित है। इस दिशा में खड़े होकर जल अर्पित करना शुभ और कल्याणकारी माना जाता है।

इस दिशा से न करें शिवलिंग पर जल अर्पण

शिवपुराण में उल्लेख मिलता है कि शिवलिंग पर पूर्व दिशा की ओर मुख करके जल नहीं चढ़ाना चाहिए। मान्यता है कि पूर्व दिशा भगवान शिव का मुख्य प्रवेश द्वार है। ऐसे में इस ओर मुख करके जल अर्पित करना उनके मार्ग में बाधा उत्पन्न करने के समान माना गया है।

महाशिवरात्रि पर इस विधि से करें शिवलिंग का अभिषेक

  • भगवान शिव को जल हमेशा शांत और श्रद्धाभाव से धीरे-धीरे अर्पित करना चाहिए। अभिषेक के लिए तांबे, चांदी, पीतल या कांसे के पात्र का उपयोग उत्तम माना गया है। चाहें तो शुद्ध जल में थोड़ा-सा दूध मिलाकर भी अर्पित कर सकते हैं।
  • सबसे पहले उत्तर दिशा की ओर मुख करके जलहरी के दाईं ओर जल चढ़ाएं। यह स्थान भगवान गणेश का माना जाता है। यहां जल अर्पित करते समय “ॐ गणेशाय नमः” मंत्र का जाप करें।
  • इसके बाद जलहरी के बाईं ओर जल अर्पित करें। यह स्थान भगवान शिव के ज्येष्ठ पुत्र कार्तिकेय का माना जाता है। इस पर जल चढ़ाते समय ॐ कार्तिकेयाय नमः मंत्र बोले।
  • फिर जलहरी के मध्य भाग में जल चढ़ाएं। इस स्थान को भगवान शिव की पुत्री अशोक सुंदरी से संबंधित माना जाता है। यहां पर जल चढ़ाते समय ॐ क्लीं ऐं ह्रीं अशोक सुन्दर्यै स्वाहा मंत्र बोले।
  • इसके बाद जलधारी के गोलाकार भाग में जल अर्पित करें। यह स्थान माता पार्वती के हस्तकमल का प्रतीक माना जाता है।
  • अंत में शिवलिंग पर धीरे-धीरे जल चढ़ाते हुए “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का जप करें।
  • इस प्रकार विधि-विधान से किया गया जलाभिषेक भगवान शिव को अत्यंत प्रिय होता है और साधक को शुभ फल प्रदान करता है।
  • अगर आप सभी मंत्रों का जाप नहीं कर सकते हैं, तो केवल ऊं नम: शिवाय: मंत्र का ही जाप करें।

वैदिक ज्योतिष शास्त्र के अनुसार इस साल महाशिवरात्रि पर काफी शुभ राजयोगों का निर्माण होने वाला है। इस साल महाशिवरात्रि का पर्व 15 फरवरी को मनाया जाएगा। इस दिन बुधादित्य, लक्ष्मी नारायण, शुक्रादित्य से लेकर नवपंचम राजयोग का निर्माण होगा, जिससे 12 में से इन तीन राशि के जातकों को विशेष लाभ मिलने के योग बन रहे हैं। जानें इन लकी राशियों के बारे में

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डिस्क्लेमर: “इस लेख में दी गई जानकारी शिव पुराण और प्रचलित धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है। जनसत्ता इसकी पूर्ण सत्यता और परिणामों की पुष्टि नहीं करता है। किसी भी विधि या उपाय को अपनाने से पहले संबंधित विषय के विशेषज्ञ या ज्योतिषी से परामर्श अवश्य लें।”