आज दिव्य धाम की सीरीज में हम बात करने जा रहे हैं महाराष्ट्र के कोल्हापुर जिले में स्थित श्री अंबाबाई मंदिर के बारे में, जिनको हिंदू धर्म के प्रमुख शक्तिपीठों में से एक माना जाता है। इस मंदिर को अंबाबाई मंदिर के नाम से भी जाना जाता है। यहां माता महालक्ष्मी को धन, समृद्धि और सुख-शांति की देवी के रूप में पूजा जाता है। मान्यता है कि इस मंदिर में दर्शन करने से भक्तों की आर्थिक परेशानियां दूर होती हैं और घर में सुख-समृद्धि आती है। इस मंदिर को “दक्षिण काशी” भी कहा जाता है। नवरात्रि और किरणोत्सव के दौरान यहां लाखों श्रद्धालु पहुंचते हैं। वहीं यहां शुक्रवार की पालकी यात्रा विशेष आकर्षण का केंद्र होती है।

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महालक्ष्मी मंदिर का इतिहास

इतिहासकारों के अनुसार महालक्ष्मी मंदिर का निर्माण लगभग 7वीं शताब्दी में चालुक्य शासकों द्वारा कराया गया था। बाद में यादव राजाओं ने भी इस मंदिर का विस्तार करवाया। यह मंदिर अपनी प्राचीन स्थापत्य कला और पत्थरों पर की गई नक्काशी के लिए बेहद प्रसिद्ध है।

मंदिर की सबसे खास बात “किरणोत्सव” है। वर्ष में दो बार सूर्य की किरणें सीधे माता महालक्ष्मी की प्रतिमा पर पड़ती हैं। यह अद्भुत दृश्य मंदिर की वैज्ञानिक और वास्तु कला का अनोखा उदाहरण माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार यह मंदिर 108 शक्तिपीठों में से एक है। यहां देवी लक्ष्मी के साथ महाकाली और महासरस्वती की भी पूजा की जाती है।

कैसे पहुंचे महालक्ष्मी मंदिर

महालक्ष्मी मंदिर से सबसे पास एयरपोर्ट कोल्हापुर एयरपोर्ट है। इसके अलावा पुणे और बेलगाम एयरपोर्ट से भी सड़क मार्ग द्वारा आसानी से पहुंचा जा सकता है। वहीं कोल्हापुर रेलवे स्टेशन भारत के कई प्रमुख शहरों से जुड़ा हुआ है। स्टेशन से मंदिर की दूरी लगभग 5 किलोमीटर है। साथ ही मुंबई, पुणे, गोवा और बेंगलुरु से कोल्हापुर के लिए बस मिलती हैं। टैक्सी और निजी वाहन से भी आसानी से मंदिर पहुंचा जा सकता है।

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डिसक्लेमर- इस लेख में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं, पुराणों, स्थानीय कथाओं और इंटरनेट पर उपलब्ध स्रोतों पर आधारित है। इसका उद्देश्य केवल सामान्य सूचना प्रदान करना है। मंदिर से जुड़ी मान्यताओं और इतिहास को लेकर अलग-अलग लोगों की आस्थाएं और विचार हो सकते हैं। किसी भी धार्मिक अनुष्ठान या यात्रा से पहले संबंधित आधिकारिक स्रोत या विशेषज्ञ से जानकारी अवश्य प्राप्त करें।